प्यार नैतिकता से परे होता है, यही बताती है अनुराग कश्यप की मनमर्जियां

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मनमर्जियां । फेसबुक

अनुराग कश्यप की मनमर्जियां प्रेम, भावनाओं और सेक्स का मनोरंजक मिश्रण है.

गर आपने अनुराग कश्यप की फिल्म मनमर्जियां के ट्रेलर को देखा और सोचा कि यह हम दिल दे चुके सनम 2.0 होगी, तो आप गलत हैं.

कश्यप की बहुप्रतीक्षित फिल्म मनमर्जियां चंचल-मस्तिष्क प्रेमियों की एक कहानी है जिसको उन्होंने अपने ट्रेडमार्क निर्देशकीय तड़के के साथ प्रस्तुत किया है.

मनमर्जियां अपने दर्शकों में भावनाओं की एक जटिल श्रृंखला पैदा करती है जिससे उन्हें फिल्म के मुख्य पात्रों – रुमी (तापसी पन्नू), विकी (विकी कौशल) और रॉबी (अभिषेक बच्चन) – से कभी प्यार होता है तो कभी नफरत.


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फिल्म की शुरुआत सर पर मोहॉक बनवाये विकी के साथ होती है जो अमृतसर की छतों पर अपनी पार्कोर कला का प्रदर्शन रूमी को दिखाने के लिए करते हैं. रूमी की आँखों में सपने ज़रूर हैं लेकिन उसकी ज़ुबान पर नए ज़माने की भाषा है. सेक्स और प्यार का यह मिश्रण उनको एक नशे की तरह प्रभावित करता है . मासूम और अपरिपक्व रुमी और विकी कश्यप की कठपुतलियों के जैसे हैं और उनकी शिल्पकला का सबूत हैं.

फिल्म का पहला भाग गुस्से से भरी, टूटे दिल वाली रुमी के बारे में है क्योंकि विकी अपनी लापरवाही की वजह से उसके विवाह के अल्टीमेटम को पूरा करने में विफल रहता है. तभी एंट्री होती है रॉबी की जोकि एक लन्दन में रहनेवाला बैंकर है जिसका एकमात्र उद्देश्य शादी करना है. तब से लेकर यह कहानी प्यार, नयी शुरुआत करने और फिर से प्यार करने के बीच में घूमती रहती है.

प्रत्येक फिल्म के साथ, विकी कौशल अपनी जगह मज़बूत कर रहे हैं. वह आसानी से एक संघर्षशील डीजे और सड़कों पर मस्ती में घूमनेवाले ‘लोफर’ की भूमिका निभाते हैं. वे थोड़ी कॉमेडी भी करते हैं लेकिन इससे आप यह सोचने की भूल न करें कि उनके अंदर भावनाएं नहीं हैं. जब रुमी को खोने की वास्तविकता उसकी समझ में आती है तो वह टूट सा जाता है.

वहीँ दूसरी ओर तापसी पन्नू एक अनाथ, शर्मीली पंजाबी कुड़ी को लेकर प्रचलित सभी रूढ़ियों को तोड़ती है है और चुप नहीं बैठती. वह भावनाओं का एक मचलता भंवर है- और उसे इसका अफ़सोस भी नहीं. रुमी अपनी शादी से पहले विकी के घर में घुसकर हंगामा करने के लिए तैयार है लेकिन वह अब भी अपने फैसलों का समर्थन अपने दादाजी से ही पाती है.


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कनिका ढिल्लों द्वारा लिखी पटकथा ने रुमी और विकी को ताज़ा पात्रों के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन अभिषेक बच्चन के रॉबी के लिए यह बहुत कम गुंजाइश प्रदान करती है. दो साल बाद बच्चन की रुपहले परदे पर वापसी उनकी 2003 मैं प्रेम की दीवानी हूँ में अपने चरित्र प्रेम कुमार का एक विस्तार है , जहां उन्होंने इंतज़ार में लगे एक प्रेमी का किरदार निभाया था. वह 2018 में भी वही दुहराते हैं, लेकिन पगड़ी पहनकर.

200 9 में आयी बहुप्रशंसित देव-डी के बाद बाद यह फिल्म अनुराग कश्यप की दूसरी प्रेम कहानी है. मनमर्जियां देव-डी से बहुत अलग नहीं है. सिल्वेस्टर फोन्सेका का छायांकन हमें फिल्म में देव-डी की झलक देता है और फिल्म की शुरुआत ही में रुमी बाइक चलाकर एक लाल रौशनी वाले बार में, नशे में धुत रॉबी से मिलने आती है. कश्यप का कैमरा विभिन्न शॉट्स के माध्यम से सोच समझकर पोज़ीशन किये गए नर्तकों और धूप चश्मा पहने मर्दों की भीड़ पर फोकस करता है, बिलकुल देव-डी की ही तरह . हालांकि मनमर्ज़ियाँ कश्यप द्वारा निर्देशित एक और संजीदा फिल्म के जैसी प्रतीत होती है लेकिन वह यहाँ भी अपना ट्रेडमार्क शिल्प दिखा ही देते हैं. हो सकता है कि वह धीरे-धीरे बॉलीवुड में फिल्म निर्माण के वाणिज्यिक मोल्ड में घुसने की कोशिश कर रहे हों .

एक बोझिल कर देनेवाला सेकेण्ड हाफ इस तथ्य की गवाही देता है कि स्क्रिप्ट को कश्यप द्वारा लिखा नहीं गया था लेकिन उसके बावजूद यह रोमांटिक फिल्मों में पाये जाने वाले सामान्य मसाला ड्रामा से पीछा छुड़ाते हुए कहानी बनाने के लिए पात्रों के चरित्र की छोटी बारीकियों पर ध्यान केंद्रित करता है.

अमित त्रिवेदी ने ‘दरिया ‘ और ‘फ्यार ‘ जैसे गानों के रूप में फिल्म को शानदार संगीत दिया है और गाने कथानक को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.


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एक प्रेम त्रिकोण में पार्टनर चुनने की नौबत आने पर होने वाली स्थिति का यह फिल्म चित्रण करती है. यह मानवीय भावनाओं की भेद्यता का एक सुंदर चित्रण है. फिल्म के अधिकाँश हिस्से में हमें यह भ्रम होता है कि रुमी को एक साथी चुनने का काम दिया गया है, लेकिन अंत में, हम इस अहसास के साथ सिनेमा हॉल से निकलते है कि प्रत्येक चरित्र को थोड़ी बहुत मनमर्ज़ी करने का मौका मिला है क्योंकि कश्यप की कहानियों में नैतिकता कोई पत्थर की लकीर नहीं होती.

Read in English : Anurag Kashyap’s Manmarziyaan throws morals out of the window when it comes to love

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