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Saturday, 4 April, 2026
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क्यों तमिलनाडु चुनाव 2026 में त्रिशंकु विधानसभा बन सकती है

तमिलनाडु में लगभग हर पार्टी अंदरूनी विवाद से जूझ रही है. 4 मई को आने वाले नतीजे एक नया राजनीतिक सरप्राइज और अप्रत्याशित मोड़ दे सकते हैं.

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तमिलनाडु में चुनाव प्रचार तेज़ हो गया है. 23 अप्रैल को मतदान होगा और 234 सीटों वाली विधानसभा के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे. 2026 के नतीजे एक नया राजनीतिक सरप्राइज और अप्रत्याशित मोड़ ला सकते हैं. लगभग 6 करोड़ वोटर नए प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे. 21 राजनीतिक पार्टियों ने करीब 2,200 उम्मीदवार उतारे हैं. कई तरह के समीकरण, नया जनादेश और नए चेहरे 5 मई से अगले पांच साल के लिए विधायक बनेंगे.

पिछले 70 साल से राज्य में बारी-बारी से डीएमके या एआईएडीएमके की सरकार बनती रही है. 2026 के चुनाव में पहली बार डीएमके 234 में से 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एआईएडीएमके ने 167 उम्मीदवार उतारे हैं. क्या यह सहयोगियों को ज्यादा सीट देने का संकेत है, या फिर उनके प्रभाव में कमजोरी दिखाता है?

दोनों द्रविड़ पार्टियों के गठबंधन में एक-एक राष्ट्रीय पार्टी शामिल है. दोनों ने अपनी नजर में ‘कमजोर’ सीटें सहयोगियों को दी हैं—डीएमके ने कांग्रेस को 28 सीटें दी हैं, जबकि एआईएडीएमके ने बीजेपी को 27 सीटें दी हैं. इससे भी त्रिशंकु विधानसभा की संभावना का संकेत मिलता है.

डीएमके-कांग्रेस गठबंधन में राहुल गांधी अलग-थलग नज़र आ रहे हैं. अंदर से वह विजय की टीवीके के साथ गठबंधन चाहते थे, लेकिन विजय अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. उनके समर्थकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हैं. उनकी रैलियों में बहुत बड़ी भीड़ जुटती है. हालांकि, उन्हें करूर हादसे की भी याद दिलाई जाती है, जिसमें भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी.

तमिलनाडु में लगभग हर पार्टी सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी विवाद और विरोध का सामना कर रही है. कार्यकर्ताओं के सड़क पर प्रदर्शन की खबरें टीवी चैनलों पर लगातार दिखाई दे रही हैं.

वीसीके के संस्थापक-अध्यक्ष थोल तिरुमावलवन ने द हिंदू को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर डीएमके को बहुमत भी मिल जाता है, तब भी बीजेपी उसे तोड़ने की कोशिश कर सकती है. इस बयान से सहयोगी दलों में चिंता बढ़ गई है.

डीएमके को सत्ता विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ रहा है. एमके स्टालिन छह दलों वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन कई सहयोगी डीएमके द्वारा कांग्रेस को 28 और प्रेमलता की DMDK को 10 सीटें देने से नाराज हैं. वीसीके, एमडीएमके और दो वामपंथी दलों में भी नाराज़गी है क्योंकि राज्यसभा सीटें कांग्रेस और डीएमडीके को दी गईं. इन पार्टियों को 2021 चुनाव की तुलना में कम सीटें मिली हैं. प्रेमलता की डीएमडीके की अचानक एंट्री से रिश्तों में और तनाव बढ़ गया है. इससे जमीनी स्तर पर तालमेल प्रभावित होगा और त्रिशंकु विधानसभा की संभावना बढ़ती है.

कांग्रेस में भी असंतोष दिख रहा है. विरुधुनगर से सांसद मणिक्कम टैगोर ने तमिलनाडु के लिए कांग्रेस चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजा. करूर से सांसद एस जोथिमणि ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि असली कांग्रेस कार्यकर्ताओं के काम “बेचे जा रहे हैं”.

बीजेपी में भी अंदरूनी समस्याएं सामने आई हैं. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सीट बंटवारे को लेकर चुनाव लड़ने से पीछे हटने की बात कही थी, कुछ रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें टिकट नहीं मिला. राज्य इकाई ने पीयूष गोयल से उन्हें मनाने को कहा. अब लगता है कि समझौता हो गया है और अन्नामलाई केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को मानने के लिए तैयार हो गए हैं.

किसका पलड़ा भारी?

एआईएडीएमके, विजय की टीवीके और सीमैन की एनटीके की रैलियों में बहुत बड़ी भीड़ जुट रही है. डीएमके नेताओं को मिला-जुला समर्थन मिल रहा है और एमके स्टालिन को सबसे ज्यादा सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ रहा है.

चुनाव का एक बड़ा मुद्दा ड्रग्स का खतरा है. डीएमके को छोड़कर ज्यादातर पार्टियां अवैध शराब, कानून-व्यवस्था की समस्या और विश्वविद्यालयों में अपराध जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रही हैं. तमिल न्यूज चैनल, जो पहले डीएमके की तारीफ करते थे, अब सभी पार्टियों को ज्यादा बराबरी से कवर कर रहे हैं. वहीं लोग लाइव कवरेज के लिए सोशल मीडिया और यूट्यूब की ओर ज्यादा जा रहे हैं. फर्ज़ी एआई से बने वीडियो भी भ्रम पैदा कर रहे हैं. अन्नादुरई, कामराज, एमजीआर, जयललिता और करुणानिधि जैसे नेताओं के नाम का गलत इस्तेमाल ऐसे कंटेंट में किया जा रहा है.

डीएमके और एआईएडीएमके की तमिलनाडु के हर गांव में मजबूत पकड़ है. बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की जमीनी मौजूदगी इतनी मजबूत नहीं है.

तमिल सिनेमा के “सुपरहीरो” जोसेफ विजय के नेतृत्व में नई पार्टी टीवीके (तमिल वेत्री कझगम) चुनाव मैदान में आई है. पहली बार तमिलनाडु में चार तरफा मुकाबला देखने को मिल रहा है.

विजय की एंट्री से राज्य में ईसाई समुदाय को रणनीतिक फायदा मिल सकता है. अल्पसंख्यक वोट बैंक अब दोधारी तलवार बन गया है. पहली बार इन वोटों का कुछ हिस्सा डीएमके से टीवीके की ओर जा सकता है. विजय की फिल्मों के बड़े फैन बेस के कारण माना जा रहा है कि लगभग 6 करोड़ वोटरों में से 20-25 प्रतिशत वोट टीवीके को मिल सकते हैं. 1990 के दशक से विजय ने करीब 5,000 फैन क्लब बनाए हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के कारण तमिलनाडु में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है, जिसका फायदा एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के पलानीस्वामी को हो सकता है. जयललिता के समय एआईएडीएमके के घोषणा पत्र में राम मंदिर का मुद्दा भी था. जयललिता को दक्षिणपंथी सोच के करीब माना जाता था और उन्होंने मोदी के गुजरात मुख्यमंत्री बनने पर शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया था. बीजेपी के कमल चिन्ह की तमिलनाडु में कुछ पहचान है और पिछली विधानसभा में उसके चार विधायक थे.

कांग्रेस एक राष्ट्रीय और राष्ट्रवादी सोच वाली पार्टी बनी हुई है. डीएमके के साथ उसका गठबंधन धर्मनिरपेक्ष वोटों को मजबूत करता है. करूर हादसे के बाद राहुल गांधी ने विजय को फोन कर संवेदना जताई थी. बाद में जनवरी 2026 में उन्होंने विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ में देरी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की और इसे ‘तमिल संस्कृति पर हमला’ बताया. इससे कांग्रेस और टीवीके के करीब आने की चर्चा हुई. डीएमके ने सीट बंटवारे की बातचीत के दौरान इस बड़े बदलाव को रोक लिया. सोनिया गांधी और पी चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद स्टालिन ने कांग्रेस को सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में बनाए रखा.

सीमैन की नाम तमिलर काची (एनटीके) अकेले चुनाव लड़ रही है. उसका लगभग 8 प्रतिशत वोट शेयर माना जाता है, जो तमिल राष्ट्रवाद के समर्थकों और LTTE नेता प्रभाकरण व तमिल ईलम समर्थकों से आता है.

डीएमके के चुनावी भाषणों में बीजेपी और मोदी-अमित शाह पर ज्यादा हमला किया जा रहा है. सनातन धर्म पर बयान को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें इसे डेंगू और कोरोना जैसी बीमारियों से तुलना की गई. डीएमके की रणनीति अल्पसंख्यक वोटों को मजबूत करने की है, लेकिन चिंता है कि विजय ईसाई और मुस्लिम वोट अपनी ओर खींच सकते हैं.

चुनाव में फंडिंग और देर रात पैसे बांटने जैसे बाहरी फैक्टर भी असर डाल रहे हैं. पहली बार “लॉटरी किंग” सैंटियागो मार्टिन कई पार्टियों को फंड देने की खबर है. उनके परिवार के सदस्य अलग-अलग पार्टियों से जुड़े हैं—पत्नी लीमा एआईएडीएमके से, बेटा चार्ल्स एलजेके से और दामाद आधार अर्जुना टीवीके से जुड़े बताए जाते हैं.

घोषणा पत्र अब “मज़ाक” बनते जा रहे हैं, जिनमें फ्री फ्रिज, लैपटॉप, ग्राइंडर, व्हीलचेयर, छात्रों के लिए वाईफाई और पुराने घरेलू सामान बदलने के लिए 8,000 रुपये का कूपन जैसे वादे किए जा रहे हैं. पार्टियां फ्री सुविधाओं के मामले में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रही हैं.

पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने डीएमके के घोषणा पत्र को “कॉमेडी स्क्रिप्ट” और “सधुरंगा वेट्टई” (धोखाधड़ी) बताया. उन्होंने कहा कि 517 वादों में से 63 वादे 2021 के चुनाव से ही दोबारा नए नाम से लाए गए हैं.

एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि डीएमके, एआईएडीएमके से निकाले गए नेताओं को टिकट दे रही है. उन्होंने उन्हें “बेकार मुद्रा” बताया और 8,000 रुपये कूपन योजना की आलोचना की.

जाति समीकरण भी अहम भूमिका निभाएंगे. अल्पसंख्यक वोट बंटने की स्थिति में कोनार, मुक्कुलथोर, मुथरैयार और अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

तमिलनाडु चुनाव 2026 सभी पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती बनने वाला है. कई सीटों पर जीत का अंतर 1,000 वोट से भी कम रह सकता है.

लेखक का एक्स हैंडल @RAJAGOPALAN1951 है. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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