Sunday, 3 July, 2022
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पंजाब में सत्ता परिवर्तन के बाद छत्तीसगढ़ के ‘CM पद के आकांक्षी’ टी.एस. सिंह देव दिल्ली पहुंचे

टी.एस. सिंह देव का कहना है कि वह एक 'निजी यात्रा' की वजह से दिल्ली में हैं. हालांकि उन्होने पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस के नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया है.

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नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस की राज्य इकाई में लंबे अरसे से चल रही लगातार खींचतान के उपरांत राज्य में मुख्यमंत्री को नाटकीय रूप से बदले जाने के बाद पार्टी को अब छत्तीसगढ़ में भी तथाकथित अंदरूनी कलह को संभालने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंह देव, जिनके बारे में माना जाता है कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए होड़ में हैं, सोमवार को अचानक दिल्ली पहुंचे. इसके कुछ ही हफ्तों पहले उन्होंने और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर उनसे राज्य में संभावित बदलाव के बारे में चर्चा की थी.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इस कथित खींचतान की जड़ में इस तरह की अटकलें हैं कि 2018 में इस राज्य में कांग्रेस की भारी जीत के बाद, पार्टी अपने सत्ता कार्यकाल के दूसरे भाग में सिंह देव को मुख्यमंत्री की कुर्सी देने का वादा किया था. जैसा कि सिंह देव खेमे के नेताओं ने पहले ही दिप्रिंट को बताया था, बघेल को पहले आधे कार्यकाला में मुख्यमंत्री के रूप में काम करना था. उनके कार्यकाल की यह अवधि जून 2021 में समाप्त हो गयी थी.

हालांकि सिंह देव ने हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में कहा कि वह एक ‘निजी यात्रा’ के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आए हैं और ‘सभी मुद्दों को पहले ही हल कर लिया गया है’.

परंतु, पिछले कुछ महीनों में कई दौर की बैठकों के बावजूद छत्तीसगढ़ में किसी तरह के संभावित बदलाव के बारे में आलाकमान की ओर से कोई अंतिम फ़ैसला नहीं किया गया है.

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इस साल अगस्त में, सिंह देव और बघेल की राहुल गांधी के साथ हुई 3 घंटे की बैठक के बाद बघेल ने इस बात के संकेत दिए थे कि मुख्यमंत्री के पद पर कोई बदलाव नहीं होगा.

बघेल ने यह भी कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी को राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही ‘विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों के निरीक्षण’ हेतु छत्तीसगढ़ आने के लिए आमंत्रित किया है, और राहुल ने इस निमंत्रण को स्वीकार भी कर लिया है. फिर भी, लगभग एक महीने बीत जाने के बावजूद भी राहुल का यह दौरा अभी होना बाकी है.

इस तथ्य को देखते हुए कि टी. एस. सिंह देव छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक लोकप्रिय व्यक्ति हैं, वह मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी नेतृत्व के साथ अपनी बातचीत जारी रखने की कोशिश कर सकते हैं.

पिछले महीने राहुल के साथ अपनी बैठक से पूर्व सिंह देव ने मीडिया को बताया था कि ‘अगर कोई व्यक्ति किसी टीम में खेलता है तो क्या वह उसका कप्तान बनने के बारे में नहीं सोचता? हर कोई इसके बारे में ज़रूर सोचता है, लेकिन सवाल उसके सोचने का नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं का है. निर्णय आलाकमान ही लेता है.’


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‘छत्तीसगढ़ के हालात की तुलना पंजाब से नहीं की जा सकती’

कांग्रेस 2018 में छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में से 68 पर शानदार जीत हासिल करते हुए राज्य की सत्ता में आई थी.

उस समय तीन नेता – बघेल, सिंह देव और ताम्रध्वज साहू.- मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक थे.

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व द्वारा कभी भी इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी, फिर भी सिंह देव खेमे का दावा है कि बघेल को पहले ढाई साल के लिए और सिंह देव को बाद वाले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद देने की बात हुई थी.

ये दोनों ही नेता पार्टी में अहम भूमिका निभाते हैं. एक ओर जहां बघेल पार्टी के एक लोकप्रिय ओबीसी चेहरा हैं, वहीं सिंह देव ने 2018 में कांग्रेस के चुनाव अभियान के अधिकांश भाग का नेतृत्व किया था.

अगस्त में, बघेल और सिंह देव की पार्टी आलाकमान के साथ बैठक से ठीक पहले मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले 55 विधायक उनके समर्थन में प्रत्यक्ष रूप से शक्ति प्रदर्शन के लिए दिल्ली आए थे.

छत्तीसगढ़ के एक कांग्रेसी नेता ने कहा, ‘यह स्पष्ट हो गया है कि अधिकांश विधायक बघेल का समर्थन करते हैं, इसलिए यहां की स्थिति की तुलना पंजाब से नहीं की जा सकती है.’

पंजाब के बारे में कहा जाता है कि पार्टी के अधिकांश विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बने रहने का विरोध कर रहे थे.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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