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Tuesday, 3 February, 2026
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यूपी सीएम फेलो कौन हैं, जिन्हें अब सरकारी भर्ती परीक्षाओं में एक्स्ट्रा मार्क्स मिलेंगे?

चीफ मिनिस्टर फेलोशिप प्रोग्राम 2022 में लॉन्च किया गया था. दिप्रिंट द्वारा एक्सेस किए गए डेटा से पता चलता है कि फिलहाल राज्य में 515 CM फेलो काम कर रहे हैं.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य सरकार की भर्तियों में मुख्यमंत्री फेलोशिप प्रोग्राम के तहत काम कर चुके उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ देने के नए नियमों को मंजूरी दे दी है. यह प्रोग्राम युवाओं को सरकारी नीतियों के असर का अध्ययन करने और उनके बेहतर क्रियान्वयन में मदद करने का मौका देता है.

नए नियमों के तहत, सीएम फेलोज़ को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में आयु में छूट और अतिरिक्त अंक मिलेंगे.

फिलहाल अधिकतम आयु सीमा श्रेणी के अनुसार तय है, लेकिन यह 40 साल से ज्यादा नहीं हो सकती.

जो सीएम फेलो एक साल पूरा करेंगे, उन्हें एक साल की आयु छूट मिलेगी. दो साल पूरे करने वालों को दो साल की छूट और तीन साल पूरे करने वालों को तीन साल की छूट मिलेगी.

उन्हें एग्जाम में एक्स्ट्रा मार्क्स भी मिलेंगे। 100 मार्क्स के एग्जाम के लिए, कैंडिडेट्स को इस बात पर निर्भर करते हुए 1, 2 या 3 एक्स्ट्रा मार्क्स मिलेंगे कि उन्होंने एक, दो या तीन साल सर्विस की है. 500 मार्क्स के एग्जाम में वेटेज 2, 4 और 6 मार्क्स होगा, और 1,000 मार्क्स के एग्जाम में यह 2.5, 5 और 7.5 मार्क्स होगा.

सीएमओ के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस फेलोशिप की निगरानी करते हैं.

An awareness campaign by CM Fellows. | By Special arrangement
सीएम फेलो द्वारा एक जागरूकता अभियान | विशेष व्यवस्था

सीएम फेलो कैसे काम करते हैं

मुख्यमंत्री फेलोशिप प्रोग्राम की शुरुआत 2022 में हुई थी. इस योजना के तहत युवा शोधकर्ताओं को सरकार की नीतियों के असर का अध्ययन करने और पिछड़े प्रशासनिक ब्लॉकों में क्रियान्वयन की कमियों की पहचान करने के लिए नियुक्त किया जाता है.

ये रिसर्चर्स सर्वे करते हैं, सरकारी योजनाओं की स्टडी करते हैं, डेटा इकट्ठा करते हैं और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए समाधान सुझाते हैं. शुरुआत में उन्हें राज्य सरकार द्वारा चिन्हित 108 ब्लॉकों और 100 शहरी क्षेत्रों में तैनात किया गया.

दिप्रिंट द्वारा देखे गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में फिलहाल 515 CM फेलो काम कर रहे हैं. इसमें प्लानिंग डिपार्टमेंट में 108, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में 122, अर्बन डेवलपमेंट में 100, MSME डिपार्टमेंट में 160 और टूरिज्म में 25 लोग शामिल हैं.

कौशांबी जिले में तैनात सीएम फेलो राजेश कुमार ने दिप्रिंट को बताया कि सरकार ने उन्हें पांच सेक्टरों की जिम्मेदारी दी है. ये सेक्टर हैं स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि, सामाजिक विकास और ग्रामीण विकास.

A baby weighting machine brought by CM fellows in Kaushambi block.| By special arrangement
कौशांबी ब्लॉक में सीएम फेलो द्वारा लाई गई बच्चों का वज़न नापने वाली मशीन | विशेष व्यवस्था

वे अपने ब्लॉक में इन पांचों सेक्टरों से जुड़े करीब 50 विकास संकेतकों पर नजर रखते हैं. वे सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करते हैं, योजनाओं की निगरानी करते हैं, फीडबैक देते हैं और स्थानीय लोगों के लिए नए तरीके से काम करते हैं.

एक मामले में, उन्होंने ग्राम पंचायत के फंड से कौशांबी ब्लॉक के लोगों के लिए चार उपकरण उपलब्ध कराए. इनमें एक बेबी वेट मशीन, एक इन्फैंटोमीटर, एक एडल्ट वेट मशीन और बच्चों के लिए एक स्टैडियोमीटर शामिल है. इससे पहले इस ब्लॉक के गांवों में ये सुविधाएं नहीं थीं, राजेश ने कहा.

उन्होंने बताया कि उन्होंने कायाकल्प पहल के तहत कौशांबी ब्लॉक के सभी 207 आंगनवाड़ी केंद्रों का नवीनीकरण कराया है. इसमें दीवारों पर पेंटिंग, नई मैटिंग और बेहतर बिजली की सुविधा शामिल है.

राजेश ने कहा, “हमारा मुख्य फोकस गैप एनालिसिस है. उदाहरण के लिए, अगर हमें शिक्षा क्षेत्र में कोई समस्या दिखती है, तो हम पहले ब्लॉक स्तर के शिक्षा अधिकारी को जानकारी देते हैं और फिर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को. अगर इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो हम इसे राज्य स्तर के अधिकारियों के सामने उठाते हैं.”

कौशांबी जिले के मंजहनपुर ब्लॉक में तैनात एक और सीएम फेलो सौम्या अवस्थी ने दिप्रिंट को बताया कि इस काम से उन्हें अच्छा अनुभव मिला, क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर से लेकर राज्य के शीर्ष अधिकारियों तक से बातचीत करने का मौका मिला.

उन्होंने कहा कि ब्लॉक में गंभीर कुपोषण (एसएएम) के मामले ज्यादा थे. ऐसे में उन्होंने प्रभावित बच्चों के माता-पिता से बात की और उन्हें टीकाकरण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरूक किया. पिछले महीने उन्होंने कुछ एसएएम बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने में मदद की और उनके माता-पिता को काउंसलिंग भी दी.

इसके अलावा, उन्होंने उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं के लिए भी एक कार्यक्रम चलाया और उनके पतियों को समझाया. इस पहल से कई परिवारों ने समय पर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाया.

द प्रिंट को पता चला है कि सीएम फेलोज़ को हर महीने 40,000 रुपये का स्टाइपेंड और एक डिजिटल टैबलेट दिया जाता है. जहां संभव हो, उन्हें आवंटित विकास ब्लॉक में रहने की सुविधा भी दी जाती है.

यह फेलोशिप एक साल के लिए होती है और इसे अधिकतम दो साल तक बढ़ाया जा सकता है. अपने कार्यकाल के दौरान ये शोधकर्ता जिला मजिस्ट्रेट और मुख्य विकास अधिकारी के तहत काम करते हैं.

फेलोशिप के लिए आवेदन करने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक है. उम्मीदवार के स्नातक में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए और उसे हिंदी पढ़ने, लिखने और बोलने में सहज होना चाहिए. बेसिक कंप्यूटर ज्ञान भी जरूरी है.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पीएचडी और एमटेक डिग्री वाले उम्मीदवारों ने भी सीएम फेलो के रूप में नामांकन कराया है.

योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह कार्यक्रम युवाओं को सीएम फेलो के रूप में सरकार के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. इससे न केवल उनका व्यावहारिक ज्ञान बढ़ता है, बल्कि उन्हें सरकारी सेवाओं में जाने में भी मदद मिलती है.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “इस समय 500 से ज्यादा सीएम फेलो हैं, लेकिन इस घोषणा के बाद और ज्यादा उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है. अभी यह तय नहीं किया गया है कि फेलोशिप की सीटें कितनी बढ़ाई जाएंगी, लेकिन कुछ बढ़ोतरी जरूर होगी.”

अधिकारी ने आगे कहा, “फिलहाल उनके नए विचार, तकनीकी ज्ञान और उत्साह योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और भविष्य की नीतियों की योजना बनाने में मदद कर रहे हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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