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Thursday, 8 January, 2026
होमदेश‘सिस्टम की समस्या’: SIR के बाद UP ड्राफ्ट रोल से कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल और परिवार के नाम हटाए गए

‘सिस्टम की समस्या’: SIR के बाद UP ड्राफ्ट रोल से कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल और परिवार के नाम हटाए गए

सप्पल और उनका परिवार एक साल पहले यूपी की साहिबाबाद विधानसभा से नोएडा शिफ्ट हुआ था. उन्होंने कहा कि जो मतदाता जगह बदलते हैं, उनके लिए ईसी के पास कोई सिस्टम नहीं है, इसलिए उन्हें नए मतदाता के तौर पर दोबारा नाम दर्ज कराना पड़ता है.

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभ्यास के तहत राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम हटा दिए गए हैं.

सप्पल और उनका परिवार एक साल पहले उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधानसभा सीट से नोएडा शिफ्ट हुआ था. उन्होंने मंगलवार को एक्स पर यह भी पोस्ट किया कि उनका और उनके परिवार के सदस्यों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट और पिछली विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट में थे और उनके माता-पिता के नाम भी 2003 की सूची में थे. उन्होंने नोएडा विधानसभा सीट से ड्राफ्ट रोल में नाम जोड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा किए थे.

सप्पल ने दिप्रिंट से कहा, “जो लोग नई जगह शिफ्ट होते हैं, उनका नाम पुरानी जगह से कट जाता है, लेकिन नई जगह जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है. उन्हें फिर से फॉर्म 6 भरना पड़ता है और तब उन्हें नया मतदाता मान लिया जाता है.”

उन्होंने कहा, “नया मतदाता होने का मतलब है कि मेरा पुराना रिकॉर्ड खत्म हो गया. अब आगे अगर फिर कभी SIR हुआ और इस बार की तरह 2003 की वोटर लिस्ट में नाम दिखाने की शर्त रखी गई, तो वह रिकॉर्ड अब नहीं रहेगा. यानी दोहरी मार.”

मंगलवार को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर जारी एक प्रेस नोट में भारत निर्वाचन आयोग ने साफ किया था कि अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 भरना ज़रूरी है, जिसे घोषणा पत्र और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ के साथ जमा करना होगा.

सप्पल की एक्स पोस्ट के जवाब में, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने कहा कि अब सप्पल को नोएडा जिले की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरना होगा. उसने कहा कि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि उन्होंने घर बदला है.

सीईओ यूपी के कार्यालय ने यह भी कहा कि यह कहना सही नहीं है कि सप्पल का नाम दोनों विधानसभा क्षेत्रों (पुरानी और नई) से हटा दिया गया है, क्योंकि शुरुआत में ही उनका नाम नई विधानसभा सीट में था ही नहीं. उसने इस बात पर जोर दिया कि यह सिर्फ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है और अंतिम सूची अभी जारी होना बाकी है.

हालांकि, दिप्रिंट से बात करते हुए सप्पल ने नाम कटने को “जीवन भर की समस्या” बताया और कहा कि अब निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में उन्हें “नया मतदाता” माना जाएगा.

उन्होंने कहा, “यह ईसीआई के एक सिस्टम की समस्या है कि आपने घर बदलने वाले मतदाताओं के लिए कोई सिस्टम नहीं बनाया है. सारे दस्तावेज़ जमा करने के बावजूद, SIR के बाद आप उनसे नए मतदाता के तौर पर रजिस्टर करने को कह रहे हैं, जिससे मेरा पुराना रिकॉर्ड खत्म हो जाएगा.”

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “आम तौर पर, अगर कोई व्यक्ति एक ही राज्य के अंदर शिफ्ट होता है, तो आदर्श रूप से उसका ट्रांसफर सीधे हो जाना चाहिए, क्योंकि मैंने नई जगह से सारे कागज़ जमा किए थे.” उन्होंने इसे “व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम की समस्या” बताया.

‘कोई अनजान व्यक्ति नहीं’

एक्स पर एक पोस्ट में सप्पल ने आरोप लगाया कि इसी आधार पर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.

उन्होंने लिखा, “इसके अलावा, मैं कोई अनजान व्यक्ति नहीं हूं. मैं भारत के उपराष्ट्रपति का संयुक्त सचिव रह चुका हूं और राज्यसभा सचिवालय में भी काम कर चुका हूं. मैं कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य हूं और टीवी पर भी जाना-पहचाना चेहरा हूं. दरअसल, मैं SIR और अन्य मुद्दों पर निर्वाचन आयोग के पास जाने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा भी रहा हूं! बीएलओ भी मुझे जानता है. फिर भी हमारे नाम हटा दिए गए!”

मंगलवार को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का प्रस्ताव है, जो राज्य के मौजूदा कुल मतदाताओं का 18.7 प्रतिशत है. यह अब तक जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभ्यास हुआ है, उनमें सबसे ज्यादा कटौती है. तमिलनाडु में 97.37 लाख मतदाताओं (15.19 प्रतिशत) के नाम हटाए गए, जबकि गुजरात में 73.73 लाख मतदाताओं (14.4 प्रतिशत) के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए.

कुल हटाए गए मतदाताओं में से 46.23 लाख (2.99 प्रतिशत) मृत पाए गए, 2.17 करोड़ (14.06 प्रतिशत) अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए, और 25.47 लाख (1.65 प्रतिशत) ऐसे थे जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज थे.

दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई है और 6 फरवरी तक चलेगी. इसके साथ-साथ आयोग सुनवाई और सत्यापन के लिए नोटिस भी जारी कर रहा है, जो 27 फरवरी तक जारी रहेंगे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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