Friday, 27 May, 2022
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‘भारत पर हमले की साजिश’ में SFJ सदस्य मुल्तानी की भूमिका का पता लगाने NIA की टीम जर्मनी जाएगी

एनआईए के मुताबिक, ‘लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट में मुल्तानी की संलिप्तता पर अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है.’ जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि वह पहले कभी उसके रडार पर नहीं रहा. हालांकि, पंजाब पुलिस के पास उसका रिकॉर्ड है.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी के खिलाफ एक मामले की जांच के लिए जल्द ही जर्मनी रवाना होगी. एजेंसी के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि मुल्तानी कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और पंजाब के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मुंबई समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमलों की साजिश रच रहा है.

एनआईए ने पिछले महीने ही मुल्तानी और एसएफजे के अन्य सदस्यों के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत ‘भारत में आतंकी हमले करने और पंजाब में उग्रवाद भड़काने की साजिश रचने’ का मामला दर्ज किया था. एसएफजे अमेरिका स्थित एक खालिस्तान समर्थक समूह है जिसे अलगाववादी गतिविधियों के कारण भारत में प्रतिबंधित कर रखा गया है.

एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि इस केस का लुधियाना के जिला और सत्र अदालत परिसर में 23 दिसंबर 2021 के विस्फोट से कोई लेना-देना नहीं है.

मुल्तानी को 28 दिसंबर 2021 को जर्मनी में उस समय हिरासत में लिया गया था, जब भारतीय एजेंसियों ने एक आतंकवादी साजिश में उसकी कथित संलिप्तता को लेकर कुछ इनपुट के संदर्भ में यूरोपीय देश के जांच अधिकारियों से संपर्क साधा. हालांकि, पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया.

एजेंसी के एक सूत्र ने कहा, ‘विश्वसनीय इनपुट मिलने के बाद हमारी एक टीम मुल्तानी और अन्य गुर्गों के खिलाफ दर्ज मामले में मुल्तानी से पूछताछ के लिए जर्मनी जाएगी. हमारे पास पर्याप्त सबूत होने पर गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. हम जर्मन अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.’

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सूत्र ने बताया कि मुल्तानी ‘आईएसआई ऑपरेटिव जिब्रान के अलावा पाकिस्तान के तस्करी नेटवर्क—जिसमें हिस्ट्रीशीटर राणा तासीम, इमरान और अन्य शामिल हैं—के संपर्क में हैं और पंजाब में बैठे अपने सहयोगियों की मदद से सक्रिय तौर पर मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में हमले की साजिश रच रहा है.’

सूत्र ने बताया कि मुल्तानी के सहयोगियों में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के जगदीश सिंह भूरा, केजेडएफ के उपप्रमुख और एसएफजे से जुड़े गुरमीत सिंह, खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) के रंजीत सिंह पखोके, बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सुखदेव सिंह हेरान और हरदीप सिंह निज्जर, और केटीएफ सदस्य परमजीत सिंह पम्मा और रंजीत सिंह नीता शामिल हैं.

हालांकि, मुल्तानी ने आतंकवादी साजिशों में संलिप्तता के आरोपों से इनकार किया है. पिछले महीने एसएफजे के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नून की तरफ से जारी एक वीडियो के मुताबिक, मुल्तानी ने कहा कि उनकी लड़ाई ‘कलम’ के जरिये रही है न कि ‘हथियार’ से. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारी उन्हें और एसएफजे को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

‘लुधियाना विस्फोट से कोई संबंध नहीं’

एजेंसी के सूत्र ने कहा कि हालांकि, एनआईए ने लुधियाना में जिला एवं सत्र अदालत परिसर में धमाके में एक व्यक्ति की मौत और पांच अन्य के घायल होने के एक हफ्ते बाद यह मामला दर्ज किया था, लेकिन इसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है.

सूत्र ने आगे कहा, ‘हमारे पास लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट में मुल्तानी की संलिप्तता पर अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं है. उस मामले की जांच पंजाब पुलिस कर रही है, जिसने हमें इस तरह का कोई लिंक नहीं बताया है. यह मामला पंजाब में उग्रवाद फिर भड़काने और मुंबई में आतंकी हमलों की साजिश रचने में मुल्तानी की भूमिका से जुड़ा है जिस पर अलग से जांच की जा रही है.

एनआईए के मुताबिक, पंजाब के होशियारपुर जिले के मंसूरपुर गांव का रहने वाला मुल्तानी पहले कभी उनके राडार पर नहीं था क्योंकि एजेंसी की जांच के दायरे में शामिल किसी भी मामले में वह शामिल नहीं था.

हालांकि, पंजाब पुलिस के पास उसका पूरा रिकॉर्ड है.

दिप्रिंट द्वारा हासिल किए गए पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुल्तानी के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं, एक अमृतसर में, दूसरा मोहाली और तीसरा तरनतारन में. ये सभी मामले 2021 में दर्ज किए गए थे.

अमृतसर में 7 फरवरी को दर्ज पहली प्राथमिकी में पुलिस ने दावा किया कि मुल्तानी ने जीवन सिंह नामक एक व्यक्ति को हथियार खरीदने और किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की मार देने के लिए पैसे भेजे था ताकि किसान आंदोलन में अशांति फैलाई जा सके.

जीवन सिंह ने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि मुल्तानी ने उसे यह निर्देश सोशल मीडिया के जरिये दिया था. एफआईआर के मुताबिक, उसके पास से चार पिस्तौल, पांच मैगजीन और एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया था.

दूसरा मामला 30 अगस्त को तरनतारन में दर्ज हुआ था. पुलिस ने आरोप लगाया कि मुल्तानी ने अपने सहयोगी सरूप सिंह कुक्की को ‘नापाक साजिशों को अंजाम देने’ के लिए पैसे भेजे. कुक्की के पास कथित तौर पर दो हथगोले बरामद किए गए थे.

तीसरा मामला 3 दिसंबर को यूएपीए की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था. इसमें मुल्तानी व अन्य पर ‘आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण’ का आरोप लगाया गया.

पंजाब पुलिस के एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, ‘मुल्तानी हमारे राडार पर है. उसने सोशल मीडिया पर अलगाववादी एजेंडे रेफरेंडम 2020 का दुष्प्रचार अभियान चला रखा है और जर्मनी में एसएफजे की तरफ से आयोजित सभी रैलियों और कार्यक्रमों में भी शामिल रहा है. इसके अलावा, वह पंजाब में अपने सहयोगियों को हथियारों की खरीद आदि के लिए पैसे भेज रहा है.’

एनआईए के एक सूत्र के मुताबिक, मुल्तानी और उसके सहयोगी जमीनी स्तर पर पंजाब में युवाओं को ‘उग्रवाद की ओर धकेलने, उकसाने और उन्हें भर्ती करने’ की गतिविधियों में शामिल हैं. साथ ही इसके लिए फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेंजर आदि ऑनलाइन माध्यमों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

सूत्र ने कहा, ‘वे पंजाब में तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल कर आतंकी हमलों को अंजाम देने की साजिश के तहत हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक खरीदने के लिए फंड जुटा रहे हैं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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