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उनरोड़ गांव में एंट्री लेने से पहले मील का पत्थर ।बाड़मेर दिप्रिंट
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चूंकि राजनेता घटना का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, लड़की के परिवार का कहना है कि गांव में दलितों और मुस्लिमों के बीच कोई शत्रुता नहीं है।

बाड़मेर: सात साल की एक दलित बच्ची पिछले हफ्ते राजस्थान के बाड़मेर जिले के उनरोड़ गाँव में 13 फुट के एक सूखे भूमिगत टैंक में पायी गयी थी। उसका कथित तौर अपहरण हुआ, बलात्कार हुआ और फिर उसे गला घोंट कर मार दिया गया ताकि हमलावर की पहचान न हो।

लड़की जब अपने नाना-नानी के घर के बाहर सो रही थी तब उसे वहां से दूर ले जाया गया। अपहरण होने के एक दिन बाद 22 जून की सुबह उसके शरीर को खोजा गया। नतीजतन पैदा होने वाले क्रोध को मोमबत्तियों के जुलूस और सात साल की लड़की के लिए न्याय की मांग के प्रदर्शन के माध्यम से व्यक्त किया गया।

पीड़िता के परिवार और उनके पड़ोसियों समेत क्रूरता से आहत बाड़मेर के निवासी 40 वर्षीय स्थानीय संदिग्ध व्यक्ति राशिद खान के लिए मौत की सजा से कम कुछ भी नहीं चाहते हैं।

राशिद, जिसे कथित तौर पर, फरार होने के लिए गुजरात जाने की बस पकड़ने के दौरान गिरफ्तार किया गया था, ने कथित रूप से अपराध को स्वीकार कर लिया है। उस पर कई धाराओं समेत पॉस्को अधिनियम और एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस साल की शुरुआत में सरकार द्वारा पारित एक संशोधन के कारण, दोषसिद्धि होने पर राशिद को मौत की सजा का सामना करना पड़ेगा। अब पुलिस के लिए भी जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय सीमा निर्धारित की गयी है।

घटना

मेघवाल समुदाय की यह लड़की बाड़मेर के बलेवा गाँव में अपने माता-पिता और चार भाई-बहनों के साथ रहती थी।

वह बलेवा से 31 किलोमीटर दूर एक मुस्लिम-बाहुल्य बस्ती अनरोद में अपने नाना के साथ रुकी हुई थी जहाँ उसकी माँ पास के ही एक गाँव में एक शादी में गयी हुई थीं। उसकी नानी भी उसकी माँ के साथ गयी थीं।

उसके नाना की एक किराने की दुकान है। 21 जून की रात बच्ची उनकी दुकान, जो कि उनके घर से जुड़ी हुई है, के बाहर लॉन में सो रही थी जब राशिद ने उसका अपहरण किया।

लड़की के नाना के दिप्रिंट को बताया, “वह उस रात मेरी दुकान से कुछ गुटखा खरीदने आया था और चला गया था। 10 बजे के आस-पास मैंने दुकान बंद की और खाना खाने के लिए घर के भीतर आया और तभी वह लड़की को ले गया।”

राशिद ने अपनी गवाही में पुलिस को बताया है कि वह उस समय नशे में था। एक तरफ नाना-नानी का दावा है कि वे उसे केवल एक ग्राहक के रूप में जानते थे वहीं उनके पड़ोसियों का कहना है कि राशिद और नाना अक्सर साथ बैठकर शराब पीते थे।

पडोसी के दावे, कि वह अक्सर ऐसा करते थे, के बारे में पूछे जाने पर नाना ने कसम खाई कि अपहरण की रात उन्होंने नशा नहीं किया था।

एक पड़ोसी परमा राव ने देर रात टैंक की दिशा से एक चीख सुनी थी जो कि पीड़िता के नाना-नानी के घर से केवल 250 मीटर की दूरी पर स्थित है।

हालाँकि, आत्माओं और काला जादू के लिए ग्रामीणों की खुद की स्वीकारोक्ति और गहराई से विश्वास के कारण उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया।

राव ने दिप्रिंट को बताया, “मैंने सोचा कि यह एक भूत था इसलिए मैंने रात में जांच नहीं की। लेकिन सुबह मैं टैंक की जांच करने गया और लड़की का मृत शरीर पाया।”

ग्रामीणों ने टैंक के पास पैरों के निशान खोजे जो कि एक वयस्क व्यक्ति के लग रहे थे और एक स्थानीय दिव्यदृष्टा मलूका खान के पास पहुंचे, जिनके बारे में वे मानते हैं कि वह पैरों के निशान देखकर लोगों की पहचान कर सकते हैं।

उन्होंने उनकी पहचान राशिद के रूप में की और अपराध की सूचना पुलिस को दे दी गयी।

राशिद, जो साल के आधे से ज्यादा समय जैसलमेर में रुकता था लेकिन समय-समय पर उनरोड़ गांव आता था, का चोरी के लिए एक आपराधिक रिकॉर्ड है।

टैंक जहां पीड़ित के शरीर मिला था । दिप्रिंट

जांच

एक बार पता चलने के बाद, पुलिस अधीक्षक (एसपी) गगनदीप सिंगला, रतन लाल (एसटी/एससी सेल के लिए) और सुरेन्द्र प्रजापत के नेतृत्व में एक पुलिस टीम राशिद की तलाश करने और मृतशरीर प्राप्त करने के लिए रवाना हुई।

गिरब के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) पुष्पेन्द्र वर्मा ने दिप्रिंट को बताया, “ग्रामीणों से बात करते समय राशिद का नाम सामने आया। हमने उसे गाँव में ढूँढने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मिल सका….. एक टीम ने राशिद को गुजरात जाने के लिए बस पकड़ते समय धर दबोचा। हम उसे बस से उतार लाये।”

एसएचओ वर्मा ने कहा, “दोषी ने अपराध स्वीकार किया…..और हमें बताया कि जब यह हुआ था तब वह शराब के प्रभाव में था।”

मंगलवार को, राशिद को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

वर्मा ने कहा, “हम पांच से छह दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट पेश करने की कोशिश करेंगे। पॉस्को अधिनियम में नए प्रावधानों के तहत, दोषी मृत्युदंड के लिए उत्तरदायी है और हमारा प्रयास जल्द से जल्द चार्जशीट पेश करके उसे मौत की सजा दिलवाना होगा।”

अपराध की खबर के कारण राशिद के परिवार का सम्पूर्ण बहिष्कार हुआ है, जिसे उनके घर से भगा दिया गया है।

वर्मा ने कहा कि कोई भी वकील उसका प्रतिनिधित्व करने को तैयार नहीं था। “लेकिन ऐसे कई वकील हैं जिन्होंने लड़की का प्रतिनिधित्व करने की अपनी इच्छा जाहिर की है … यहाँ तक कि उन्होंने समाचार पत्र में विज्ञापन भी जारी किए हैं।”

बाड़मेर के एक वकील मुकेश जैन ने कहा कि राजस्थान की बार काउंसिल, जोधपुर ने “मानवतावादी आधार पर” संदिग्ध व्यक्ति का बचाव न करने का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा, “हमने फैसला लिया है कि हम राशिद खान जैसे अपराधी का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।” और कहा कि वे मौत की सजा की उम्मीद कर रहे हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

दिप्रिंट द्वारा प्राप्त की गयी बच्ची की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि संदिग्ध के साथ संघर्ष हुआ था और बच्ची के घुटनों और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान थे।

पोस्टमॉर्टम संचालित करवाने वाले बोर्ड के एक चिकित्सकीय अधिकारी डॉ. अमृत लाल ने कहा कि बच्ची के शरीर से “हालिया यौन सम्भोग के संकेत और लक्षण” प्राप्त हुए हैं। उसके गुप्तांग में खून के थक्कों के साथ-साथ “कई ताजा खरोंचे” थीं।

उसके शरीर पर चोटों के बारे में बात करते हुए डॉ. लाल ने कहा हो सकता है यह तब लगे हों जब वह टैंक में गिरने से बचने की कोशिश कर रही हो और अपराधी से संघर्ष के दौरान चट्टानों पर गिर पड़ी हो।

लड़की के पिता ने दिप्रिंट को बताया कि, “मैंने जो देखा वह एक विकृत शरीर था, केवल चेहरे और हाथ-पैरों की विशेषताओं से पहचान हो पा रही थी।“

पीड़ित का घर बलेवा गांव ,बाड़मेर । दिप्रिंट

बाड़मेर में सदमे की लहर

बाड़मेर जिला प्रमुख, प्रियंका मेघवाल ने दिप्रिंट को बताया कि, “इस घटना के बारे में जानकर हर किसी को आघात पहुंचा है, बाड़मेर पर यह एक बड़ा दाग है।“

“यहाँ पर पहले ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है… सरकार को महिलाओं पर बढ़ते अपराधों के खिलाफ कार्यवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस प्रकार के मामलों में अपराधी को मौत की सजा मिले।“

यह अपराध, जिसमें अत्यधिक ध्रुवीकरण के समय में अपराधी और पीड़िता अलग-अलग समुदयो से है, कठुआ में एक आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के पांच महीने बाद आता है और इस मामले को भी राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय राजपूत, जिनपर उनके दलित साथी अन्य दिनों में भेदभाव करने का आरोप लगाते हैं, इस विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे रहे हैं, साथ ही आरएसएस की स्टूडेंट विंग, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया।

बाड़मेर से भाजपा विधायक, मानवेन्द्र सिंह ने इस अपराध को “गोवध के बराबर” बताया।

दलित अत्याचार निर्वाण समिति की अध्यक्षता करने वाले कांग्रेस के सदस्य एवं दलित अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता उदा राम मेघवाल ने कहा, “जो राजपूत मोमबत्तियाँ जला रहे हैं ये वही हैं जो हर दिन बाड़मेर में दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अत्याचार करते हैं। वह पीडिता के लिए केवल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि दोषी इस बार एक मुस्लिम है।”

एक पूर्व प्रधान मेघवाल द्वारा दायर की गई आरटीआई में पूछे गए प्रश्नों के मुताबिक, 26 जनवरी 2016 और सितंबर 2017 के ही बीच बाड़मेर में एससी और एसटी के खिलाफ अत्याचारों के, पॉस्को अधिनियम के तहत कम से कम 17 मामलों के साथ, 530 से ज्यादा मामले सामने आए।

मेघवाल ने कहा, “यह राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के इतिहास में यह पहली बार है कि एक मुस्लिम ने अनुसूचित जाति या जनजाति के खिलाफ कोई अपराध किया है।”

इस बात से एसएचओ वर्मा सहमत थे, लड़की का परिवार भी सहमत था।

पीड़िता की नान ने कहा, “इस गांव (उनरोड़ गांव) में दलितों और मुस्लिमों में भाईचारा है, कोई शत्रुता नहीं है।”

पीड़िता के पिता ने कहा कि उनके मेघवाल-बाहुल्य वाले गांव, बलवा में कोई सांप्रदायिक झगड़ा नहीं हुआ है।

Read in English : Rajputs compare ‘rape & murder’ of Dalit child by Muslim to ‘cow slaughter’


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