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Tuesday, 30 May, 2023
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पूरी तरह ऑटोमेटिक मशीनों से बनेंगे तिरुपति मंदिर के ‘लड्डू’, अधिक ‘स्वच्छ और स्वादिष्ट’ बनाना लक्ष्य

टीटीडी के अधिकारियों के अनुसार, रिलायंस समूह दो मशीनों को स्थापित करने के लिए सहमत हो गया है जो रोजाना उत्पादन को दोगुना कर देगा और इससे रसोई में लोगों का काम भी प्रभावित नहीं होगा क्योंकि कर्मचारियों के पास दूसरे काम भी होंगे.

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चेन्नई: तिरुमाला तिरुपति मंदिर में मिलने वाला प्रसाद ‘लड्डू’ जल्द ही ऑटोमेटिक मशीन के माध्यम से बनाया जाएगा जिससे उत्पादन दोगुना हो जाएगा.

जनवरी में एक घोषणा कर, आंध्र प्रदेश में मंदिर चलाने वाले ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कार्यकारी अधिकारी ए.वी. धर्म रेड्डी ने कहा था कि 50 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत लड्डू बनाने की प्रक्रिया दिसंबर 2023 तक स्वचालित हो जाएगी.

धर्मा रेड्डी ने कहा था, ‘पूरी प्रक्रिया के बाद भक्तों के लिए अधिक स्वच्छ और स्वादिष्ट लड्डू का उत्पादन होगा.’

टीटीडी के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, रिलायंस ग्रुप ऑफ कंपनीज ने दो मशीनें लगाने पर सहमति जताई है – एक जो नियमित रूप से इस्तेमाल की जाएगी और दूसरी स्टैंडबाय पर रखी जाएगी.

श्रीवारी (मंदिर) के लड्डू की मांग बहुत अधिक 

टीटीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एक सामान्य दिन में, 3 से 3.5 लाख लड्डू बनते हैं. स्वाचालित मशीनें लगाने के साथ ही, यह संख्या कम से कम 6 लाख तक बढ़ जाएगी.’

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अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि दूसरे शनिवार, रविवार और लगातार छुट्टियों में हर दिन कम से कम पांच लाख लड्डू बनाए जाते हैं, लेकिन वैकुंठ एकादशी, रथ सप्तमी और नौ दिन के ब्रह्मोत्सव जैसे त्योहारों के दिनों में इसकी मांग बहुत अधिक होती है.

मंदिर की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अकेले जनवरी महीने में 1.07 करोड़ श्रीवारी लड्डू बेचे गए. 2022- 2023 के वार्षिक बजट में, मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि ‘लड्डू’ प्रसादम की बिक्री से टीटीडी को 365 करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्त होने की संभावना है – यानी एक दिन में 1 करोड़ रुपये.


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काम पर 600 से अधिक लोग

वर्तमान में, मंदिर परिसर के अंदर श्रीवारी लड्डू पोटू (मंदिर लड्डू रसोई) में लड्डू बनाए जाते हैं. टीटीडी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘लड्डू बनाने की प्रक्रिया में हर शिफ्ट में लगभग 300 श्री वैष्णव पुरुष ब्राह्मण शामिल होते हैं.’ भक्तों के लिए दो शिफ्ट में लड्डू बनाए जाते हैं जिनकी संख्या हर दिन 50,000 से एक लाख के बीच होती है.

अधिकारी ने कहा कि मंदिर दर्शन पूरा करने वाले प्रत्येक भक्त को एक मुफ्त लड्डू प्रसाद के रूप में मिलता है, लेकिन यह लड्डू ‘बहुत छोटा है, शायद एक अमला (आंवले) के आकार का होता है.’

इसके अतिरिक्त मंदिर की रसोई में तीन तरह के लड्डू बनते हैं. नियमित दिनों में, प्रत्येक पास धारक भक्त नियमित रूप से प्रोक्थम लड्डू प्राप्त कर सकता है, जिनमें से प्रत्येक का वजन 160-180 ग्राम के बीच होता है. विशेष त्योहार के दिनों में, मंदिर अस्थानम लड्डू भी तैयार करता है जिसका वजन 750 ग्राम होता है लेकिन इसे सीमित संख्या में बनाया जाता है. कल्याणोत्सवम में भाग लेने वाले भक्तों के लिए, जो वीआईपी टिकट रखते हैं और कुछ विशेष अवसरों के लिए, मंदिर कल्याणोत्सवम लड्डू भी प्रदान करता है. लड्डू बिक्री काउंटर पर काम करने वाले एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कहा, ‘जहां एक अतिरिक्त प्रोक्थम लड्डू की कीमत 50 रुपये है, वहीं एक अतिरिक्त कल्याणोत्सवम लड्डू की कीमत 200 रुपये है.’ अस्थानम के लड्डू इतनी कम मात्रा में बनते हैं कि आसानी से नहीं मिलते.

तिरुपति लड्डू, प्रसादम की बहुत मांग थी, इसे 2009 में पेटेंट कराया गया था और इसे विशेष भौगोलिक संकेत टैग (जीआई टैग) दिया गया था, जिसका अर्थ है कि बनाए गए लड्डू की रेसिपी और गुणवत्ता अद्वितीय है.

लड्डू एक पारंपरिक दिततम (नुस्खा) के साथ तैयार किए जाते हैं, और वर्तमान अर्ध-यंत्रीकृत प्रक्रिया की सीसीटीवी के माध्यम से पूरी तरह से निगरानी की जाती है. टीटीडी अधिकारियों द्वारा नियमित वजन और गुणवत्ता जांच की जाती है.

लेकिन यह कहना नहीं है कि पूरी तरह से स्वचालित प्रणाली 600 से अधिक ब्राह्मण श्रमिकों के रोजगार पर संकट आ जाएगा. टीटीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि मंदिर के पोट्टू में लड्डू तैयार करने वालों की जरूरत बनी रहेगी. उन्होंने कहा, ‘जैसे-जैसे लड्डू का उत्पादन बढ़ेगा, श्री वैष्णव ब्राह्मणों के पास प्रक्रिया से संबंधित अन्य काम होंगे.’

(संपादनः ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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