Monday, 27 June, 2022
होमराजनीतिसुनील जाखड़ के शामिल होने से BJP को बंधी उम्मीद, ‘पंजाब में पार्टी को मिलेगा बढ़ावा, AAP से वापस आएंगे हिंदू वोट’

सुनील जाखड़ के शामिल होने से BJP को बंधी उम्मीद, ‘पंजाब में पार्टी को मिलेगा बढ़ावा, AAP से वापस आएंगे हिंदू वोट’

पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील जाखड़ पिछले सितंबर से पार्टी से नाराज चल रहे थे, जब CM पद के लिए चरणजीत चन्नी के पक्ष में उनकी अनदेखी कर दी गई थी.

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नई दिल्ली: पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील जाखड़ पार्टी के साथ 50 साल पुराना रिश्ता तोड़ते हुए गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए. ‘राष्ट्रवाद’ और ‘एकता’ के मुद्दों को अपने फैसले का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब की नब्ज को समझते हैं.

इससे बीजेपी को काफी बढ़ावा मिला है जो 2020 में अब रद्द हो चुके तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के मुद्दे पर, लंबे समय से चले आ रहे अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के साथ गठबंधन टूटने के बाद, सूबे में राजनीतिक हाशिए पर चल रही थी.

बीजेपी सूत्रों ने बताया कि पार्टी में बहुत से लोगों को लगता है कि एक जाट नेता होने के नाते जाखड़ से बीजेपी को हरियाणा में भी सहायता मिल सकती है. बीजेपी सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा जाखड़ पंजाब के बहुत से नाराज कांग्रेस नेताओं के संपर्क में भी हैं.

बीजेपी ने इस साल पंजाब असेंबली चुनावों में 65 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें उसने दो सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर 6 प्रतिशत से कुछ अधिक रहा था.

एक बीजेपी नेता ने दिप्रिंट को बताया, ‘खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रही है. जाखड़ एक बड़े नेता हैं जो राज्य की सियासत को बहुत अच्छे से समझते हैं. कांग्रेस ने पंजाब में इतने बड़े नेता के साथ सिर्फ इसलिए नाइंसाफी की क्योंकि वो एक हिंदू थे और पार्टी को एक सिख मुख्यमंत्री चाहिए था’.

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बीजेपी जाखड़ को मुख्यमंत्री पद न दिए जाने की बात कर रहे थे, जब कांग्रेस ने सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को बाहर कर दिया था. कांग्रेस ने सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को बिठा दिया और कुर्सी पर जाखड़ के दावे को नजरअंदाज कर दिया. एक वीडियो में जो फरवरी में वायरल हो गया था, जाखड़ को कहते हुए सुना जा सकता था कि पिछले साल सिंह के जाने के बाद 42 विधायक उन्हें मुख्यमंत्री देखना चाहते थे. उन्हें ये कहते भी सुना जा सकता था कि केवल दो विधायकों ने चरणजीत सिंह चन्नी का समर्थन किया था.

जाखड़ को वीडियो में कहते सुना जा सकता है, ‘40 नहीं बल्कि 42 विधायकों ने मेरे समर्थन में वोट दिया था, 16 का वोट सुखजिंदर रंधावा के लिए था, 12 वोट महारानी प्रणीत कौर (अमरिंदर सिंह की पत्नी और पटियाला सांसद) को मिले, छह वोट नवजोत सिंह सिद्धू के हिस्से में आए और दो वोट (चरणजीत सिंह) चन्नी को मिले. मुझे कोई पछतावा नहीं है. राहुल गांधी ने मुझे फोन किया और उप-मुख्यमंत्री का पद पेश किया लेकिन मैंने मना कर दिया’.

कुछ महीने पहले, गांधी परिवार की करीबी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा था कि कोई सिख ही पंजाब का मुख्यमंत्री बन सकता है. इससे पहले अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच उन्हें मुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई थी.

उस समय जाखड़ मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे के उम्मीदवारों में थे लेकिन कथित रूप से सोनी के बयान के बाद उनका नाम दौड़ से बाहर कर दिया गया.

पूर्व गुरदासपुर सांसद ने जो उसके बाद से चरणजीत सिंह चन्नी के मुखर आलोचक बने हुए थे- और जिन्होंने पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए भी उन्हीं को जिम्मेदार ठहराया था- पिछले सप्ताह कांग्रेस को अलविदा कह दिया, जो उदयपुर में चल रहे पार्टी के ‘चिंतन शिविर’ का दूसरा दिन था. अपने फैसले का ऐलान करने के लिए उन्होंने जिस फेसबुक लाइव वीडियो का इस्तेमाल किया, उसमें उन्हें पार्टी मामलात से निपटने में सोनिया गांधी की आलोचना करते देखा जा सकता है.

‘छोड़ना कोई आसान काम नहीं था

तीन बार के विधायक और एक बार के सांसद जाखड़ के पास जो पिछली जुलाई तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे एक समृद्ध राजनीतिक विरासत है. उनके पिता बलराम जाखड़ सबसे लंबे समय तक लोकसभा के स्पीकर के पद पर रहे और नरसिम्हा राव सरकार में एक केंद्रीय मंत्री भी रहे.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि जाखड़ राज्य में पार्टी को मज़बूत करने में एक विशेष भूमिका निभाएंगे.

जाखड़ के बीजेपी में शामिल होने के बाद नड्डा ने कहा, ‘वो एक बहुत अनुभवी नेता है और राजनेताओं के परिवार से आते हैं, जिन्होंने तीन महीने से अधिक समय तक देश की सेवा की है. पार्टी से इतर उनकी एक अपनी पहचान है. उन्होंने किसानों और युवाओं के लिए काम किया है, और उनकी छवि एक ईमानदार राजनेता की है’.

बीजेपी में शामिल होने के कुछ समय बाद ही जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस को छोड़ना उनके लिए कोई आसान काम नहीं था, चूंकि पार्टी के साथ उनके रिश्ते जिसे वो अपना ‘परिवार’ समझते थे, 1972 तक जाते थे.

जाखड़ ने कहा, ‘छोड़ना कोई आसान काम नहीं था क्योंकि मेरे परिवार की तीन पीढ़ियों ने पार्टी को एक परिवार की तरह समझते हुए उसकी सेवा की है’.

संसद के पूर्व लोकसभा सदस्य ने कहा कि पार्टी छोड़ने का उनका फैसला व्यक्तिगत नहीं था बल्कि राज्य में ‘राष्ट्रवाद’, ‘भाईचारे’ और ‘एकता’ जैसे मुद्दों को लेकर था.

जाखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पंजाब को बहुत अच्छे से समझते हैं और उन्होंने इसे एक ‘विशेष’ दर्जा दिया है भले वो अनौपचारिक हो.

उन्होंने कहा, ‘मैं  पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिला था. उनसे बात करने का भी मौका मिला. पंजाब ने बहुत बलिदान किए हैं. मेरा मानना है कि पीएम मोदी ने पंजाब को एक विशेष दर्जा और सम्मान दिया है. ये भले ही औपचारिक रूप से न दिया गया हो लेकिन मोदी जी पंजाब की नब्ज को समझते हैं’.


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हिंदू वोट वापस पाना

एक और बीजेपी पदाधिकारी ने कहा कि जाखड़ के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को हिंदू वोट वापस पाने में सहायता मिलेगी, जिन्हें हालिया असेंबली चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) ने हथिया लिया था.

हिंदू पंजाब की आबादी का क़रीब 38 प्रतिशत हैं और बीजेपी का पारंपरिक जनाधार रहे हैं. लेकिन, पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) बीजेपी के जनाधार का एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींचने में कामयाब हो गई. मार्च में हुए चुनावों में उसने राज्य की 117 असेंबली सीटों में से 92 सीटों पर कब्जा कर लिया.

बीजेपी नेता ने कहा कि फिर भी उनकी पार्टी की मौजूदगी में इजाफा हुआ क्योंकि 2017 में उसने केवल 23 असेंबली सीटों पर चुनाव लड़ा था जबकि 2022 में ये संख्या बढ़कर 65 हो गई.

बीजेपी नेता ने कहा, ‘2022 के असेंबली चुनाव एक प्रयोग की तरह थे ताकि हम राज्य में अंदर तक घुस सकें. 2022 असेंबली चुनावों से बहुत कुछ सीखने को मिला है. हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन भले न किया हो लेकिन इससे हमें रणनीति बनाने में जरूर मदद मिली है कि 2024 चुनावों के लिए पंजाब में विस्तार के मामले में हमें क्या करने की जरूरत है’.

बीजेपी पदाधिकारियों के अनुसार जाखड़ के बीजेपी में प्रवेश को वरिष्ठ एसएडी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के हाल ही में पार्टी में शामिल होने के परिवेश में भी देखना होगा. दो बार के दिल्ली विधानसभा विधायक सिरसा दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष भी थे.

बीजेपी नेता ने कहा, ‘जहां सिरसा सिख समुदाय पर फोकस करेंगे वहीं जाखड़ उन हिंदुओं से रिश्ता बनाने की कोशिश करेंगे जो आप की ओर चले गए लगते हैं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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