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मल्लिकार्जुन खड़गे की फाइल फोटो । ट्विटर
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नई दिल्ली: जिस चयन समिति को सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के भाग्य का फैसला करना था, उसके हिस्सा रहे कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को उनके निष्कासन के पीछे के तर्क पर सवाल खड़ा किया.

इससे पहले सीबीआई चीफ और उनके डिप्युटी, विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को एक-दूसरे पर आरोप लगाये जाने के कारण दो महीने से कुछ पहले फोर्स लीव पर भेजा गया था. सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को दोबारा सीबीआई निदेशक पद पर उनकी शक्ति में कटौती के साथ बहाल कर दिया था.

चयन समित में प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता खड़गे, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई शामिल हैं. गोगोई खुद को पैनल से अलग करते हुए अपनी जगह जस्टिस एके सीकरी को नामित किया था, क्योंकि वे सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच के सदस्य थे, जिसने वर्मा को मंगलवार को दोबारा सीबीआई पद पर बहाल किया था.

खड़गे का मत

खड़गे ने कमेटी को दिये 10 आरोपों में से 6 को निराधार पाया और 4 को आगे की जांच के लिए ज़रूरी समझा. खड़गे ने मांग की कि वर्मा की पूरी शक्ति बहाल की जाये और 23-24 अक्टूबर की रात जब उनको हटाया गया तो उन परिस्थितियों को गौर से देखने के लिए एक उच्च शक्ति वाली कमेटी गठित हो.

सूत्रों के अनुसार, खड़गे ने सीवीसी की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उसकी रिपोर्ट पर सवाल खड़ा किया. उनका तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को हटाने के फैसले को पलटा है, इससे सीवीसी की भूमिका पर सवाल उठते हैं.

कांग्रेस नेता ने एक स्वतंत्र जांच की यह कहते हुए मांग की कि वर्मा को आरोपों पर स्पष्टीकरण देनेके लिए कोई मौका नहीं दिया गया.

आनंद शर्मा ने भी की केंद्र की खिंचाई

इससे पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि केंद्र सरकार अपने गलत कामों को छुपाने के लिए वर्मा को निष्प्रभावी बनाना चाहती थी और उन्हें तबादले के लिए ‘जल्दबाज़ी’ कर रही थी.

शर्मा ने कहा, ‘सरकार इस शर्मिंदगी से बाहर निकलना चाह रही है. प्रधानमंत्री घमंडी हैं. वह अपने गलत काम के लिए कभी माफी नहीं मांगेंगे. प्रधानमंत्री सोचते हैं न वह संसद के प्रति ज़िम्मेदार हैं न ही कानून के प्रति.’

उन्होंने पूछा ‘लेकिन इसके बाद सरकार में इतनी घबराहट क्यों है? प्रधानमंत्री किसके बारे में चिंतित हैं? वो क्या है जिसकी वह नहीं चाहते कि सीबीआई जांच करे.’

शर्मा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘कुछ तो है जिस तरह उन्हें हटाया गया, आधी रात के छापों, जिस तरह सीआईएसएफ से बदलकर दिल्ली पुलिस को सुरक्षा एजेंसी बनाया गया, सीवीसी व्यक्तिगत रूप से आधी रात को वहां जा रहा है, इस सबकी जांच की जानी चाहिए.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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