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Monday, 24 June, 2024
होमदेश'बेरोजगार विरोधी, self-defence की टीचर', संसद सिक्योरिटी ब्रीच की आरोपी नीलम ने गांव में बनवाई है लाइब्रेरी

‘बेरोजगार विरोधी, self-defence की टीचर’, संसद सिक्योरिटी ब्रीच की आरोपी नीलम ने गांव में बनवाई है लाइब्रेरी

हरियाणा के घासो खुर्द गांव में, जहां से वह आती हैं, नीलम आज़ाद को एक 'क्रांतिकारी' के रूप में जाना जाता है. उसके परिवार के सदस्यों और खाप नेताओं का कहना है कि उसके खिलाफ यूएपीए का आरोप 'अनुचित' है.

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नई दिल्ली: नए संसद भवन में बुधवार को सुरक्षा उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार नीलम आजाद को हरियाणा के जींद जिले के घासो खुर्द गांव के निवासी एक “क्रांतिकारी” और “स्वच्छंद” महिला के रूप में देखते हैं.

उनके परिवार के सदस्यों ने दिप्रिंट को बताया कि घासो खुर्द के उसके दो मंजिला इमारत वाले घर में उसके पढ़ाई वाले कमरे में क्रांतिकारी भगत सिंह, समाज सुधारक बी.आर. अम्बेडकर, पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की फोटो के साथ कमरे की दीवारों पर विश्व मानचित्र का पोस्टर लगा है. उनके परिवार ने फोन पर बताया कि भगत सिंह से प्रेरित होकर, नीलम ने 2020-2021 के किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान अपना सरनेम वर्मा से बदलकर आज़ाद कर लिया था.

नीलम ने पहले भी हरियाणा में हुए कई विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया है – चाहे वह किसानों का आंदोलन हो, भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों का आंदोलन हो, या महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (एमजीएनआरईजीएस) के कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय विरोध प्रदर्शन हो.

उनके परिवार ने बताया कि लेकिन उसके दिल के सबसे करीब बेरोजगारी का मुद्दा है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि नेशनल एलीजिबिलिटी टेस्ट, हरियाणा शिक्षक एलीजिबिलिटी टेस्ट और संस्कृत में एमफिल की डिग्री हासिल करने के बावजूद नीलम को नौकरी नहीं मिल रही थी. वह भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में भी तीन बार बैठीं लेकिन सफल नहीं हो सकीं.

सोशल मीडिया और टेलीविजन पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, नीलम को नए संसद भवन के बाहर धुएं का डिब्बा खोलते हुए “तानाशाही नहीं चलेगी” (तानाशाही मुर्दाबाद) का नारा लगाते हुए सुना जा सकता है, जहां से उन्हें बुधवार को गिरफ्तार किया गया था. महाराष्ट्र के लातूर से स्नातक अमोल शिंदे पर भी सुरक्षा उल्लंघन की साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है.

कथित साजिश के लिए इन दोनों के साथ तीन अन्य लोगों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

नीलम के बड़े भाई कुलदीप, जो हिसार में दूध विक्रेता हैं, ने कहा कि उन्होंने ही सबसे पहले उसे टेलीविजन पर ले जाते हुए देखा था और अपने परिवार को फोन करके सूचित किया था.

लेकिन परिवार का मानना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है और उस पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए.

नीलम की 57 वर्षीय मां सरस्वती देवी ने दिप्रिंट से कहा, “नीलम ने केवल संसद के बाहर नारे लगाए हैं. उसने कोई बम नहीं गिराया है. पूरा गांव हमारे साथ है. हर कोई जानता है कि वह दोषी नहीं है और हम उसके साथ हैं. ”

घासो खुर्द के कई निवासियों से दिप्रिंट ने बात की और सभी ने नीलम के बारे में एक जैसी ही बातें बताई.

स्थानीय कृषि नेता आज़ाद पाहवा ने कहा, “वह एक अच्छी और बेकसूर महिला हैं. वह लंबे समय से बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं. लोकतंत्र में विरोध करना हमारा अधिकार है. (उसके) विरोध के तरीके पर बहस हो सकती है लेकिन उस पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज करना अनावश्यक है. वह आतंकवादी नहीं है.”


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‘नीलम अच्छी जिंदगी के लिए हमारी एकमात्र आशा’

घासो खुर्द के निवासियों ने दिप्रिंट को बताया कि दो साल पहले, नीलम ने गांव में एक सार्वजनिक पुस्तकालय खोला था और महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा भी सिखाती हैं.

उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, उन्होंने भगत सिंह, अंबेडकर की किताबें और भारतीय संविधान की प्रति वितरित की.

एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “उन्होंने छात्रों के लिए शैक्षणिक किताबें, बेंच और पुस्तकालय के लिए वाईफाई कनेक्शन खरीदने के लिए ग्रामीणों से भी योगदान लिया. हर कोई उसे पसंद करता है.”

नीलम एक हलवाई की बेटी हैं और परिवार ने यह भी कहा कि वह हमारे “अच्छे जीवन” की एकमात्र आशा है.

उसकी मां ने कहा, “हम एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार हैं और गुजारा करने में सक्षम नहीं हैं. हम सभी को नीलम से उम्मीदें हैं. वह हमारे लिए कमाना चाहती है. हमने उसे पढ़ाया लिखाया है. ”

उसके परिवार के सदस्यों ने कहा, 2015 में नीलम को अपने घर की पहली मंजिल की सीढ़ी से गिरने पर रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी. तीन वर्षों तक वह बिस्तर पर पड़ी रही, लेकिन उसने पढ़ाई जारी रखी.

खाप ने नीलम की रिहाई की मांग की

गुरुवार को स्थानीय किसान मोर्चा ने नागरिक कार्यकर्ताओं और खाप के साथ मिलकर उचाना तहसील में एक पंचायत की और नीलम की रिहाई की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार से उनकी मांगें नाजायज नहीं थीं और उन्होंने अपनी बेरोजगारी से परेशान होकर ये कदम उठाया है.

पुलिस सूत्रों ने पहले दिप्रिंट को बताया था कि संसद मामले के आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि उन्होंने “बेरोजगारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और नीति निर्माताओं को अपनी चिंता से अवगत कराने और मजबूर करने” के लिए उल्लंघन की योजना बनाई थी.

पंचायत के मुताबिक, सरकार को नीलम और उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को रिहा करना चाहिए और उनके विरोध के पीछे की मंशा को देखना चाहिए.

माजरा खाप, जींद के समुंदर सिंह ने दिप्रिंट को बताया, “संसद के बाहर विरोध करने के लिए ऐसा कदम उठाने पर मजबूर नीलम, कितनी निराश होंगी. हरियाणा में बेरोजगारी के कारण युवक-युवतियां आत्महत्या कर रहे हैं. लेकिन सरकार उस पर ध्यान नहीं दे रही है.”

आजाद पाहवा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान नीलम से मुलाकात की बात कही.

उन्होंने कहा, “वह हर विरोध प्रदर्शन में शामिल होती हैं, भले ही वह छोटा ही क्यों न हो. वह हमेशा एकजुटता के साथ खड़ी रहती हैं.’ इन विरोध प्रदर्शनों में, हम एक-दूसरे से मिलते थे और बधाई देते थे और वह हमारे समाज में भेदभाव और असमानता के कारण हमेशा नाराज और गुस्सा रहती थीं. ”

यह पहली बार नहीं है कि नीलम को पुलिस ने हिरासत में लिया है. उनके परिवार के अनुसार, इस मई में पहलवान के विरोध के दौरान, नीलम को हिरासत में लिया गया और कुछ घंटों के बाद रिहा कर दिया गया.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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