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Thursday, 8 January, 2026
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हम आंकड़ों में नहीं पड़ते हैं, सभी के साथ खड़े: मुख्यमंत्री मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह बहुत दुखद घटना है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग कौन हैं, जब राहत प्रदान करने की बात आती है, तो हम आंकड़ों को नहीं देखेंगे.’

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भोपाल: मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित जल पीने से हुई मौतों के अलग-अलग आंकड़ों के सामने आने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार आंकड़ों में नहीं पड़ती और इसके बजाय वह सभी के साथ खड़ी है.

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे लिए एक भी व्यक्ति की जान जाना अत्यंत कष्टकारी है. इसलिए, हम इस आंकड़ों में नहीं पड़ते हैं. यह अलग बात है कि प्रशासन अपनी प्रक्रियाओं का पालन करता है. आम तौर पर केवल उन मामलों को वैध आंकड़ा माना जाता था, जहां पोस्टमार्टम किया गया हो.’’

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण होने वाली मौतों की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई क्योंकि जिला प्रशासन ने मंगलवार को 18 मृतकों के परिजनों को मुआवजे के चेक वितरित किए.

हालांकि, आधिकारिक रूप से सात ही लोगों की मौत की पुष्टि की गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह बहुत दुखद घटना है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग कौन हैं, जब राहत प्रदान करने की बात आती है, तो हम आंकड़ों को नहीं देखेंगे.’’

यादव ने इंदौर में दूषित पानी के कारण मरने वालों की वास्तविक संख्या के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘यह बहुत दुखद घटना है. चाहे लोग जो भी हों, जब राहत देने की बात आएगी तो हम आंकड़े नहीं देखेंगे. हम सब के साथ खड़े रहेंगे.’’

इंदौर संभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि आधिकारिक तौर पर इस घटना से हुई मौतों की संख्या छह बताई गई है.

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को बताया था कि उन्हें देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से जुड़े प्रकोप में 10 मरीजों की मौत की सूचना मिली है.

हालांकि, स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इस घटना में छह महीने के बच्चे सहित 17 लोगों की मौत हुई है.

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