नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता पी. मुरलीधर राव ने सोमवार को कहा कि सरकार भले ही बहुमत के जनादेश से बनती हो, लेकिन वह तभी तक टिकती है जब तक जनता की सहमति उसके साथ रहती है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. इसे मोदी सरकार के लिए एक परोक्ष संदेश माना जा रहा है.
नीट पेपर लीक को लेकर हुए जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाने वाले बीजेपी के वह दूसरे नेता हैं. इससे पहले मुरली मनोहर जोशी भी इस मुद्दे पर अलग राय रख चुके हैं.
पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह दुखद है.
साल 2013 से 2020 तक बीजेपी के महासचिव रहे मुरलीधर राव ने कहा कि अच्छी सरकार की सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा होता है. उनकी यह टिप्पणी धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद आई है. छात्रों का लगातार दबाव था कि नीट पेपर लीक मामले में उन्हें पद छोड़ना चाहिए.
यह क्या बोल बैठे मुरलीधर जी?
भाजपा के अंदर क्या हो रहा है? https://t.co/rCOGpWJucB— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) July 27, 2026
उन्होंने एक्स पर लिखा, “जैसे धर्मराज युधिष्ठिर का रथ सत्य और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण जमीन से ऊपर चलता था, उसी तरह शासन भी हमेशा ईमानदारी और नैतिकता पर टिका होना चाहिए.”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मुरली मनोहर जोशी ने भी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा, “देर आए, दुरुस्त आए. श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया है. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री भी अब तुरंत और सही फैसला करेंगे. मैं सभी छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन खत्म करने के लिए बधाई देता हूं. उम्मीद है कि अब भारतीय शिक्षा व्यवस्था में जल्द शांति लौटेगी और युवाओं को अपने उज्ज्वल भविष्य और प्रगति के पर्याप्त अवसर मिलेंगे.”
उधर, मुरलीधर राव की टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल होने और कांग्रेस समेत विपक्ष के नेताओं द्वारा उठाए जाने के बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “मुरलीधर जी के मुंह से आखिर क्या निकल गया? बीजेपी के अंदर चल क्या रहा है?”
Better late than never. Shri Dharmendra Pradhan has submitted his resignation. I hope that the Prime Minister will also take an immediate and timely decision. I appreciate and congratulate all the students for their peaceful conclusion to the movement. I hope that now peace will…
— Dr. Murli Manohar Joshi (@DrMurliManohar_) July 25, 2026
इसके जवाब में राव ने कहा कि उनकी टिप्पणी उसी संदर्भ में थी, जब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था.
उन्होंने उस समय एक्स पर लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला देश के छात्रों और युवाओं के हितों के प्रति उनकी अटल प्रतिबद्धता को दिखाता है. उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार का सिद्धांत हमेशा साफ रहा है कि ऐसे मुद्दों पर भारत को कभी बंटने नहीं दिया जाएगा. उनका कहना था कि सरकार का मकसद यह नहीं है कि कौन जीता या हारा, बल्कि यह है कि देश और मजबूत और एकजुट होकर आगे बढ़े.
पवन खेड़ा की पोस्ट का जवाब देते हुए राव ने लिखा, “मैंने फैसले के संदर्भ में यही कहा था. नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हमेशा इसी सोच पर चली है—चाहे कृषि कानून वापस लेने का फैसला हो या अब शिक्षा सुधार. हमारा नेतृत्व विरोधियों के दबाव से नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों से प्रेरित होता है.”
The decision of Hon'ble Prime Minister Shri @narendramodi ji reflects a steadfast commitment to the interests of the students and youth of our great nation. When the trust and confidence of the people are at stake, there can be no room for personal prestige or ego. The guiding…
— P Muralidhar Rao (@PMuralidharRao) July 25, 2026
सोमवार को अपनी एक्स पोस्ट में आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले और स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक रहे मुरलीधर राव ने यह भी कहा कि किसी भी नेता को अपना वचन नहीं तोड़ना चाहिए.
उन्होंने लिखा, “‘प्राण जाए पर वचन न जाए’—भगवान श्रीराम का यह आदर्श हर जनप्रतिनिधि को याद दिलाता है कि अपने वचन पर कायम रहना ही जनता के भरोसे की नींव है.”
उन्होंने आगे कहा, “भारत में शासन की जिम्मेदारी संभालने वाले हर नेता के लिए यही सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: सिर्फ प्रदर्शन होने से पुलिस की ज्यादती सही नहीं ठहराई जा सकती: CJI सूर्यकांत