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Wednesday, 4 February, 2026
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मणिपुर के अगले सीएम युमनाम खेमचंद—ब्लैक बेल्ट BJP विधायक, जिन्होंने बीरेन से इस्तीफा मांगा था

खेमचंद उन बीजेपी विधायकों में से थे जिन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को बताया था कि बीरेन सिंह के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है और इससे पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है. लेकिन वह हमेशा बीरेन के खिलाफ नहीं थे.

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नई दिल्ली: 62 वर्षीय मैतई बीजेपी विधायक युमनाम खेमचंद सिंह, जो ऐसे समय में मणिपुर के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं जब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा है, हमेशा साफ और बेबाक बोलने के लिए जाने जाते हैं.

2024 में हुई एक बैठक में, जब मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा था, खेमचंद ने खुलकर एन. बीरेन सिंह से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था. उस समय उनकी सरकार शांति बहाल करने में नाकाम रही थी और जनता में गुस्सा बढ़ रहा था.

उस बैठक में मौजूद एक बीजेपी नेता ने दिप्रिंट को बताया कि खेमचंद ने कहा था कि पार्टी के सभी विधायक बीरेन के साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं. “मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी, लेकिन ज्यादा कुछ नहीं कहा.”

इसके बाद के महीनों में, आरएसएस के करीबी माने जाने वाले खेमचंद, पूर्व मुख्यमंत्री के मुखर आलोचक बन गए.

जून 2024 में, जब मणिपुर में जातीय संघर्ष जारी था, तब भी खेमचंद पीछे नहीं हटे. उस समय हथियारों से लैस दो दर्जन से ज्यादा लोग जीपों में सवार होकर इंफाल में उनके घर के बाहर पहुंचे. वे गाड़ियों से उतरकर उनके घर के गेट की ओर बढ़ने लगे.

गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरा हंगामा रिकॉर्ड हो गया. सुरक्षा कर्मी गेट पर पहुंचे, पुलिस को सूचना दी गई और हथियारबंद लोगों को पीछे हटना पड़ा. यह जानकारी दो राज्य बीजेपी नेताओं और एक सुरक्षा अधिकारी ने दी, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से बात की.

खेमचंद उन बीजेपी विधायकों में भी शामिल थे जिन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने कई बार दिल्ली बुलाया, ताकि जमीनी हालात की जानकारी ली जा सके. उन्होंने बताया कि बीरेन सिंह के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है और इसका पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है.

उनकी बात गलत नहीं साबित हुई. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी राज्य की दोनों सीटें हार गई.

9 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से कुछ दिन पहले भी खेमचंद दिल्ली में थे. उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को बताया था कि बीजेपी के कुछ विधायक कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं, जिससे सरकार गिर सकती है. यह अहम जानकारी थी, जिसने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को बीरेन सिंह से इस्तीफा मांगने के लिए मजबूर किया.

विडंबना यह रही कि मंगलवार को खुद बीरेन सिंह ने खेमचंद के नाम का प्रस्ताव बीजेपी के विधायक दल नेता के तौर पर रखा.

हमेशा बीरेन विरोधी नहीं थे खेमचंद

हालांकि, खेमचंद हमेशा बीरेन विरोधी नहीं थे. इंफाल के अंदरूनी इलाके के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके खेमचंद को 2017 से 2022 तक बीरेन सिंह सरकार के पहले कार्यकाल में विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था.

एक दूसरे बीजेपी विधायक ने, नाम न छापने की शर्त पर कहा, “उस समय वह बीरेन के वफादार थे. पहली बार विधायक बनने पर ही उन्हें स्पीकर बनाया गया था.”

2022 में बीजेपी के दोबारा सत्ता में आने के बाद भी खेमचंद पार्टी के चहेते बने रहे. उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और नगर प्रशासन व आवास विकास, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, और शिक्षा जैसे अहम विभाग सौंपे गए.

दिसंबर 2025 में, खेमचंद ने एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें 62 साल की उम्र में उन्होंने सियोल में ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन से 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट हासिल की.

कक्षा 10 तक पढ़े खेमचंद ने 2000 के शुरुआती वर्षों में राजनीति में कदम रखा था, लेकिन उन्होंने अपना पहला चुनाव 2017 में लड़ा.

कुकी राहत शिविर जाने वाले पहले मैतई विधायक

संघर्ष के बाद मणिपुर जातीय आधार पर बंट गया. मैतई समुदाय के लोग घाटी तक सीमित हो गए और कुकी-जो समुदाय पहाड़ी इलाकों में रहने लगे.

विभाजन इतना गहरा था कि दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे के इलाकों में जाने की हिम्मत नहीं करते थे.

इसी तनावपूर्ण माहौल में, खेमचंद पिछले दिसंबर उखरुल के पहाड़ी जिले में कुकी-जो समुदाय के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए बने राहत शिविरों में जाने वाले पहले मैतई विधायक बने. यह दौरा राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने के ढाई साल से ज्यादा समय बाद हुआ.

हालांकि, उनके इस दौरे को कुकी-जो सिविल सोसाइटी संगठनों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा. उन्होंने इस दौरे को “अनधिकृत” और “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया. उन्होंने यह भी कहा कि विधायक ने राहत शिविरों का दौरा उस समय किया, जब वहां रहने वाले ज्यादातर लोग मौजूद नहीं थे.

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