Thursday, 7 July, 2022
होममत-विमतबाबुल सुप्रियो ने पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ लड़ाई जीत तो ली, पर बॉलीवुड भी हारा नहीं है

बाबुल सुप्रियो ने पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ लड़ाई जीत तो ली, पर बॉलीवुड भी हारा नहीं है

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गायक व मंत्री बाबुल सुप्रियो ने बॉलीवुड में सारे पाकिस्तानी कलाकारों पर रोक लगाने की मांग की है, परन्तु लगता है धमकी को ज्यादा संजीदगी से नहीं लिया जाएगा.

गायक व बीजेपी मंत्री बाबुल सुप्रियो ने फिर से बॉलीवुड के लिए मुश्किल पैदा कर दी, क्योंकि वह पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली द्वारा ‘वैलकम टू न्यूयार्क’ नामक फिल्म में गाए गए गीत ‘इश्तेहार’ पर नाराज हैं. चाहे पाक्स्तिानी कलाकारों द्वारा हमले पर, गीत के रिलीज होने व चार्ट पर सर्वोच्च स्थान पाने के लगभग दो हफ्ते बाद, सुप्रियो की नींद टूटी, पर अभी भी वह तुरंत कार्यवाही चाहते हैं. उनकी मांग है सारे पाकिस्तानी कलाकारों पर बॉलीवुड में काम करने पर रोक लगाना.

सुप्रियो ने प्रोडयूसर वासु बागवानी से जल्द कार्यवाही करने की मांग करते हुए वही पुराना तर्क दिया कि हमारे जवान सीमाओं पर जान दे रहें हैं और हम अभी भी पाकिस्तानी कलाकारों को काम दे रहे हैं ? उन्होनें प्रोडयूसर से या तो गीत को हटाने या खान की आवाज के स्थान पर भारतीय की आवाज लेने की मांग की. फिल्म के निर्देशक चकरी तोलेती, जिनकी बॉलीवुड में यह पहली फिल्म है, हैरान हैं कि ऐसे मुद्दे दक्षिण भारतीय फिल्म इडस्ट्री, जहां वह पहले काम करते थे, में बहुत कम सामने आते थे. साथ ही, उन्हें यह प्रतिबंध अनुचित लगा.

चाहे निर्देशक ने किसी का नाम नही लिया परन्तु स्पष्ट तौर पर वह सलमान खान की फिल्म ‘टाईगर जिन्दा है’ की बात कर रहे थे, जिसमें ‘दिल दियां गल्ला’ नामक गीत लोेकप्रिय गायक आतिफ असलम ने गाया था जो कि सीमा के उस पार से हैं.

तोलती जानना चाहते थे कि यह गुस्सा चुनींदा क्यों हैं? यह रोष कुछ प्रोड्यूसरों के लिए हैं और कुछ को छोड दिया जा रहा है.

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अजय देवगन की ‘बादशाहों’ में भी गायक प्रसिद्ध गायक नुसरत फतेह अली खान का गाया हुआ खुबसूरत गीत ‘मेरे रश्के कमर’, जिसे यू-ट्यूब पर 13.5 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने, बिना किसी धमकी या रोष के, देखा जबकि लाईन आफ कन्ट्रोल पर सीजफायर भंग करने की शिकायतों की संख्या पिछले वर्ष सितम्बर से जब ‘बादशाहों’ का गाना रिलीज हुआ था, रूकी नहीं बल्कि बढ़ गई हैं.

जबकि चिंतित प्रोडयूसर वासू भागनानी मंत्री से मिलने दिल्ली पहुंचे, क्योंकि फिल्म रिलीज होने से कुछ ही दिन पहले इस प्रतिबंध् की छाया वह सहन नहीं कर सकते. जल्दबाजी में बुलाई गई प्रैस कान्फ्रेंस में उन्होंने घोषणा की, कि जब तक दोनों देशों के संबंध सुधर नहीं जाते, वे पाकिस्तानी कलाकारों से काम नहीं लेगें.

भागनानी ने राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए खेद प्रकट करते हुए, सीमाओं पर शहीद होने वाले जवानों के समर्थन व सम्मान की शपथ ली. पिछली बार ऐसा मामला 2016 में पाकिस्तानी अभिनेता को फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में लेने के कारण ‘हेट ब्रिगेड’ के रोष का शिकार होने पर, करण जौहर की ‘कोम्प्रोमाइज वीडियो’ के रूप में सामने आया था. चाहे ‘सीजफायर’ तोडने या सर्जिकल स्ट्राईक की वजह से पाकिस्तानी कलाकारों पर रोक की मांग और उसके आगे हथियार डालना एक सामान्य-सी बात बन गई है, पर इस पर दूसरी ओर से प्रतिक्रिया की आशा नहीं थी. पाकिस्तानी संस्था से नहीं परन्तु कलाकार का अपना जवाब. राहत ने सुप्रियो को सोशल मीडिया पर सम्मानजनक प्रतिक्रिया दी है कि संगीत सीमाओं से बढ़कर है.

सुप्रियो जो कि स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया वापिस लेने को तैयार नहीं थे, ने राहत को एक खुले पत्र में, पाकिस्तानी सरकार पर आतंकवाद का समर्थन बंद करने के लिए दबाब डालने को कहा. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों में तनाव कम करने के लिए संगीत व कला का उपयोग एक असफल तरीका है.

सुप्रियो इस बात के लिए विश्वस्त लग रहे हैं कि उनका यह पत्र घरेलू मतदाता क्षेत्र के लिए कारगर साबित होगा, जो ऐेसे नेताओं को समर्थन देते हैं जो पाकिस्तानी खून के प्यासे हैं. परन्तु राजनीति, प्राईम टाईम डिबेट और ट्विटर टाईमलाईन्स के अलावा, यह आश्चर्य की बात है कि क्या पाकिस्तान विरोध जहर सृजनात्मक कला व कलाकारों तक भी पहुंच गया है.

रोक लगाने के बावजूद भी बॉलीवुड पाकिस्तानी कलाकारों से काम ले रहा है. भागनानी ने चाहे क्षमा मांगी है परन्तु न तो उन्होंने गीत को हटाया, न ही राहत की आवाज को किसी और से बदला. देवगन की आने वाली फिल्म ‘रेड’ व सुधीर मिश्रा की ‘दास देव’ दोनों में ही पाकिस्तानी कलाकारों के गाए गीत हैं और दोनों ने ही उनकी रिप्लेसमैंट का कोई संकेत तक नहीं दिया. खेलों में भी, भारत – पाक हॉकी संबंध फिर से जीवत हो गए हैं और काफी संकेत मिल रहे हैं कि अगली बारी क्रिकेट की हो सकती है.

आखिर, ईडन गार्डन में उत्साहऔर सस्पेंस से भरे भारत- पाक मुकाबले को कौन नहीं देखना चाहेगा. हम शर्त लगा सकते हैं कि सुप्रियो तक भी इस छोड़ना नहीं चाहेंगे. हम चाहेंगे कि सुप्रियो इतनी ही सख्त लड़ाई सेना दिग्गजों की पेंशन व जवानों की बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए लड़ें.

बॉलीवुड में काम करने के बाद, मुझे विश्वास है कि ‘रेफ्यूजी’ फिल्म में जावेद अख्तर का लिखा खुबसूरत गीत सुप्रियो को याद होगा-

‘पंछी, नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद न इसे रोके ………..

सरहद इन्सानों के लिए है, सोचे
सोचें तुमने और मैंने क्या पाया इंसान हो के’

इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि सुप्रियो की भाषण कला का कभी भी ऐसा प्रभाव नहीं रहा.

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