Thursday, 7 July, 2022
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सबरीमाला मामले की सुनवाई अब बड़ी बेंच करेगी : सुप्रीम कोर्ट

पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा की अगुआई में यह फैसला सुनाया गया था कि सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत है.

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे बड़ी बेंच को भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मसले पर फैसला पढ़ते हुए कहा कि इस केस का असर सिर्फ इस मंदिर ही नहीं बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, अग्यारी में पारसी महिलाओं के प्रवेश पर भी पड़ेगा. सर्वोच्च अदालत ने सबरीमाला केस को बड़ी बेंच को रेफर कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह मामला केवल हिंदू महिलाओं तक सीमित नहीं है.

सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को संदर्भित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को भेज दिया गया है.

फैसले को पढ़ते हुए जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने कहा इसे बड़ी बेंच को भेजा जायेगा अब सात जजों की बेंच इसकी सुनवाई करेगी.

जस्टिस नरीमन और जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस मामले पर अलग विचार रखे. पांच जजों की बेंच ने 3:2 से फैसला लिया है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को याचिकाकर्ता राहुल ईश्वर ने इस फैसले का स्वागत किया है.

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पिछले साल के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी, सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले पर कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 6 फरवरी को अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था. इनमें नेशनल अयप्पा डिवोटीज़ (वुमेन) एसोसिएशन, नायर सर्विस सोसायटी और ऑल केरल ब्राह्मण एसोसिएशन की याचिकाएं शामिल हैं.

आपको बता दें, पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा की अगुआई में यह फैसला सुनाया गया था कि सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत है. जिसके बाद पूरे राज्य भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और जगह-जगह हिंसा भड़की थी.

सालों पुराने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं से जुड़ा पहला विवाद 1950 में पता चला. साल 1950 में सबरीमाला मंदिर में आग लगने के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और उसके बाद नए नियम बनाये गए, जिसमें सबसे बड़ा नियम यह था कि अब से महिलाएं इस मंदिर में नहीं जा सकेंगी.

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