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Monday, 24 June, 2024
होमदेश‘हम केवल निहत्थे छात्र थे’ — मणिपुर में किशोरों की मौत पर कैसे ‘शांतिपूर्ण’ विरोध हो गया खूनी

‘हम केवल निहत्थे छात्र थे’ — मणिपुर में किशोरों की मौत पर कैसे ‘शांतिपूर्ण’ विरोध हो गया खूनी

इंफाल के अस्पताल में इलाज करा रहे स्टूडेंट्स का दावा है कि सेना ने निहत्थे छात्रों पर पैलेट गन, आंसू गैस का इस्तेमाल किया. विरोध प्रदर्शन के कारण राज्य में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है.

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नई दिल्ली: सिल्वरस्टन (जो अपने पहले नाम से जाना जाता है), बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) के थर्ड इयर का स्टूडेंट है, जिसे मणिपुर में दो छात्रों की कथित हत्या के विरोध के दौरान आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद पीठ पर “गंभीर चोटें आईं”. जब दिप्रिंट ने गुरुवार को टेलीफोन पर संपर्क किया तो मणिपुर के मैतेई छात्रों ने बताया कि वो इंफाल के एक अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं.

बुधवार के विरोध प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, सिल्वरस्टन ने कहा, “यह एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च था और हमारे पास कोई हथियार नहीं था. हम अन्याय का विरोध करने आए हैं. हम भावुक हैं, दो स्टूडेंट्स की हत्या कर दी गई और पुलिस कुछ नहीं कर रही है.”

22-वर्षीय ने आरोप लगाया, “लेकिन सेना ने गोलियां चलाईं (पेलेट गन), आंसू गैस के गोले फेंके और सभी स्टूडेंट्स को पीटना शुरू कर दिया. हम एक संगठन से नहीं आये थे, हम सिर्फ छात्र थे, वो भी निहत्थे.”

उसी अस्पताल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला 16-वर्षीय लोइटोंगबाम किशन भी इलाज करा रहा है. एक फैमिलि फ्रेंड, जिसने उसकी हालत के बारे में जानकारी होने का दावा किया था, ने फोन पर दिप्रिंट को बताया कि किशन की हालत “गंभीर” है.

एस एन मैतेई ने कहा, “उसके दाहिने कंधे में गोली लगी थी. उसकी मांसपेशियां फट गई हैं और हड्डी भी टूट गई है. गोली उसके कंधे पर फंस गई. उन्होंने (सुरक्षा बलों ने) बहुत करीब से उस पर गोली चलाई.”

दिप्रिंट द्वारा हासिल की गई किशन की एक तस्वीर में उसके कंधे के ऊपरी हिस्से से खून बहता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसमें एक बड़ा छेद भी हो गया है. दिप्रिंट द्वारा एक्सेस किए गए कुछ वीडियो में कथित तौर पर गोली लगने के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाते हुए दिखाया गया है.

बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक बयान में, मणिपुर पुलिस ने कहा, “दो लापता छात्रों के शवों की वायरल तस्वीरों के संबंध में कई विरोध प्रदर्शन और रैलियां हुईं. भीड़ में उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों के खिलाफ लोहे के टुकड़ों और पत्थरों (संगमरमर) का इस्तेमाल किया. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया और कुछ आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए.”

मणिपुर पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने “उपद्रवियों” के खिलाफ कई मामले भी दर्ज किए हैं.

सूत्रों ने दिप्रिंट को यह भी बताया कि सभी प्रदर्शनकारी छात्र नहीं थे. सूत्र ने कहा, “विरोध प्रदर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी और जो लोग छात्र नहीं हैं, वे भी विरोध में शामिल हुए.”

दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए मणिपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीजीपी) कार्यालय से भी संपर्क किया है. प्रतिक्रिया मिलने के बाद इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.

बुधवार का विरोध दो मैतेई छात्रों, 19-वर्षीय हेमनजीत विएटिमबॉय और एक 17-वर्षीय लड़की की कथित हत्या के खिलाफ, जो जुलाई की शुरुआत से लापता थी इस मामले में कथित पुलिस निष्क्रियता के खिलाफ छात्र संगठनों ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन, मणिपुरी स्टूडेंट्स फेडरेशन, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स अलायंस ऑफ मणिपुर (डीईएसएएम), कांगलेइपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन, स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ कांगलेइपाक और अपुनबा इरेइपाक्की महेइरोई सिनपंगलुप द्वारा बुलाया गया था.

हालांकि, DESAM के अध्यक्ष, लीशांगथेम लामियानबा मीतेई ने दिप्रिंट को बताया कि “कई छात्र (स्कूलों और कॉलेजों से) स्वेच्छा से आए थे. यहां बहुत अशांति और गुस्सा है”.

दिप्रिंट ने पहले खबर दी थी कि बुधवार को विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत 60 से अधिक लोग घायल हो गए.

दिप्रिंट द्वारा बुधवार के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वालों की एक सूची के अनुसार, घायलों में सिल्वरस्टन और किशन सहित 50 प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर छात्र हैं.

दिप्रिंट द्वारा प्राप्त घायलों की तस्वीरों से पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों के बीच लाठी और पैलेट गन के निशान और सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर आंदोलनकारियों की पिटाई कर रहे हैं.

इस विरोध प्रदर्शन के कारण राज्य में ताज़ा हिंसा भड़क उठी, जो पिछले चार महीनों से अधिक समय से राज्य के गैर-आदिवासी मैतेई और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच जातीय झड़पों से प्रभावित है.


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छात्रों के साथ एकजुटता

मणिपुर में 3 मई को राज्य के बहुसंख्यक मैतेई और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी – मैतेई को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए निकाले गए ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद और जिसे जातीय कुकी और उनकी उप-जनजातियों के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को सुरक्षित करने का प्रयास के रूप में वर्णित किया गया था.

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, 1,200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 50,000 से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

अशांत मणिपुर में मोबाइल इंटरनेट बहाल होने के कुछ दिनों बाद, दो मैतेई छात्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, जो 6 जुलाई को ट्यूशन कक्षाओं के लिए जाने के बहाने अपने घर से निकलने के बाद लापता हो गए थे.

एक तस्वीर में 19-वर्षीय हेमनजीत विएटिमबॉय और एक 17-वर्षीय लड़की, एक सशस्त्र शिविर के अंदर घास पर बैठे दिखाई दे रहे थे और उनके पीछे दो हथियारबंद लोग खड़े थे. एक अन्य तस्वीर में वो ज़मीन पर गिरा हुआ दिखाई दे रहा है, ऐसा लग रहा है कि उसकी मौत हो गई है.

दोनों को आखिरी बार कुकी बहुल इलाके चूड़ाचांदपुर में देखा गया था.

दोनों के परिवार के सदस्यों ने पहले आरोप लगाया था कि “पुलिस ने हमें विफल कर दिया है”.

मणिपुर सरकार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि मामला पहले ही सीबीआई को सौंप दिया गया था और जांच जारी है.

विशेष निदेशक अजय भटनागर के नेतृत्व में एजेंसी की टीम इस मामले की जांच के लिए बुधवार को इंफाल पहुंची.

इस बीच बुधवार के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, एस.एन. मैतेई ने कहा, “लोग खुद सड़कों पर आए, छात्र संगठनों ने इसके लिए नहीं कहा.”

गुरुवार को छह छात्र संगठनों के बीच बातचीत और बैठकों का एक दौर आयोजित किया गया, जिन्होंने हिंसा पर चर्चा के लिए बुधवार के विरोध का आह्वान किया था.

(संपादन: फाल्गुनी शर्मा)

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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