Saturday, 25 June, 2022
होमराजनीतिकर्नाटक की राजवंश राजनीति की रेस में कांग्रेस के आगे भाजपा का कोई कम्पीटिशन ही नहीं

कर्नाटक की राजवंश राजनीति की रेस में कांग्रेस के आगे भाजपा का कोई कम्पीटिशन ही नहीं

Text Size:

मुख्यमंत्री के बेटे यतिंद्रा से लेकर गृह मंत्री की बेटी सौम्या रेड्डी तक, लगभग 30 कांग्रेस विधायकों के सगे संबंधी टिकट के लिए लाइन में लगे हुए हैं. जबकि भाजपा के सिर्फ दो ही सदस्य ऐसे हैं जो अपने सगे संबंधियों को टिकट दिलाने के लिए कतार में लगे हैं.

बेंगलुरु: कर्नाटक में बहुत ही सरगर्मी का माहौल है क्योंकि यह चुनाव प्रक्रिया का समय है, जहाँ हर राजनेता अपने या अपने प्रियजनों के लिए टिकट हथियाने के लिए जमीन से असमान एक कर रहा है। इस बार राज्य में परिवार के सदस्यों या सगे संबंधियों के लिए टिकटों की मांग में बढ़ोतरी हुई है, इस मामले में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बढ़त हांसिल की है जहां कांग्रेस के 30 मौजूदा विधायकों ने अपनी पत्नियां, बेटों या बेटियों के लिए टिकटों की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि वे अपने घरेलू चुनावी क्षेत्रों में या नगरों में नए चेहरों को चुनावी रण में उतारकर, सत्ता विरोधी हवा को पलटते हुए विपक्ष को करारी हार दे सकते है और विपक्ष की उम्मीदों को रौदते हुए उन्हें आराम से हरा सकते हैं।

चुनाव में कांग्रेस की तरफ से सीटों की इस बड़ी मांग ने एक बार फिर भाजपा को यह टिप्पड़ी करने परने मजबूर किया कि हम “कांग्रेस जैसे नहीं” हैं और हम राजवंश की राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा के बेटे बी वाई विजयेंद्र टिकट के लिए कतार में हैं। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि येदियुरप्पा का अनुरोध किसी भी हालत में स्वीकार होगा, क्योंकि पार्टी में कई लोग विजेंद्र को मैसूर की वरुणा सीट पर मुख्यमंत्री सिद्धार्थ के बेटे यतींद्र के खिलाफ आमने-सामने की टक्कर का चुनाव लड़ते हुए देखना चाहते हैं।

चित्रण | सिद्धांत गुप्ता

यहाँ पार्टी के क्रमानुसार टिकट मांगने वाले उम्मीदवारों की सूची दी गई है:

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

कांग्रेस

यतिंद्रा – सिद्धारमैया के छोटे बेटे अपने बड़े भाई राकेश की मृत्यु के बाद से ही अपने पिता के कार्यालय में सहयोग करने लगे थे, जो मुख्यमंत्री के वारिस थे। यतिंद्रा, जो कि एक डॉक्टर तथा, एक अनिच्छुक राजनीतिज्ञ हैं, सिद्धारमैया ने स्वयं संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने यतिंद्रा को राजनीति लाने के लिए बहुत बार समझाया तथा मनाया और कड़ी मेहनत के बाद वह राजनीति में आने के लिए राजी हुआ।

आज, वरुण के लोगों के साथ काम करके वह काफी आनन्दित दिखाई दे रहे हैं, जहाँ से वह टिकट की माँग कर रहे हैं।
सौम्या रेड्डीः राज्य गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी को काफी उम्मींदे हैं कि उनकी बेटी को बेंगलुरू के जयनगर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया जाएगा, जिसमें उन्होंने चार बार प्रतिनिधित्व किया है।

सौम्या इस क्षेत्र में सामाजिक अभियानों के माध्यम से अपने जीवन को राजनीति में ढ़ालने की तैयारी में जुटी हुई हैं और अपने स्थानीय जनाधार का निर्माण कर रही हैं।

सुनील बोसः वह मुख्यमंत्री के करीबी विश्वासपात्र, मंत्री एच. सी. महादेवप्पा के बेटे हैं। महादेवप्पा, बोस को उनकी जगह प्रतिस्थापित कराना चाहते हैं, जैसा कि वह मैसूर में टी नारसीपुर में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, जबकि वह स्वयं बेंगलुरु में सी. वी. रमन नागरा सीट की मांग कर रहे हैं।

अवैध रेत खनन घोटाले में बोस का नाम काफी कलंकित हुआ था इसलिए उनको 2016 में नानजंगुड उपचुनाव के लिए एक टिकट से वंचित कर दिया गया था।

रूपा शशिधर: वह कोलार के संसद सदस्य के. एच मुनियप्पा की बेटी हैं। वह कई वर्षों से अब तक निर्वाचन क्षेत्रों में काम कर रही हैं एवं स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वह कोलार जैसे गोल्डेन क्षेत्र में भी एक फ्रंट रनर हैं।

मंसूर अली खान: राज्यसभा सांसद के रहमान खान के बेटे कुछ वर्षों से टिकट पाने के लिए लालयित हो रहे हैं। हालांकि, टिकट के लिए उनका रास्ता स्पष्ट नहीं है जैसा कि उनका सबसे अच्छा निर्वाचन क्षेत्र जयनगर है जो सौम्या रेड्डी का भी गढ़ है।

संतोष जयचंद्रः सिद्धारमैया सरकार में कानून मंत्री के रूप में सेवा देने वाले टी.बी. जयचंद्र अपने पुत्र संतोष के लिए तुमकुर के पास चिक्कन्याकनहल्ली से टिकट पाने का प्रयास कर रहे है। संतोष युवा कांग्रेस में काफी दिनों से सक्रिय रहे हैं और इससे पहले भी टिकट पाने का प्रयास किया है। उनका नाम तुमकुर में अवैध रेत खनन मामले में सामने आ गया था जिसके चलते वह पिछले समय में टिकट से वंचित रह गए थे।

निवेदिथ अल्वाः वरिष्ठ कांगेस नेता मार्गरेट अल्वा के सबसे छोटे बेटे निवेदिथ, जो कि एक दशक से भी ज्यादा समय तक युवा कांग्रेस के साथ रहे हैं, उम्मीद है कि इस बार कांग्रेस पार्टी को उनके प्रयासों का भुगतान करना होगा। 2008 में, मार्गरेट अल्वा ने पार्टी पर यह आरोप लगाया था कि पार्टी के नामांकनों की बिक्री की गई थी, उसके बाद वह इस आरोप को साबित करने के लिए अपने राजनीतिक जीवन में 10 साल के लिए चुप हो गईं। हालांकि, वह हाल ही में राज्य इकाई में सक्रियता को लेकर वापस आ गईं हैं।

कनीज़ फातिमा: कांग्रेस के दिवंगत नेता और मंत्री कमर उल इस्लाम की पत्नी, वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के द्वारा दिए गए टिकट को स्वीकार करने के लिए सहमत हो गईं हैं यदि टिकट गुलबर्गा उत्तर से दिया जाता है, क्योंकि यह निर्वाचन क्षेत्र इस्लाम का प्रतिनिधित्व करता है।

यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है- यहाँ पिछले छह बार से इस्लाम विधायक रह चुके है जो कि इस क्षेत्र के मुसलमानों के मध्य एक बड़े अनुगामी थे।

गीता महादेव प्रसाद: स्वर्गीय एच.एस. महादेव प्रसाद की पत्नी ने अपने पति का 2017 में निधन हो जाने के बाद राजनीतिक उत्तरदायित्व को संभाला। वह गुंडलपेट विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने के साथ चुनाव प्रचार भी कर रही हैं, जिस क्षेत्र से उन्होंने पिछले साल उप-चुनाव जीता था।

अन्य वरिष्ठ नेताओं ने, जैसे-पुत्र मठार गौड़ा के लिए ए. मंजू, बेटी राजनंदिनी के लिए कागोडोथिमप्पा और पुत्र रक्षा राम के लिए एम.आर. सेठाराम, अपनी संतानों के लिए टिकट प्राप्त करने हेतु जोर दिया है- इनमें से अन्तिम ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी

बी.वाई.विजयेंद्र: पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के भाजपा प्रमुख बी.एस. येदियुरप्पा के छोटे बेटे विजयेंद्र अपने संभावित प्रतिद्वंदी यतेंद्र की तरह राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। पर मुख्यमंत्री के बेटे के राजनीतिक पदार्पण को चुनाव के लिये मुश्किल बनाने हेतु विजयेंद्र को राजनीतिक रूप से सक्रिय करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

वरुणा के स्थानीय लोगों ने इसे पहले ही “युवा असाधारण व्यक्तियों के टकराव” की संज्ञा दी है।

शाम्भवी: पूर्व केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एस.एम. कृष्णा की बेटी, जो अब भाजपा के साथ हैं। शाम्भवी मंड्या जिले के माडुर क्षेत्र से टिकट की उम्मीद कर रही हैं।

हालांकि कृष्णा ने इस बात से इनकार किया और इसे केवल “अफवाह” बताया है, भाजपा के सूत्रों का कहना है कि यह वरिष्ठ नेता को खुश करने का एक तरीका हो सकता है, जो पार्टी में शामिल होने के बाद से काफी हद तक चुप रहे हैं।

जनता दल (धर्म निरपेक्ष)

अनीता कुमारस्वामी और प्रज्वल गौड़ा: जनता दल (एस) के लिए, पार्टी के पहले परिवार के दो सदस्यों के बीच में लड़ाई है। एक तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी.डी कुमारस्वामी की पत्नी, पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की बहू अनीता कुमारस्वामी है, और दूसरी तरफ प्रज्वल गौड़ा, देवेगौड़ा के दूसरे बेटे, जो कि एच.डी. रवेन्ना के बेटे हैं। जनता दल (एस) के सूत्रों का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी लिए काम बंद करने की धमकी देते हुए कहा है की यदि उनकी ‘अक्का’ (बड़ी बहन) अनिता को चनपटना से चुनाव नहीं लड़ाया गया, जहां से 2013 में अनीता चुनाव हार गयी थी, तो वह पार्टी के लिये काम करना बंद कर देंगे।

इस बीच, प्राजवाल को 2019 में लोकसभा का टिकट हसन से मिलेगा – उनके दादा का निर्वाचन क्षेत्र।

share & View comments