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Thursday, 18 July, 2024
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जावेद अख्तर से लेकर किसानों को बदनाम करने तक – कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज हैं ये 8 मामले

हिमाचल भाजपा ने चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप अपने मंडी उम्मीदवार कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का खुलासा किया है. सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में उन पर एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है.

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चंडीगढ़: हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार और अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ आठ आपराधिक मामले चल रहे हैं. मुंबई में गीतकार जावेद अख्तर द्वारा मानहानि का एक मामला, बठिंडा में पंजाब की महिला किसान आंदोलनकारी महिंदर कौर द्वारा एक और मानहानि का मामला, और मुंबई में अभिनेता आदित्य पंचोली और उनकी पत्नी जरीना वहाब द्वारा दो और मानहानि का मामला इसमें शामिल है.

जबकि रनौत के खिलाफ अंधेरी की 10वीं मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में उस मामले में आरोप तय किए गए हैं जिसमें आरोप लगाया गया था कि गीतकार जावेद अख्तर ने अभिनेता ऋतिक रोशन के खिलाफ दिए बयान के लिए उन्हें परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी, वहीं पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय उनके कथित सोशल मीडिया पर डाली गई एक पोस्ट जिसमें महिंदर कौर की तुलना शाहीन बाग की “दादी” से की गई थी, उस पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए रनौत की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. पंचोली और वहाब के मामलों पर स्टे लगा दिया गया है.

इन तीन मामलों के अलावा, मुंबई में लेखक आशीष कौल द्वारा रनौत के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का एक मामला दर्ज है, और कर्नाटक में एक पुलिस शिकायत की गई है जिसमें एक्स पर कथित किसान विरोधी पोस्ट के लिए उनके खिलाफ एफआईआर की मांग की गई है.

कई कथित एक्स पोस्ट जिनके आधार पर रनौत के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं, वह अब माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (तब ट्विटर) पर नहीं मिल पाएंगी.

इसके अलावा, अक्टूबर 2020 में बांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश पर रनौत के खिलाफ राजद्रोह के आरोप के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई थी. वहीं, किसानों के विरोध प्रदर्शन को अलगाववादी समूहों के साथ जोड़ने वाले एक पोस्ट के लिए एक और एफआईआर नवंबर 2021 में मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी.

हिमाचल प्रदेश भाजपा ने भारत के चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुपालन में, इन मामलों का विवरण, राज्य भाजपा प्रमुख राजीव बिंदल के हस्ताक्षरों के साथ, अपने एक्स हैंडल @BJP4Himachal पर पोस्ट किया है.

जावेद अख्तर और आशीष कौल के मामले

ईकोर्ट पोर्टल पर विवरण के अनुसार, अख्तर ने नवंबर 2020 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष रनौत के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसमें दावा किया गया कि कंगना रनौत ने बॉलीवुड में मौजूदा “कोटरी या मंडली” के संदर्भ में उनका नाम घसीटा. कथित तौर पर उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक टीवी इंटरव्यू में ऐसा किया था.

बॉलीवुड “मंडली” के बारे में बात करते हुए, रनौत ने कहा था, “एक बार जावेद अख्तर ने मुझे अपने घर बुलाया और मुझसे कहा कि राकेश रोशन और उनका परिवार बहुत बड़े लोग हैं.”

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर आप उनसे माफी नहीं मांगेंगी तो आपके लिए कहीं कोई जगह नहीं बचेगी. वे तुम्हें जेल में डाल देंगे और अंततः तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी. वह मुझ पर चीखे और चिल्लाये. मैं उनके घर में कांप रही थी.

इंटरव्यू में, रनौत ऋतिक रोशन के साथ अपने संबंधों के दावों के बारे में बात कर रही थी, जिसका रोशन ने लगातार खंडन किया, जिससे दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी लड़ाइयों की एक श्रृंखला शुरू हो गई.

फरवरी 2021 में, अंधेरी की 10वीं अदालत के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आर.आर. खान ने जावेद अख्तर के मामले में अपना आदेश पारित किया, जिसमें आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत कंगना रनौत के खिलाफ आपराधिक मानहानि की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया गया.

मार्च 2022 में एक अन्य आदेश में, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आर.आर. खान की अदालत ने उनके सामने पेश होने से स्थायी छूट के लिए रनौत के आवेदन को खारिज कर दिया. लेकिन साथ ही, अदालत ने उन्हें मामले में एक विशिष्ट या प्रासंगित स्थिति होने उनके अदालत में पेश होने से छूट संबंधी आवेदन पर विचार करने का आश्वासन दिया.

मामले की आखिरी सुनवाई की तारीख 16 मार्च 2024 को अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष अनुपस्थित थे जबकि उनके वकील मौजूद थे. इसने उस दिन के लिए रनौत की ओर से दायर छूट आवेदन को मंजूरी दे दी और मामले को 20 अप्रैल 2024 के लिए स्थगित कर दिया.

हिमाचल प्रदेश भाजपा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, जावेद अख्तर द्वारा दायर मामला प्रगति पर है और रनौत ने जवाबी शिकायत दर्ज की है.

दिद्दा: द वॉरियर क्वीन ऑफ कश्मीर, और इसके हिंदी संस्करण दिद्दा: कश्मीर की योद्धा रानी के हिंदी संस्करण के लेखक आशीष कौल ने 2021 में अपनी फिल्म, मणिकर्णिका रिटर्न्स: द लीजेंड ऑफ दिद्दा की घोषणा के बाद रनौत पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया.

कौल ने दावा किया कि लोहार (पुंछ) की राजकुमारी और कश्मीर की रानी दिद्दा की जीवन कहानी पर उनका विशेष कॉपीराइट है.

12 मार्च 2021 को मुंबई की एक अदालत ने कौल की शिकायत के आधार पर रनौत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

हिमाचल प्रदेश बीजेपी द्वारा अपलोड की गई जानकारी के मुताबिक, एफआईआर को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है.


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कौर, पंचोली और उनकी पत्नी द्वारा दर्ज मामले

जनवरी 2021 में, महिंदर कौर ने बठिंडा अदालत में अपनी शिकायत दर्ज की, जिसमें आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि के लिए कंगना रनौत के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की मांग की गई.

कौर ने एक एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि कंगना ने दिल्ली-हरियाणा सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के दौरान उनकी तुलना शाहीन बाग में “दादी” से की थी. कंगना ने कथित तौर पर अपनी पोस्ट में लिखा था कि विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी भाड़े के थे.

अदालत ने मामले में रनौत को तलब किया था. हालांकि, अभिनेता ने एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसका उल्लेख हिमाचल प्रदेश भाजपा ने अपने एक्स पोस्ट में किया था.

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की वेबसाइट से पता चलता है कि 25 सितंबर 2023 को मामले में अंतिम अंतरिम आदेश में, रनौत के वकील ने स्थगन का अनुरोध किया था. मामले को 17 जनवरी 2023 तक के लिए स्थगित कर दिया गया. वेबसाइट पर उस दिन से किसी अंतरिम आदेश का उल्लेख नहीं है और मामले को 16 मई 2024 के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

अभिनेता आदित्य पंचोली और उनकी अभिनेता पत्नी जरीना वहाब ने अक्टूबर 2017 में अंधेरी अदालत में कंगना रनौत के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मानहानि की शिकायतें दर्ज कीं. ये शिकायतें तब आईं जब कंगना ने एक टीवी साक्षात्कार में आरोप लगाया कि जब वह फिल्म इंडस्ट्री नई थीं तो पंचोली के साथ उनके संबंध थे और उनके साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया जाता था.

हिमाचल बीजेपी ने एक्स पर लिखे एक पोस्ट में कहा है कि 2019 में रनौत द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद मुंबई के डिंडोशी में सत्र अदालत ने दोनों मामलों पर रोक लगा दी.

रनौत के खिलाफ तीन FIR

9 अक्टूबर 2020 को, कर्नाटक की एक न्यायिक अदालत ने वकील रमेश नाइक द्वारा शिकायत दर्ज करने के बाद उस वर्ष 21 सितंबर को एक एक्स (तब ट्विटर) पोस्ट के लिए रनौत के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी पोस्ट का स्पष्ट इरादा “दंगे भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाने” का था जिससे कृषि कानूनों का विरोध करने वाले लोगों को नुकसान पहुंच सके.

हिमाचल प्रदेश बीजेपी द्वारा किए गए पोस्ट में कहा गया है कि मामले को कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है.

17 अक्टूबर 2020 को, मुंबई के बांद्रा की एक अदालत ने कथित तौर पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के लिए रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. यह आदेश तब आया जब साहिल अशरफ अली सैय्यद ने एक शिकायत दर्ज की, जिसमें दोनों बहनों पर सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणियों के माध्यम से सांप्रदायिक नफरत फैलाने व हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था.

शिकायतकर्ता ने कहा कि रनौत ने पिछले कुछ महीनों से अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट के साथ-साथ टीवी इंटरव्यू के माध्यम से बॉलीवुड पर भाई-भतीजावाद और पक्षपात करने का आरोप लगाकर उसे बदनाम करने की व हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की है.

हिमाचल प्रदेश बीजेपी के पोस्ट में कहा गया है कि एफआईआर को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. बॉम्बे एचसी वेबसाइट के अनुसार, 23 नवंबर 2020 को दायर मामला अभी भी “प्रि-एडमिशन” चरण में है.

23 नवंबर 2021 को, रनौत के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर “जानबूझकर” “किसान मोर्चा” को “खालिस्तानी आंदोलन” के रूप में चित्रित करने और सिख समुदाय को “खालिस्तानी आतंकवादी” कहने का आरोप लगाया गया था.

मुंबई स्थित व्यवसायी अमरजीत सिंह संधू (47) ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के नेताओं के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज की जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई.

शिकायत में कहा गया है, “खालिस्तानी आतंकवादी भले ही आज सरकार की बांहें मरोड़ रहे हों… लेकिन, हमें उस महिला को नहीं भूलना चाहिए… एक मात्र महिला प्रधानमंत्री जिसने ‘इनको अपनी जूती के नीचे क्रश किया था’.”

उस समय, डीएसजीएमसी के पूर्व अध्यक्ष और अब भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें मामले का विवरण दिया गया था और उन्हें दी गई सुरक्षा और पद्म श्री वापस लेने की मांग की गई थी.

हिमाचल प्रदेश भाजपा ने कहा कि मामला बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती के अधीन है.

बॉम्बे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध मामले की जानकारी के अनुसार, मामला 25 जनवरी 2022 को आखिरी बार सुने जाने के बाद से सुनवाई के लिए नहीं आया है.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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