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शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2025
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यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को संबल देंगे शक्ति सदन, 10 जिलों में नए आश्रय केंद्र की होगी शुरुआत

इसके अंतर्गत अलीगढ़, आजमगढ़, कानपुर नगर, चित्रकूट, झांसी, बस्ती, गोंडा, मिर्जापुर, वाराणसी और सहारनपुर जनपदों में प्रत्येक में 50 महिलाओं की क्षमता वाले एक-एक नवीन शक्ति सदन स्थापित किए जाएंगे.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण और पुनर्वास को लेकर ‘मिशन शक्ति’ योजना के अंतर्गत 10 जनपदों में “शक्ति सदन” की स्थापना कर रही है. यह शक्ति सदन संकटग्रस्त, घरेलू हिंसा से पीड़ित, आपदा प्रभावित और अन्य असहाय महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत साबित होंगे.

इन केंद्रों को सरकार जल्द ही शुरू करने जा रही है. इसके संचालन की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार द्वारा 127.72 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की जा चुकी है.

एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश अब महिलाओं के लिए न केवल सुरक्षित हो रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की ठोस बुनियाद भी रखी जा रही है.

यह योजना केन्द्र व राज्य सरकार के सहयोग से 60:40 के अनुपात में चलाई जा रही है. यह योजना भारत सरकार मिशन शक्ति की उप योजना ‘सामर्थ्य’ के तहत संचालित की जाएगी.

इसके अंतर्गत अलीगढ़, आजमगढ़, कानपुर नगर, चित्रकूट, झांसी, बस्ती, गोंडा, मिर्जापुर, वाराणसी और सहारनपुर जनपदों में प्रत्येक में 50 महिलाओं की क्षमता वाले एक-एक नवीन शक्ति सदन स्थापित किए जाएंगे.

इन शक्ति सदनों का उद्देश्य सिर्फ एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रदान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को समुचित संसाधनों और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस मार्गदर्शन देना है.

इन सदनों में निवास कर रहीं महिलाओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा, पोषणयुक्त भोजन, वस्त्र, बिस्तर और व्यक्तिगत उपयोग की अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

इस योजना की खास बात यह है कि यहां महिलाओं को न केवल मानसिक, शारीरिक और कानूनी सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने हेतु योग्यता अनुसार व्यावसायिक और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.

इस प्रशिक्षण में सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर प्रशिक्षण, कानूनी सहायता, योग और व्यक्तिगत परामर्श जैसी सेवाएं शामिल हैं, जिससे महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर समाज में आत्मसम्मान से जीवन जी सकें.

बयान में कहा गया कि नारी सशक्तीकरण की दिशा में उप्र सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण है. विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाएं के लिए, जो अक्सर घरेलू हिंसा या पारिवारिक उपेक्षा का शिकार होती हैं.

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