Tuesday, 5 July, 2022
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कबीर दास ने जहां बिताए जीवन के अंतिम क्षण, कबीरपंथी कैसे देखते हैं इस चुनाव को

संत कबीर नगर के कबीर पंथियों के मन में टीस है कि नेताओं ने वादे कई किए लेकिन विकास कुछ नहीं हुआ. यहां के लोग नेताओं को कबीर के विचारों से कुछ सीखने की अपील कर रहे है.

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कबीरनगर: संत कबीर दास का जन्म यूं तो वाराणसी में हुआ लेकिन जीवन के अंतिम क्षण उन्होंने मगहर में बिताए. मगहर में कबीर की समाधि भी है और उनकी मज़ार भी. यहां रोजाना सैकड़ों कबीरपंथी आते हैं जिनमें हिंदू भी होते हैं और मुस्लिम भी. इन कबीर पंथियों के बीच हम चुनावी माहौल का जायजा लेने पहुंचे. संत कबीर नगर के कबीर पंथियों के मन में टीस है कि नेताओं ने वादे कई किए लेकिन विकास कुछ नहीं हुआ. यहां हिंदू-मुस्लिम भी कोई मुद्दा नहीं बल्कि यहां के लोग नेताओं को कबीर के विचारों से कुछ सीखने की अपील कर रहे है.

यहां रग-रग में बसे कबीर

बस्ती मंडल में शामिल संत कबीर नगर जिले का मुख्यालय खलीलाबाद है. यहां से लगभग 8 किमी. की दूरी पर मगहर है. संत कबीर के परिनिर्माण स्थल मगहर में घुसते ही कबीरदास के दोहे सुनने को मिलते हैं. हर दीवार पर कबीर की वाणी लिखी है. यहां केवल अपने देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं. यहां के लोग बताते हैं कि दुनिया भर के ढाई करोड़ से अधिक कबीरपंथियों के लिए मगहर तीर्थ स्थल के तौर पर देखा जाता है. मगहर क़स्बे में तमाम स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के अलावा तमाम दुकानों और प्रतिष्ठानों के नाम भी कबीर के नाम पर मिलते हैं.


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सरकार ने किया था बड़ा टूरिस्ट स्पॉट बनाने का वादा

यहां के लोकल अखबारों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मगहर पर चार सौ करोड़ खर्च करने का वादा किया था. साल 2018 में यहां पीएम मोदी और सीएम योगी ने कबीर एकेडमी का शिलान्यास भी किया था. समाधी से कुछ दूरी पर ये एके़डमी बन रही है. इसमें शोध संस्थान बनना शुरू भी होगा. इसके बावजूद कई बुनियादी सुविधाएं अभी यहां नहीं हैं. व्यवस्थापक अरविंद दास शास्त्री का कहना है कि देश-विदेश यहां पर्यटक आते हैं लेकिन उनके रुकने के लिए कोई गेस्ट हाउस नहीं है. मजबूरी में वह खलीलाबाद या गोरखपुर जाकर होटल में रहते हैं. इसके अलावा उनकी मांग है कि यहां पर कबीर साहब के नाम पर म्यूजियम होना जाहिए जिससे भक्त उनसे जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां प्राप्त कर सकें.

‘कबीर के विचारों से सीखें आज के नेता’

यहां के व्यवस्थापक संत अरविंद दास शास्त्री बताते हैं कि संत कबीर नगर से चुनाव लड़ने वाला हर बड़े दल का प्रत्याशी कबीर की समाधि पर आता है और दर्शन के बाद लोगों से सहयोग करने की अपील भी करता है. पिछले कई चुनाव से ऐसा होता आ रहा है और जीतने के बाद यही प्रत्याशी मगहर के विकास के लिए काम करना भूल जाते हैं. इस बार भाजपा, कांग्रेस व महागठबंधन के प्रत्याशी यहां दर्शन करने आए थे. कबीरपंथी अमरजीत दास ने बताया कि मगहर में हर दल को लोग वोट मांगने आते हैं लेकिन वह अपना एजेंडा को पूरा कर जाते हैं लेकिन मगहर के असल मुद्दे भूल जाते हैं.

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महाराष्ट्र से यहां आए देवजीत कहते हैं कि कबीर ने कभी हिंदू-मुस्लमान में फर्क नहीं किया लेकिन आज की राजनीति जाति-धर्म पर ही आकर टिक गई है. चाहे महाराष्ट्र हो या यूपी हर जगह यही हाल है. उनके मुताबिक, सबसे पहले आम जनता को कबीर के विचारों से सीखना चाहिए. जब जनता जागरुक हो जाएगी तो नेताओं को भी मजबूर होकर ये प्रोपेगेंडा खत्म करना पड़ेगा.


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हिंदू-मुस्लिम यूनिटी का प्रतीक है मगहर

यहां दर्शन करने आए जुनैद अहमद कहते हैं कि ये कबीर की शिक्षा ही है जहां नफरत की सियासत के बावजूद आज तक कभी दंगे नहीं हुए. कबीर पंथियों के लिए मगहर में कबीर दास की यह समाधि और दूसरी तरफ उनकी मजार किसी ताजमहल से कम नहीं है. यहां गोरखपुर से आए जगदीश नारायण का कहना है कि कबीर साहब ने मानव को जीवन जीने का तरीका सिखाया. कबीर कहते थे ‘कबीरा मन निर्मल भया, जैसा गंगा नीर.’

अगर हमारे नेता भी इस पंक्ति को अपने जीवन में उतारें तो राजनीति भी स्वच्छ हो सकती है. यहां पर हिंदू-मुस्लिम फैक्टर वाली राजनीति नहीं होती. हम लोग चाहते हैं कि बाकि शहरों में भी ऐसा हो जाए.

क्या हैं चुनावी समीकरण

बीजेपी ने यहां मौजूदा सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट काटकर प्रवीण निषाद को उतारा है. विधायक को जूते मारने का वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी ने शरद का टिकट काट दिया. गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर कुशल तिवारी और कांग्रेस ने भालचंद यादव को टिकट दिया है. दोनों पूर्व सांसद हैं. यहां लोकल बनाम बाहरी फैक्टर भी है. कांग्रेस प्रत्याशी भालचंद इसी फैक्टर पर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन असल मुकाबला यहां बीजेपी बनाम महागठबंधन का ही दिख रहा है. अब भालचंद जिसके वोट काटेंगे उसका नुकसान होना भी तय है.

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