Monday, 27 June, 2022
होमराजनीति'काले अंग्रेज, नकली केजरीवाल': खुद को पंजाब का असली आम आदमी दिखाने की होड़ में लगे चन्नी और केजरीवाल

‘काले अंग्रेज, नकली केजरीवाल’: खुद को पंजाब का असली आम आदमी दिखाने की होड़ में लगे चन्नी और केजरीवाल

चन्नी और केजरीवाल पंजाब के आम आदमी के वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए खुद को राज्य का असली ‘आम आदमी’ साबित करने के लिए आतुर हो रहे हैं.

Text Size:

चंडीगढ़: पिछले एक महीने के दौरान पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच होने वाला ज्यादातर राजनीतिक विमर्श पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच की निजी बयानबाजी में तब्दील हो गया है.

पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और दोनों नेता इस राज्य के आम आदमी के वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए खुद को पंजाब का असली ‘आम आदमी’ साबित करने के लिए आतुर हो रहे हैं. चन्नी और केजरीवाल के बीच की यह प्रतिद्वंदिता उन फायदों के बारे में भी है जिसे देने का ये दोनों नेता जनता से वादा कर रहे हैं.

चन्नी द्वारा बुधवार को केजरीवाल और आप को ‘काले अंग्रेज’ (जिसका निहितार्थ है कि वे औपनिवेशिक शासकों की तरह इस राज्य को लूट रहे हैं) कहे जाने से लेकर केजरीवाल द्वारा पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री को ‘फर्जी केजरीवाल’ बताने तक, निजी हमलों की कड़वाहट भी बढ़ती जा रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों ने दोनों नेताओं के बीच लगभग रोजाना होती इस जुबानी जंग को पूरी तरह से ‘नाटकीय’ बताया है और उनका कहना है कि प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद राज्य में किसी का भी भला नहीं करेगा. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि ‘आम आदमी’ वाला यह वार्तालाप पंजाब की राजनीति में बदलाव का एक महत्वपूर्ण संकेत है.


यह भी पढ़ें: पराग अग्रवाल अकेले नहीं हैं, IIT में बनियों ने ब्राह्मण वर्चस्व को हिला दिया है


किसने क्या कहा?

चन्नी के ‘काले अंग्रेज़’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, केजरीवाल ने गुरुवार को इसका जवाब दिया कि असलियत में तो वो काले ही हैं क्योंकि चन्नी के विपरीत (जो राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के बाद से पंजाब के भीतर भी अपनी यात्रा के लिए एक हेलीकॉप्टर का ही उपयोग कर रहे हैं) वे खुली धूप में घूमने के आदी हैं.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

अमृतसर हवाईअड्डे पर मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘यह आदमी, जो सांवला है और गंदे कपड़े पहनता है, अपने इरादे में बिल्कुल साफ है और वह जो भी वादे कर रहा है उसे जरूर पूरा करेगा.’

उनके कपड़ों के बारे में उनका बयान चन्नी की एक पहले की टिप्पणी पर दी गई प्रतिक्रिया थी, जब पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा था कि केजरीवाल लाखों का वेतन उठाते है लेकिन कपड़ों पर 5,000 रुपये भी खर्च नहीं करते.

चन्नी ने 4 अक्टूबर को प्रसारित एक साक्षात्कार में दावा किया था, ‘यह सब इसलिए है क्योंकि उन्हें इस बारे में नाटक करना है कि उनकी शर्ट ढीली है और उनके जूते फटे हुए हैं. पर यह केवल दिखावा है और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए हो रहा है. पहले तो उन्होंने कहा था कि उनके विधायक वेतन नहीं लेंगे. अब दिल्ली के विधायकों और मुख्यमंत्री की सैलरी सबसे ज्यादा है. वे झूठ क्यों बोल रहे हैं?’

हालांकि दोनों के बीच यह वाकयुद्ध केजरीवाल के कपड़ों पर चन्नी की टिप्पणी से शुरू हुआ लगता है, फिर भी दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी तेजी दिखाते हुए यह चुनौती स्वीकार कर ली है. ऐसा माना जाता है कि चन्नी द्वारा उसी वोटबैंक, जिस पर केजरीवाल ध्यान केंद्रित कर रहे थे, को निशाना बना कर फायदों की घोषणा शुरू करने के बाद से ही केजरीवाल ने उन्हें निशाने पर लेना शुरू कर दिया था.

पंजाब के एक कांग्रेसी नेता, जो अपना नाम नहीं जाहिर करना चाहते थे, ने कहा, ‘केजरीवाल का लक्षित मतदाता समूह निम्न मध्यम वर्ग का शहरी मतदाता था और चन्नी ने उनके सारे अभियान की हवा निकाल दी है.’

इस साल जून में, केजरीवाल ने घोषणा की थी कि अगर राज्य विधानसभा चुनाव में आप जीत जाती है तो पंजाब को चौबीसों घंटे आपूर्ति के साथ और प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी.

29 सितंबर को, चन्नी सरकार ने बिजली की दरों में 3 रुपये प्रति यूनिट की कटौती की घोषणा की. पंजाब के मुख्यमंत्री ने इसके बाद राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी, पानी और सीवरेज शुल्क में कमी, बिजली और पानी के बिलों के बकाया की माफी और गरीबों के लिए पांच-मरला जमीन का प्लॉट देने जैसी कई घोषणाएं भी की.

इस घटनाक्रम ने केजरीवाल को चन्नी को ‘नकली केजरीवाल’ बताने के लिए उकसाया.

केजरीवाल ने 22 नवंबर को मोगा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘पंजाब में एक नकली केजरीवाल घूम रहा है. मैं जो भी घोषणा करता हूं, वह उसकी नकल कर लेता है और कहता है कि यह सब उसने किया है. लेकिन वास्तव में, वह ऐसा करता नहीं है क्योंकि वह तो खुद नकली है. वह केवल इसका एलान भर करता है. आज मैं लुधियाना में ऑटोरिक्शा वालों से मिलने जा रहा हूं. जैसे ही उसे पता चला कि मैं उनसे मिलने जा रहा हूं, वह सुबह-सुबह उनके ऑफिस पहुंच गया… इस नकली केजरीवाल से बच के रहना बहुत जरूरी है.’

चन्नी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को असल ‘आम आदमी’ होने की चुनौती देकर पलटवार किया और एक मांझा (आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में बिस्तर में इस्तेमाल किए जाने वाले रस्सी से बनाया गया बिस्तर) बुनने में उनके साथ प्रतिस्पर्धा करने की बात कही. यह एक ऐसी गतिविधि है जो पंजाब के ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है और जिसमें चन्नी खुद के माहिर होने का दावा करता है.

चन्नी ने 18 नवंबर को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘ये लोग (केजरीवाल और उनकी टीम) कुछ नहीं जानते. वे बस लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं.’

पिछले हफ्ते एक अन्य साक्षात्कार में, चन्नी ने केजरीवाल को चुनौती दी थी कि अगर वे वास्तव में जानते हैं कि मजदूर वर्ग कैसे अपना गुजारा करता है, तो वे एक तंबू लगाकर दिखाएं. चन्नी ने आगे कहा, ‘केजरीवाल को तो यह भी नहीं पता होगा कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं. क्या उन्होंने कभी कुर्सियों को पेंट किया है, टेंट लगाया है, कालीन साफ किए हैं? ये सब अनुभव मेरे पास है क्योंकि मैंने अपने पिता की टेंट की दुकान में अपने हाथों से काम किया है.’

इसी महीने दिए गए एक और साक्षात्कार में चन्नी ने केजरीवाल को गाय का दूध दुहने की चुनौती दी. पंजाब के मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ‘क्या उन्हें पंजाब के लोगों के असल जीवन के बारे में कोई भी जानकारी है?’

केजरीवाल ने चन्नी की इन चुनौतियों का जवाब देते हुए कहा, ‘मैं शायद यह नहीं जानता कि गिल्ली डंडा और कंचे कैसे खेलना है या गाय का दूध कैसे दुहना है, लेकिन मुझे अच्छे से पता है कि स्कूल कैसे बनाए जाते हैं और मुझे यह भी पता है कि कैसे अपने बच्चों का भविष्य बनाना है.’

हालांकि, पटियाला स्थित पंजाबी विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के सदस्य प्रोफेसर जतिंदर सिंह को लगता है कि आम आदमी की जो परिभाषा केजरीवाल दिल्ली के संदर्भ में समझते हैं, वह पंजाब में काफी अलग है और यहीं से यह लड़ाई शुरू होती है.

उन्होंने आगे कहा, ‘दिल्ली में आम आदमी एक शहरी वातावरण में रहते हुए पैंट-शर्ट और मफलर पहनता है. यहां, चूंकि वातावरण मुख्य रूप से ग्रामीण है, इसलिए यहां का आम आदमी वह है जो गायों का दूध दुह सकता है और जो रस्सी से बिस्तर बुन सकता है.’


यह भी पढ़ें: यूपी-2022 के लिए सियासी पारा चढ़ते ही छुटभैया नेता सक्रिय, लोकतंत्र की मजबूती में निभाते हैं अहम भूमिका


व्यंग्य बाणों से से परे की लड़ाई

‘असली आम आदमी’ की छवि को लेकर यह रस्साकशी सिर्फ शब्दों की लड़ाई तक ही सीमित नहीं है. चन्नी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि उसकी खुद के द्वारा वर्णित ‘सीधी-सादी आदतों’ को उपयुक्त रूप से प्रदर्शित किया जाए.

मीडिया में तमाम ऐसे खबरें आ रही हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने नवविवाहितों को बधाई देने के लिए अपने काफिले को रोक दिया या फिर गांवों में लोगों के घरों में जाकर उनके साथ खाने के लिए फर्श पर बैठे, अथवा उन्होंने एक खाई में गिरी गाय को बचाने में मदद की.

चुनाव से पहले ऑटोरिक्शा चालकों से मिलते समय चन्नी ऑटोरिक्शा चालक संघ के कार्यालय के बाहर एक बेंच पर बैठ गए थे और उनके साथ चाय पी.

केजरीवाल ने भी 28 अक्टूबर को राज्य में अपनी एक बैठक में भाग लेने के लिए ट्रेन से पंजाब आने का फैसला किया.

ऑटोरिक्शा चालकों के साथ बैठक के दौरान, उनमें से एक ने केजरीवाल को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने न केवल वह निमंत्रण स्वीकार किया, बल्कि उसके ऑटो में बैठकर उसके घर तक की यात्रा की और खाने के लिए फर्श पर बैठ गए.

प्रोफेसर सिंह ने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सब नाटकीय है. लेकिन यहां हमें यह देखने की जरूरत है कि राजनेताओं को आम आदमी की तरह काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि यह उनके मतदाताओं को काफी पसंद आता है.’

उन्होंने कहा, ‘पहले ऐसा नहीं था. अब ‘आम आदमी ‘, ‘फकीर ‘ जैसे शब्दों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है क्योंकि वे एक ऐसा संदेश देते हैं जो लोकतंत्र में पहले से ही होना चाहिए था. लेकिन अब तथ्य यह है कि राजनेता खुद को उनके साथ जोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं और यही महत्वपूर्ण बात है.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: कृषि कानूनों का रद्द होना तो मलाई है, लेकिन खुरचन है इस आंदोलन की दूरगामी उपलब्धि


 

share & View comments