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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह | पीटीआई
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नई दिल्ली : तीन राज्यों में सत्ता गंवाने के ठीक एक महीने बाद अमित शाह ने अपने पार्टी की पूरी ताकत दिखाने का फैसला किया है. लोकसभा चुनाव से तीन महीना पहले, 11 और 12 जनवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा एक राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन करेगी. इस स्तर का आयोजन 2010 के बाद नहीं हुआ है.

भाजपा इस अधिवेशन में सारे जनप्रतिनिधियों, जिला अध्यक्षों और जिला महासचिव पद तक के नेताओं को संबोधित करेगी. जहां आमतौर पर ऐसे अधिवेशनों में 4 हजार लोग आते हैं, वहीं इस बार इस संख्या को 15 हजार तक करने की कोशिश होगी.

तैयारियों में लगे एक सीनियर नेता का कहना है, ‘पहले हम पार्षदों और महासचिवों को निमंत्रण नहीं देते थे. 2019 चुनाव का बिगुल फूंकने का यह पार्टी का तरीका है. ’

पार्टी नेता ने बताया कि इससे पहले इतने बड़े स्तर का आयोजन इंदौर में 2010 देखा गया था. तब नितिन गडकरी भाजपा अध्यक्ष थे.

इतने बड़े आयोजन के पीछे का मकसद

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मिली करारी हार के बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास डगमगा गया है. इस तरह का आयोजन उनमें पुन: जोश भरने के लिए किया जा रहा है.

इस आयोजन का एक और मकसद नेताओं और जमीनीं कार्यकर्ताओं के बीच संवाद स्थापित करना है. ताकि वह दोगुनी मेहनत करके नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधामनंत्री बनाए.

ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के अलाव पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता राजनाथ, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी भी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करेंगे. वे अपने वोटरों तक संदेश पहुंचाने से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर विभिन्न मुद्दों को लेकर उठ रही शंकाओं को दूर करने की कोशिश करेंगे. मोदी सरकार की जनवादी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को दी जाएगी.

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


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