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Monday, 16 February, 2026
होमदेश'वे देश छोड़कर भाग गए': गोवा अदालत ने नाइटक्लब मालिकों की जमानत याचिका क्यों खारिज की

‘वे देश छोड़कर भाग गए’: गोवा अदालत ने नाइटक्लब मालिकों की जमानत याचिका क्यों खारिज की

कोर्ट ने कहा कि जब पिछले दिसंबर में उनके क्लब में आग लगने की खबर आई, जिसमें आखिरकार 25 लोगों की जान चली गई, तो बिजनेसमैन भाइयों ने गोवा के अरपोरा आने के बजाय फुकेट जाना चुना.

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नई दिल्ली: पिछले हफ्ते सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा की जमानत याचिका खारिज करते हुए गोवा की एक अदालत ने कहा कि उनके नाइटक्लब बर्च बाय रोमियो लेन में लगी आग की घटना के बाद उनका रवैया उनके कर्मचारियों और क्लब में आए लोगों की जान के प्रति “पूरी तरह लापरवाही” दिखाता है.

अदालत ने कहा कि जब उनके नाइटक्लब में आग लगने की खबर आई, जिसमें पिछले दिसंबर 25 लोगों की जान गई, तब दोनों कारोबारी भाई गोवा के अर्पोरा आने के बजाय फुकेट चले गए.

सोमवार को अपलोड किए गए आदेश में अदालत ने कहा कि जांच के इस चरण में जमानत देना “लापरवाही से दी गई अनुमति से पैदा हुई त्रासदी को हल्का बताने” जैसा होगा और इससे ऐसे मामलों में, जहां व्यावसायिक लापरवाही से लोगों की जान जाती है, “पूरी तरह गलत संदेश” जाएगा.

लूथरा भाइयों को थाईलैंड से वापस लाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था. घटना सामने आने के कुछ घंटों बाद ही वे वहां भाग गए थे.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्विजपल वी. पाटकर ने कहा, “इस मामले में पहली नजर में ऐसा सामग्री है जो दिखाता है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद आवेदक तुरंत फुकेट चला गया. पहली नजर में यह भी सामने आता है कि दुखद घटना की जानकारी मिलने के बाद आवेदक और उसका भाई देश छोड़कर भाग गए.”

उन्होंने कहा, “अगर मान भी लें कि आवेदक की फुकेट में कोई व्यापारिक बैठक या काम था, तब भी देश से बाहर जाना और गोवा न आना जमानत देने के खिलाफ जाता है. यह व्यवहार दिखाता है कि आवेदक को अपने ही कर्मचारियों और क्लब में आए लोगों की जान की पूरी तरह परवाह नहीं थी.”

अदालत ने उल्लंघनों की सूची गिनाई

अदालत ने नाइटक्लब की गैरकानूनी स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि अब तक की जांच में कई उल्लंघन सामने आए हैं. इनमें नमक के खेत वाले इलाके में क्लब बनाना और बिना जरूरी अनुमति, लाइसेंस या संबंधित विभागों से एनओसी लिए उसे चलाना शामिल है, खासकर फायर विभाग की अनिवार्य अनुमति के बिना.

अदालत ने यह भी कहा कि हर शुक्रवार और शनिवार को क्लब में बेली डांस के साथ इनडोर आतिशबाजी की जाती थी, जबकि प्रबंधन को पता था कि क्लब की छत ज्वलनशील थी और वहां आग बुझाने के उपकरण और सुरक्षा इंतजाम नहीं थे.

आदेश में कहा गया, “ये गतिविधियां बंद परिसर के अंदर की जाती थीं, जिससे साफ तौर पर खतरनाक माहौल बनता था और ग्राहकों व कर्मचारियों को आग लगने और जान जाने का अनुमानित खतरा था.”

आदेश में आगे कहा गया, “किसी बंद ढांचे के अंदर, जैसे कि इस मामले में क्लब, आतिशबाजी की अनुमति देना या आयोजन करना स्वभाव से ही खतरनाक है. पहली नजर में ऐसा सामग्री है जो दिखाता है कि बेली डांस प्रदर्शन के दौरान अंदर आतिशबाजी हुई, क्लब की छत और अंदर की सजावट ज्वलनशील थी और फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन हुआ.”

अदालत ने लूथरा भाइयों के वकील की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पहले जमानत पा चुके दो अन्य कर्मचारियों के आधार पर समानता की मांग की थी. अदालत ने कहा कि उनका मामला अलग है.

दिसंबर में अदालत ने बार मैनेजर राजवीर सिंघानिया और गेट मैनेजर प्रियांशु ठाकुर को जमानत दे दी थी, लेकिन क्लब के जनरल मैनेजर विवेक सिंह और कॉर्पोरेट जनरल मैनेजर राजीव मोडक की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

अदालत ने कहा कि लूथरा भाइयों का मामला सिंह और मोडक जैसा है, जिनकी क्लब के संचालन में निगरानी और फैसले लेने की भूमिका थी.

अदालत ने कहा, “आवेदक की भूमिका एक मालिक की है, जिसके पास परिसर पर नियंत्रण था और कार्यक्रम किस तरह आयोजित होगा, इस पर अधिकार था. यह उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों से अलग स्थिति है. इस संदर्भ में यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस अदालत ने गेट मैनेजर और बार मैनेजर को जमानत दी थी, क्योंकि उनकी भूमिका सीमित थी.”

अदालत ने आगे कहा, “लेकिन जनरल मैनेजर और कॉर्पोरेट जनरल मैनेजर की जमानत याचिकाएं उनकी निगरानी और निर्णय लेने की भूमिका को देखते हुए खारिज की गई थीं. आवेदक की मालिक के रूप में स्थिति उसी श्रेणी के ज्यादा करीब है और उसे गेट मैनेजर या बार मैनेजर के बराबर नहीं माना जा सकता.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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