नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) भारत द्वारा हाल में उष्ण लहर को प्राकृतिक आपदा घोषित किये जाने के बाद, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की भारत इकाई ने कहा है कि अब आगे की प्रमुख प्राथमिकताओं में मंशा, आकलन और वैज्ञानिक जानकारी को जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई में बदलना तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता को तेजी से ऐसी परियोजनाओं में बदलना शामिल है, जिन्हें लागू किया जा सके।
यूएनईपी-इंडिया के प्रमुख बालकृष्ण पशुपति ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि केंद्र सरकार की यह घोषणा विज्ञान और नीतियों को व्यवहार में लाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यूएनईपी वर्षों से केंद्र और राज्यों को ‘पैसिव कूलिंग’ तथा शहरी ताप क्षेत्र जैसे विषयों पर विज्ञान आधारित आकलन उपलब्ध कराता रहा है।
‘पैसिव कूलिंग’ भवन डिजाइन का एक तरीका है, जिसमें बिजली या मैकेनिकल एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किए बिना घर के अंदर का तापमान कम करने के लिए हवा, छाया और वाष्पीकरण जैसी प्राकृतिक ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है।
पशुपति ने कहा, ‘‘आने वाले हफ्तों और महीनों में हम जिस ठोस कदम की उम्मीद कर रहे हैं, वह मंशा, आकलन और वैज्ञानिक जानकारी को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी कार्रवाई में बदलना है। दूसरा, वित्तीय सहायता अधिक सुलभ होगी और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर की जाने वाली गतिविधियों को ठोस एवं लागू की जा सकने वाली परियोजनाओं में कहीं अधिक तेजी से बदला जा सकेगा।’’
पशुपति ने कहा, ‘‘एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गर्मी से होने वाला प्रभाव बाढ़ या भूस्खलन से अलग है, जो आमतौर पर छोटे इलाकों तक सीमित रहते हैं। गर्मी का प्रभाव भौगोलिक रूप से कहीं अधिक व्यापक होता है। इसलिए, हम कई अलग-अलग राज्यों के साथ मिलकर काम कर सकेंगे और उन्हें इस दिशा में कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित कर सकेंगे।’’
उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (एसडीएमए) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं की मदद से अब तक गर्मी के प्रकोप से निपटने के लिए अपनाए जा रहे अपेक्षाकृत ‘‘नरम’’ दृष्टिकोण को आपदा-केंद्रित दृष्टिकोण में बदला जा सकेगा, जिसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े सिद्धांतों को बेहतर ढंग से समझा और लागू किया जाएगा।
यूएनईपी-इंडिया के प्रमुख ने कहा कि अब तक जलवायु शमन के तहत मुख्य रूप से चर्चा की जाने वाली गतिविधियां जैसे ठंडी छतें, बड़े हरित क्षेत्र, इमारतों में सुधार और निर्माण से जुड़े उपाय, अब एक साथ समन्वित रूप से आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इससे केंद्र और राज्य सरकारों को सहयोग देने के साथ-साथ इन उपायों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाने में भी अधिक अधिकार मिलेंगे।
भाषा शफीक सुभाष
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