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Saturday, 29 November, 2025
होममत-विमतदुबई एयर शो क्रैश पर हंगामा और नाराज़गी नहीं, समझदारी भरे विश्लेषण की जरूरत है

दुबई एयर शो क्रैश पर हंगामा और नाराज़गी नहीं, समझदारी भरे विश्लेषण की जरूरत है

कभी-कभी मशीन हार मान लेती है, क्योंकि वह एयर वॉरियर के मिलिट्री माइंड की इच्छा के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती. पालम 1989 और दुबई 2025 में यही हुआ.

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सैन्य दुर्घटनाएं होती हैं और आगे भी होती रहेंगी. दुबई एयर शो में तेजस लड़ाकू विमान का क्रैश भी ऐसी ही घटना है, और इसके लिए न तो सीना पीटने की जरूरत है और न ही राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर रोने की.

इसके बाद शेखर गुप्ता ने एक गहन लेख लिखा है. आमतौर पर किसी बड़ी सार्वजनिक दुर्घटना के बाद जो त्वरित प्रतिक्रियाएं आती हैं, उसके मुकाबले उनकी विश्लेषणात्मक टिप्पणी संतुलित है. वह तेजस के पीछे की तकनीकी और मानवीय दोनों तरह की मेहनत की सराहना भी करते हैं. तेजस वास्तव में यही है—एक ऐसा आधुनिक, फ्रंटलाइन, सिंगल इंजन, डेल्टा विंग लड़ाकू विमान जो पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है. यह शानदार है, उचित कीमत वाला है और 24 साल की उड़ान में इसका सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है.

छत्तीस साल पहले, गुप्ता ने एक और लेख लिखा था—एक ऐसा चश्मदीद बयान जो बहुत हिला देने वाला था, जिसमें एक एयर शो की त्रासदी का विवरण था. उस घटना में भी एक सिंगल इंजन, डेल्टा विंग, टॉप-ऑफ-द-लाइन लड़ाकू विमान शामिल था. फर्क सिर्फ इतना है कि वह दुर्घटना दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर एयर फोर्स डे के मौके पर हुई थी. गुप्ता ने अपने लेख में पाठक को इतना करीब ला दिया था कि विमान की उस कराह को भी महसूस किया जा सके जो उसे निर्माता की सीमा से कहीं आगे उड़ाए जाने के कारण हो रही थी. यही एरोबैटिक डेमोंस्ट्रेशन फ्लाइंग होता है: जब इंसान मशीन को उसकी हद से आगे धकेल देता है और उसे तर्क से परे प्रदर्शन करवाता है. आसमान में सैन्य मशीन पर महारत.

विंग कमांडर रमेश ‘जो’ बक्शी, जो नई शामिल की गई मिराज 2000 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे, 1989 में पालम एयरपोर्ट पर एयर फोर्स डे पर उड़ान भरने वाले थे. यह उड़ान उनके कौशल का शानदार प्रदर्शन होना था. उनमें वह जज़्बा और हिम्मत थी. लेकिन योद्धाओं की तरह, वह तर्क से कहीं ज्यादा करने की चाह रखते थे. यही वायुसैनिक करते हैं—प्रकृति, विकास और भौतिकी को चुनौती देना. जो पाठक मिराज 2000 की कराह सुनना चाहते हैं, वे शेखर गुप्ता का लेख दोबारा पढ़ें.

21 नवंबर 2025 को दुबई में, विंग कमांडर नमंश स्याल ने अपने तेजस को उसी तरह उड़ाया, जैसे बक्शी ने किया था. अपने पूर्ववर्ती की तरह, स्याल ने भी विमान को निर्माता की सीमा और सलाह से आगे ले जाने की कोशिश की. जैसे कोई घोड़ा अपने सवार की लगाम पर भरोसा करते हुए डर के बावजूद वह सब कर लेता है जिसके लिए प्रकृति ने उसे तैयार नहीं किया. वायुसैनिक मशीन के साथ भी यही करते हैं, जो युद्ध के लिए बनाई जाती है.

कभी-कभी मशीन साथ छोड़ देती है, क्योंकि वह वायुसैनिक के जज़्बे के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती. सैन्य दिमाग सीमाओं को चुनौती देता है—कुछ पानी पर, कुछ जमीन पर और कुछ पागलपन की हद तक आसमान में. वायुसैनिक मशीन से उससे ज्यादा करवाना चाहता है जितना वह करने के लिए बनी है. और फिर अचानक आसमान शांत हो जाता है, चाहे ईंधन जलने और मलबा उड़ने की आवाजें अब भी हों. यही 1989 में पालम में हुआ था और यही 2025 में दुबई में हुआ.

योद्धाओं की एकजुटता

दुनिया में कहीं भी सैन्य हादसे हो सकते हैं. टैंक का गोला खराब हो सकता है, तोप की नली फेल हो सकती है, मोर्टार कम दूरी पर गिर सकता है, हाथ से ग्रेनेड का पिन गलती से गिर सकता है, और रात के अंधेरे में पैराशूट ठीक से न खुल पाए. यह सब पहले भी हो चुका है और दुर्भाग्य से आगे भी होता रहेगा. एहतियात की हद तक सावधानी बरती जाती है, लेकिन कभी-कभी मशीन योद्धा को धोखा दे देती है. और योद्धा उस खतरे को स्वीकार करता है, चाहे वह सितारों की रोशनी में विमान से कूदना हो, ऊबड़-खाबड़ जमीन पर टैंक से गोले दागना हो, या विमान डिजाइन के नियमों को चुनौती देना हो.

इसलिए, स्याल की अंतिम उड़ान पर प्रतिक्रिया काफी महत्वपूर्ण रही—वर्दीधारी बिरादरी बाकी लोगों से साफ अलग दिखाई दी, सीमाओं के बिना. वे जानते हैं कि घोड़ा उछल सकता है और मशीन टूट सकती है. एवीएम (रिटायर्ड) मनमोहन बहादुर ने भावनाओं को तर्क से संतुलित किया, जबकि सीमा के पार और दुनिया भर से आए विचारों ने सज्जनता और योद्धा भावना को दर्शाया. पाकिस्तान वायु सेना के रिटायर्ड अधिकारी, एयर कमांडर परवेज अख्तर खान ने विंग कमांडर स्याल के साहस को सलाम करते हुए मार्मिक रूप से लिखा, “हम सब कुछ अनंत को छूने की कोशिश करते हैं, इससे पहले कि गुरुत्वाकर्षण हमें वापस खींच ले… आसमान बिना सीमाओं के दुख मनाता है. हमें भी ऐसा ही करना चाहिए.”

अमेरिकी वायु सेना वाइपर डेमोंस्ट्रेशन टीम के कमांडर ने दुनिया भर के योद्धाओं की भावनाओं को व्यक्त किया.
विंग कमांडर स्याल के सम्मान में एयर शो से हटने के बाद, मेजर टेलर ‘फीमा’ हायस्टर ने दुबई की मौजूदा संस्कृति पर तीखी टिप्पणी की, “घोषक अब भी उत्साहित था, भीड़ ने अगले कई प्रदर्शन उतने ही जोश से देखे और जब शो खत्म हुआ, तो यह कहते हुए खत्म हुआ—‘हमारे सभी प्रायोजकों और कलाकारों को बधाई और 2027 में फिर मिलेंगे.’”

हायस्टर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “वे हमेशा कहते हैं कि शो चलता रहना चाहिए. और वे सही कहते हैं. लेकिन याद रखना कि तुम्हारे चले जाने के बाद भी कोई यह बात जरूर कहेगा.”

मनवेंद्र सिंह बीजेपी नेता हैं, डिफेंस एंड सिक्योरिटी अलर्ट के एडिटर-इन-चीफ हैं और राजस्थान की सोल्जर वेलफेयर एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन हैं. वह @ManvendraJasol पर ट्वीट करते हैं. व्यक्त विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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