देहरादून: तीन साल पहले मारी गई 19 वर्षीय अंकिता भंडारी के माता-पिता ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात में दो अहम मांगें रखीं. पहली, मामले की दूसरी जांच, इस बार केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए. दूसरी, इस मामले में कथित तौर पर शामिल बताए जा रहे “वीआईपी” की पहचान सार्वजनिक की जाए.
राज्य में दोबारा विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए, वीरेंद्र सिंह भंडारी और उनकी पत्नी उषा देवी ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें पौड़ी के जिला मजिस्ट्रेट का फोन आया था. फोन में बताया गया कि मुख्यमंत्री उनसे देहरादून में मुलाकात करना चाहते हैं.
वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, हमने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है. हम शुरुआत से ही यह मांग कर रहे हैं और लोग भी यही चाहते हैं. इसमें एक वीआईपी की भूमिका रही है और हम जानना चाहते हैं कि वह कौन है. सीबीआई जांच होनी चाहिए और यह किसी मौजूदा जज की निगरानी में होनी चाहिए.
माता-पिता ने कहा कि धामी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा. बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने पौड़ी के डोभ यानी श्रीकोट स्थित सरकारी नर्सिंग कॉलेज का नाम बदलकर ‘स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ’ रखने की घोषणा की.
धामी ने कहा, हमारी सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर कानूनी, निष्पक्ष और तेज कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है.
अंकिता सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू किए हुए एक महीने से भी कम समय में लापता हो गई थीं. कुछ दिनों बाद उनका शव बरामद हुआ था.

मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी बनाई गई थी. इसके बाद रिसॉर्ट के मालिक, जो एक पूर्व बीजेपी नेता का बेटा है, और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया. बाद में उन्हें अंकिता की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई. एसआईटी जांच के मुताबिक, अंकिता की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया था.
हत्या के तीन साल बाद अंकिता के मामले में फिर से नए आरोप सामने आए. अभिनेत्री उर्मिला सनावर, जो खुद को पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताती हैं, ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि अंकिता की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने “गट्टू” नाम के एक वीआईपी नेता को “अतिरिक्त सेवाएं” देने से इनकार कर दिया था.
एक वीडियो क्लिप में राठौर को कथित तौर पर इस मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम लेते हुए सुना गया. गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और सनावर और राठौर समेत अन्य के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है.
बुधवार को धामी से मुलाकात के बाद वीरेंद्र सिंह ने उत्तराखंड के लोगों से अपील की कि वे तब तक उनके साथ खड़े रहें, जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता.
उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने भी मुझसे कहा है कि जो भी इसमें शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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