मदुरै: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक को “भारत के संविधान पर हमला” बताया.
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषणा के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया कि वे (ट्रंप) विदेशी टैरिफ के बराबर टैरिफ लगाने के बजाय भारतीय आयात पर 27 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे.
माकपा की 24वीं कांग्रेस के दूसरे दिन मीडिया को संबोधित करते हुए करात ने कहा कि वक्फ बोर्डों में सुधार और कायाकल्प की ज़रूरत है, “लेकिन, संशोधन करने का यह तरीका नहीं है. यह विधेयक देश के नागरिकों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है.”
उन्होंने देश के लोगों के लिए नहीं बोलने के लिए सरकार और मोदी की भी आलोचना की. “जबकि हम भारतीय आयात पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की निंदा करते हैं, हम चिंतित हैं कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप की मनमानी घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी. जो व्यक्ति विश्वगुरु होने का दावा करता है, वे इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोलता.”
करात ने भाजपा से लड़ने और उसे हराने के लिए एक व्यापक धर्मनिरपेक्ष गठबंधन की ज़रूरत पर जोर दिया. हालांकि, जब उनसे इंडिया गठबंधन में पार्टियों के बीच गलतफहमी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बनाया गया था और वह अभी भी उस पर कायम हैं.
उन्होंने कहा, “फिर भी, लोकसभा चुनावों के बाद हुए राज्य चुनावों में, दिल्ली में हमने AAP का समर्थन किया और महाराष्ट्र में हमने कांग्रेस का समर्थन किया. दिल्ली में, हमें लगा कि AAP भाजपा को हराने की ताकत होगी. इसलिए यह संबंधित राज्यों में पार्टी की ताकत पर निर्भर करता है.”
केरल और पश्चिम बंगाल के राज्य चुनावों में इंडिया गंठबंधन सहयोगियों के खिलाफ चुनाव लड़ने के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि यह भाजपा को अलग-थलग करने और हराने का तरीका है. “जिन राज्यों में हम सीधे इंडिया ब्लॉक गठबंधन सहयोगियों का सामना करते हैं, भले ही वह कांग्रेस हो, हम भाजपा को अलग-थलग करने के लिए उनके खिलाफ चुनाव लड़ते हैं. यह उन राज्यों में आरएसएस-भाजपा को हराने का एकमात्र तरीका है जहां हम मजबूत हैं.”
दूसरे दिन के अंत में पार्टी ने दो प्रस्ताव पारित किए — 20 मई को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा श्रम संहिताओं के खिलाफ आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल का समर्थन करना और “देश में मुसलमानों और अल्पसंख्यकों पर आरएसएस-भाजपा और संघ परिवार के सांप्रदायिक हमले” का मुकाबला करना.
कांग्रेस में 729 प्रतिनिधियों और 79 पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया. पहले दिन पोलित ब्यूरो के समन्वयक प्रकाश करात ने पिछले कांग्रेस में अपनाई गई राजनीतिक-रणनीतिक लाइन की समीक्षा प्रस्तुत की और 24वीं कांग्रेस के राजनीतिक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया.
यह कहते हुए कि मसौदा राजनीतिक प्रस्ताव का मुख्य जोर हिंदुत्ववादी ताकतों के बढ़ते खतरे से लड़ना है, वृंदा ने कहा कि आरएसएस-भाजपा गठबंधन से चुनावी क्षेत्र के अलावा आर्थिक, सामाजिक, वैचारिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी लड़ना होगा.
उन्होंने कहा, “सांप्रदायिक ताकतें कॉरपोरेट घरानों के साथ मिलकर अपनी विभाजनकारी विचारधारा फैला रही हैं. केंद्र में लगातार तीन बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद आरएसएस और संघ परिवार राज्य की सत्ता तक अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर राज्य के सभी अंगों में घुसपैठ कर रहे हैं और पूरे समाज को सांप्रदायिक बना रहे हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्ववादी ताकतों से मजबूती से और बिना किसी समझौते के लड़ने के लिए पार्टी की स्वतंत्र ताकत का निर्माण करना महत्वपूर्ण है. “इसके लिए, मसौदा प्रस्ताव में पार्टी से वर्ग और जन संघर्षों को मजबूत करने का आह्वान किया गया है. मसौदा प्रस्ताव में वामपंथी एकता को मजबूत करने और सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों को संगठित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, जो आरएसएस-भाजपा की हिंदुत्व सांप्रदायिक नीतियों के खिलाफ संघर्ष में शामिल होने के लिए तैयार हैं.”
मसौदा प्रस्ताव पर पार्टी को 3,424 संशोधन और 84 सुझाव मिले, जिनमें से 133 संशोधनों को पार्टी कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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