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Sunday, 26 May, 2024
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सिख नेता सनी लियोन पर उंगली उठाने के बजाय हनी सिंह के अश्लील गानों पर गौर फरमायें

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एसजीपीसी को धार्मिकता का गढ़ बनने की कोशिश बंद कर देनी चाहिए, खासकर तब जब खुद के ही दामन में बहुत सारे दाग हों।

सनी लियोन भारतीयों के आश्चर्यजनक पाखंड का चेहरा हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा विवाद को प्रकाश में लाया गया, यह कहते हुए कि सनी लियोन की करनजीत कौर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ सनी लियोन न सिर्फ अनावश्यक है बल्कि इसकी निंदा भी की जानी चाहिए।

मुझे याद है जब किसी ने स्कूल में मुझसे पूछा था कि बहुत सारी सिख महिलाएं अपने नाम के साथ ‘कौर’ क्यों जोड़ती हैं। मैंने बड़े गर्व के साथ एक’उपनाम’ के बजाय एक शीर्षक के पीछे की अवधारणा समझाई थी।

मुझे सिर्फ वही पता था जो मुझे मेरे परिवार ने बताया था लेकिन इससे यह काफी स्पष्ट था कि एक उपनाम का ना होना (शादी से पहले और बाद में, अगर महिला चाहती) महिलाओं को विरासती भूमि प्राप्त करने की इजाज़त देता था, वह भी इसके ‘दूसरे’ परिवार में चले जाने के डर के बिना। इसने उन्हें जाति व्यवस्था के झंझट (दुर्भाग्यवश, जिसे नाम और उनकी जाति के नाम दोनों के इस्तेमाल पर कई लोगों के आग्रह पर अनावश्यक रूप से प्रतिपादित किया गया था) से मुक्त होने की अनुमति दी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी, कम से कम मेरे लिए तो थी, कि इसका मतलब था कि मेरा नाम किसी भी व्यक्ति के नाम से जुड़ा नहीं था, यहाँ तक कि मेरे पिता के नाम से भी नहीं। मेरी पहचान मेरे अलावा किसी पर भी निर्भर नहीं थी।

यह सम्मान, स्वायत्तता और इस तथ्य की पहचान कि महिलाएं सम्पूर्ण हैं, उनका अपना अस्तित्व है, की एक शक्तिशाली अवधारणा है जिसे सिख धर्म के मूल में समझाया गया है। हालांकि यह, अधिकांश धार्मिक विचारों की तरह ही, उन आस्थाओं से दूर हो गया है जिसकी उम्मीद थी यह उन पर टिका रहेगा। ‘कौर’ के पीछे के सरल, तार्किक सिद्धांतों ने दरअसल मेरे धार्मिक ना होने के बावजूद मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसने मुझे दुनिया भर में बहनों के एक समुदाय की इजाज़त दी है और जब आप एक अन्य कौर से संयोगवश मिलते हैं तो पहचान की वह बारीक समझ खूबसूरत होती है जो अक्सर पंजाबी में एक या दो शब्दों के साथ रेखांकित होती है।

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और निश्चित रूप से यही कारण है कि मुझे लगता है कि सनी लियोन करनजीत कौर हैं।

सनी लियोन भारतीय दर्शकों के लिए बहुत कुछ हैं। वह उस निषिद्ध प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे मध्यम वर्ग की नैतिकता की आग को भड़काती है और वह एक सफलता हैं जो हमें असहज बनाती है जब यह किसी महिला से आती है, खासकर उनसे। मीडिया ने उनके साहस को तोड़ने की कोशिश की है, उनका अपमान किया है और इशारा किया है कि वह भ्रष्टाचार की एक ताकत हैं।

हमने उनके पॉर्न करियर को अपनी कहानियों के लिए इस्तेमाल करते हैं और एक सफल व्यवसायी और मानवतावादी के रूप में उनके कार्य को नीचा दिखाते हैं क्योंकि हमारे हिसाब से यह एक ‘अनैतिक महिला’ की भूमिका में फिट नहीं बैठता है। यह देखना आश्चर्यजनक है जिस शांत तरीके से सनी लियोन उनके ऊपर उछाले जाने वाले कीचड़ और घृणा का सामना करती हैं। वह बेहतर की हकदार हैं खासकर जब एसजीपीसी जैसा एक संगठन उनके खिलाफ नैतिक निर्णय पारित करने कि कोशिश करता हो।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी (एसजीपीसी) लगभग अपने गठन के समय से ही भ्रष्टाचार से लेकर गबन एवं तुच्छ राजनीति तक के विवादों के दलदल में फंसी है। उनकी ‘आपत्तियों’ को गंभीरता से लेना कठिन है, जब इसे स्त्री अकाली दल की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर जैसे लोगों का समर्थन प्राप्त हो। वह एक ऐसी महिला हैं जिन पर पहले उनकी बेटी की हत्या की साजिश रचने और उसका जबर्दस्ती गर्भपात कराने का आरोप लगाया गया था और उसके बाद उन्हें उनकी बेटी के अपहरणकर्ता के रूप में दोषी ठहराया गया था।

एसजीपीसी की आपत्तियां विशेष रूप से क्रोधित करने वाली हैं क्योंकि यह केवल उन्हीं चीजों का संज्ञान लेगी जिन्हें यह सिख धर्म के लिए ‘हानिकारक’ समझती है। ऐसा लगता है कि इसमें बॉलीवुड की फिल्में और वेब श्रृंखला के शीर्षक जैसी चीजें शामिल हैं क्योंकि वे मुख्यधारा में सिखों की स्पष्ट धारणा को प्रभावित करती हैं।

एसजीपीसी के लिए मेरे पास कुछ सवाल हैं।

आप सिख समुदाय पर कब ध्यान देंगे और कब देखेंगे कि हम आंतरिक रूप से कितने अव्यवस्थितहैं ? यदि हर समय दखल देने की आपकी चाहत ही आपका मनोरंजन है तो आप एक महिला के पीछे पड़ने की बजाए दारू-लड़की-गड्डी वाली पॉप संस्कृति पर कब ध्यान देंगे?

आप हरमंदिर साहिब में महिलाओं को कीर्तन करने की इजाजत देने जैसे मुद्दों पर अकाल तख्त को ज़िम्मेदारी सौंपकर अपना पल्ला झाड़ना कब बंद करेंगे? आप इस तथ्य पर कब ध्यान देंगे कि कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या, विशेष रूप से सिख परिवारों में, अभी भी होती है? एसजीपीसी अपने नेताओं के अहंकार को संतुष्ट करने के बजाय समुदाय के सुधार को वास्तव में गति कब प्रदान करेगी?

सनी लियोन की पहचान पेचीदा तरीके से उनके बचपन से जुड़ी हुई है, और करनजीत कौर ने उन्हें आधारभूत रूप से आकार दिया। हम में से कोई भी उनके नाम के स्वामित्व से इंकार नहीं कर सकता। यह दयनीय है कि यह विवाद का एक विषय है, खासकर जब हम आंतरिक संघर्ष की स्थिति वाले एक समुदाय हैं और हमें स्वयं से कुछ कठिन एवं प्रासंगिक प्रश्न पूछने की सख्त जरूरत है।

मुझे उम्मीद है कि एसजीपीसी धार्मिकता का गढ़ बनने की कोशिश नहीं करेगी, खासकर जब उसका खुद का दामन साफ नहीं है। लड़ने के लिए और भी बड़ी लड़ाइयां हैं। यह निश्चित रूप से उनमें से एक नहीं है।

हरनिध कौर एक कवि और नारीवादी हैं।

Read in English :Instead of blaming Sunny Leone, Sikh leaders must address Honey Singh’s sexist songs first

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