Tuesday, 5 July, 2022
होममत-विमतयोगी आदित्यनाथ की मुग़लों से नफ़रत का कारण जज़िया है, लेकिन BJP के पास मुसलमानों के लिए इसके बहुत से आधुनिक संस्करण हैं

योगी आदित्यनाथ की मुग़लों से नफ़रत का कारण जज़िया है, लेकिन BJP के पास मुसलमानों के लिए इसके बहुत से आधुनिक संस्करण हैं

आज की सियासत में मुग़ल-विरोधी होना, दरअस्ल मुसलमान-विरोधी भावना को शिष्ट तरीक़े से व्यक्त करना है. इसका न तो इतिहास से कोई लेना-देना है, और न ही योगी आदित्यनाथ की इतिहास की समझ से.

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इलाहबाद का नाम बदलकर प्रयागराज, फैज़ाबाद का अयोध्या, मुग़लसराय जंक्शन का पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, और फिर आगरा एयरपोर्ट का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय एयरपोर्ट करने के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को, एक नया ‘लक्ष्य’ मिल गया है. ‘मुसलमान नामों वाली’ जगहों के नाम बदलकर, ‘हिंदू’ जैसे नाम रखने की ज़बर्दस्त चाह के चलते, आदित्यनाथ की निगाहें अब आगरा में निर्माणाधीन, एक मुग़ल म्यूज़ियम पर अटक गई हैं, जिसकी कल्पना उनके पूर्ववर्ती अखिलेश यादव ने की थी.

इसका न तो इतिहास से कोई लेना-देना है, और न ही योगी आदित्यनाथ की इतिहास की समझ से. आज की सियासत में मुग़ल-विरोधी होना, दरअसल एक डॉग विसिल है, मुसलमान-विरोधी भावना को शिष्ट तरीक़े से व्यक्त करना है.

लेकिन, ज़ाहिर है कि मुग़लों के प्रति नफ़रत, योगी की ‘बाबर की औलाद’ वाली सियायत में अंदर तक बैठी हुई है, जिसे अब उभारने की ज़रूरत है, चूंकि यूपी विधान सभा चुनावों में, दो साल से कम समय बचा है.

आगरा का मुग़ल म्यूज़ियम, जिसे अब छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूज़ियम में बदलने का प्रस्ताव है, एक और मिसाल है कि कैसे, आदित्यनाथ मुग़लों को भारतीय इतिहास का हिस्सा नहीं मानते. विडंबना ये है कि मुग़ल इतिहास की जड़ें, उनके राज्य में अंदर तक फैली हुई हैं- 1560 से 1650 के बीच, 90 साल से अधिक तक, आगरा मुग़लों की राजधानी रहा.

दिक़्क़त ये है कि सुविधा के अनुरूप मुस्लिम आक्रमणकारियों को, सियासी रूप से स्थाई मुग़ल शासन से मिला दिया जाता है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का विकास का शायद सबसे बड़ा कारनामा, अपने कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण कराना है. आदित्यनाथ भगवा राजनीति की उसी लहर पर सवार हैं, और कह रहे हैं कि उनके राज्य में, किसी भी ‘मुग़ल’ चीज़ का जश्न नहीं मनाया जा सकता, क्योंकि वो “ग़ुलामी की मानसिकता” के प्रतीक हैं. लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है?

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मुग़ल और बीजेपी

हम जज़िया कर को लेकर मुग़लों की लगातार बुराई कर सकते हैं, कि मुग़लों ने इसे हिंदुओं पर, अपनी ही ज़मीन पर रहते हुए संरक्षण देने के लिए लगाया. लेकिन इस टैक्स को अलग अलग मुग़ल शासकों के ज़माने  में, हटाया गया, फिर लगाया गया, और एक बार फिर हटाया गया. ये सब उनकी सियासत के हिसाब से था, जैसाकि आज भी होता है जब अलग-अलग राजनेता, अपनी सियासत के हिसाब से, ‘प्रतीकों’ को रखते या त्यागते हैं. अकबर ने जज़िया ख़त्म किया, औरंगज़ेब ने उसे बहाल कर दिया. लेकिन जहांदार शाह ने उसे फिर ख़त्म कर दिया.

ताक़त का खेल काफी हद तक वैसे ही चल रहा है, और आज के राजनेता भी, 400 साल पहले के मुग़ल बादशाहों से अलग नहीं हैं. उन्होंने उस समय मंदिर तोड़े. ये आज मस्जिदें तोड़ रहे हैं. उन्होंने उस समय ऐसे टेक्स लगाए, कि उनके नागरिक नागरिक न लगें. ये आज नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी), और नागरिकता संधोशन अधिनियम (सीएए) जैसे भेदभावपूर्ण कानून थोप रहे हैं. ऐतिहासिक बदले की इस राजनीति में, दोनों एक ही सिक्के दो पहलू हैं. और इसका शिकार होते हैं विकास और शासन.

औरंगज़ेब की जज़िया बहाल करने के लिए आलोचना की जाती है, लेकिन आदेश पढ़ने पर देखा जा सकता है, कि बहुत से वर्गों को इससे छूट दी गई थी, जिनमें बेरोज़गार, बीमार और बूढ़े शामिल थे. ये छूट महिलाओं, बच्चों और फौज में भर्ती होने वालों को भी थी. ये टैक्स बराबर भी नहीं था. अमीरों पर- जिनके पास दस हज़ार दिरहम से ज़्यादा थे– सबसे ज़्यादा टैक्स (48 दिरहम सालाना) था. ग़रीब लोग, जिनके पास 200 दिरहम से कम थे, उन्हें एक दिरहम माहीना देना होता था. ऐसा नहीं है कि मुग़ल काल में सिर्फ हिंदुओं पर टैक्स लगता था. मुसलमानों पर भी टैक्स लगाया जाता था. मुसलमानों पर लगे टैक्स को ज़कात कहा जाता था.

लेकिन आज, जो भारत में बीजेपी का स्वर्ण युग है, तत्थों से कोई फर्क़ नहीं पड़ता. यहां हिंदुओं पर 400 साल पहले हुए अत्याचार के मुद्दे को, बार बार उठाया जाता है ताकि वो, एक हिंदू ह्रदय सम्राट को फिर से चुन सकें, जिससे वो भारत और उसके इतिहास को गहरे भगवा रंग में रंगकर, उनके आत्म-सम्मान को बहाल कर सके. इतिहास से सीख नहीं ली जाती, जो दिखाता है कि कोई सरकार– राजतंत्र या लोकतंत्र, सबसे अच्छा काम तभी करती है, जब धर्मनिर्पेक्षता और समानता को बनाए रखा जाता है, जैसा कि अकबर के राज में था.

दरअसल, 331 साल के मुग़ल राज को, हिंदू-विरोधी चश्मे से देखने का ख़याल ही, इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा की कमी किस तरह, इतिहास को समझने की आपकी क्षमता को बाधित कर सकती है. बीजेपी के भीतर औरंगज़ेब को लेकर हमेशा से नफरत रही है. अगर वो उससे जुड़े तमाम  प्रतीकों को त्याग देना चाहते हैं तो भी, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और उन दूसरे मुग़ल शासकों का क्या, जो न सिर्फ गहराई से हिंदू-समर्थक थे, जिसे उनके समय के उलेमा बिल्कुल पसंद नहीं करते थे, बल्कि जिन्होंने भारत को कुछ सबसे महान सांस्कृतिक रत्न दिए- ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, लाल क़िला वग़ैरह, जो आज भी बीजेपी-शासित राज्यों का ख़ाज़ाना भर रहे हैं.

मुग़ल हमारी अर्थव्यवस्था को नुक़सान नहीं पहुंचा रहे

हालांकि जगहों के नाम बदलने का उनका बाध्यकारी विकार स्थाई ही लगता है, लेकिन बीजेपी आलाकमान को योगी से कहना चाहिए, कि मुग़लों से हटाकर अपना ध्यान, प्रवासियों मज़दूरों को फिर से उनका काम दिलाने में लगाएं. यूपी के मुख्यमंत्री को मज़दूरों और छात्रों को, घर वापस लाने के लिए काफी प्रशंसा मिली थी.

योगी को अपने राज्य पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जिसे दीर्घ-कालिक बेरोज़गारी और पंगु हो रही अर्थव्यवस्था पर क़ाबू पाना है.

मुग़ल म्यूज़िम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने से- एक ऐसा राजा जो केवल एक बार आगरा आया, और बंदी बना लिया गया- ये म्यूज़ियम एक पैरोडी में बदल जाएगा. अगर आप अपने इतिहास से वाक़िफ नहीं हैं, तो उससे खेलिए मत. भले ही ये चुनाव जीतने के लिए हो. इतिहास वापस आकर आपको ज़रूर काटेगा. ये अभी देखने को मिला जब यूपी के जाट, आगरा म्यूज़ियम का नाम शिवाजी के नाम पर रखने से नाराज़ हो गए. उनका दावा है कि ये जाट राजा सूरजमल थे, जिन्होंने यूपी के इलाक़े में मुग़लों को हराया था, इसलिए म्यूज़ियम पर उनका नाम होना चाहिए. अब आदित्यनाथ के सामने एक नई समस्या है.


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(लेखिका एक राजनीतिक पर्यवेक्षक हैं. व्यक्त विचार निजी हैं)

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5 टिप्पणी

  1. Mughals forcely converted Hindus to Islam, so did in whole of Europe, central Asia by Turks and Ottoman. Hindus forced someone to their religion, no examples heard. Yes Buddhism, Sikhism rose from Hindus but there is no conflict till date for their beliefs, why conflict is only with Islam?

  2. लिखने की आधार पे लगता हैं कि तुम मुस्लिम हो इसी लिये मुगलो पे प्यार आ रहा है

  3. Tum log Modi or yogi ko nai jhel pa rhe ho to socho jra hinduo ne mughlo ko kaise jhela hoga….. Jo ho rha h bhot achha h or yhi Hona chaiye…. Sare mughal kukarmi or neech the.

  4. योगी को जो करना है वो कर लेंगे तुम अपना देख लो।…. अगर तुम्हारी मजहबी कुंठाएं पूरी नहीं हो रही हों तो तुम पाकिस्तान दफा हो सकते हो।…. हमारे देश का विभाजन तुम जैसे मजहब की कुंठा से पीड़ित जेहादियों के लिए ही किया गया था।….

    और अगर पाकिस्तान जाने के लिए पैसों की व्यवस्था करनी है तो जैसा योगी जी बोल चुके हैं “हम तुम्हारे जाने की व्यवस्था भी कर देंगें”।

    जय श्री राम

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