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Tuesday, 27 January, 2026
होमदेशइस्तीफा, निलंबन और आधी रात का हंगामा: योगी सरकार पर सवाल उठाने वाला यूपी अफसर चर्चा में

इस्तीफा, निलंबन और आधी रात का हंगामा: योगी सरकार पर सवाल उठाने वाला यूपी अफसर चर्चा में

पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने कैंपस में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए बनाए गए नए यूजीसी नियमों के विरोध में इस्तीफा दिया. राज्य सरकार ने निलंबन आदेश जारी किया और जांच शुरू की.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री सोमवार को इस्तीफा देने के बाद से सुर्खियों में हैं. उन्होंने कैंपस में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए बनाए गए नए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के विरोध में इस्तीफा दिया.

2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री इस समय बरेली में जिला कलेक्टरेट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं.

सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को भेजे गए अपने इस्तीफे के पत्र में 43-साल के अलंकार अग्निहोत्री, जो बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे, उन्होंने प्रयागराज के माघ मेला के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी आलोचना की.

अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों से गहरे वैचारिक मतभेद हैं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है.

जैसे ही उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में सरकार की आलोचना की, जिसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है — राज्य सरकार ने सोमवार देर शाम उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए.

26 जनवरी को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, बरेली के जिलाधिकारी की रिपोर्ट में अग्निहोत्री को पहली नज़र में सरकार की छवि खराब करने का दोषी पाया गया.

इसके आधार पर राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन और अपील) नियम, 1999 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. बरेली मंडल के आयुक्त को इस मामले की विस्तृत जांच करने के लिए कहा गया है.

निलंबन के कुछ ही मिनटों बाद अग्निहोत्री और उनके समर्थकों ने डीएम कार्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया. देर रात बरेली कलेक्ट्रेट में हुए नाटकीय घटनाक्रम के बाद अग्निहोत्री ने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया.

इससे पहले दिन में डीएम ने उन्हें समस्याओं को सुलझाने के लिए बैठक के लिए बुलाया था. बाद में अग्निहोत्री ने दावा किया, “किसी तरह मैं डीएम ऑफिस से निकल पाया. यह लड़ाई अब लंबी है. वे मुझे धमका रहे हैं, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगा.”

सोमवार देर रात, सरकारी आवास खाली करने के बाद, समर्थकों से घिरे अग्निहोत्री ने मीडिया से बात की.

उन्होंने कहा, “जिलाधिकारी ने मुझे करीब 45 मिनट तक रोके रखा. मुझे वहां सहज महसूस नहीं हुआ. मैंने उन्हें फोन पर किसी से बात करते हुए यह कहते सुना — ‘पंडित पागल हो गया.’ ऐसी टिप्पणी सुनकर मैं हैरान रह गया.”

अग्निहोत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया. बातचीत के एक वीडियो में शंकराचार्य अग्निहोत्री से कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, “आपने एक वरिष्ठ प्रशासनिक पद से इस्तीफा दिया है. यह निश्चित रूप से एक कठिन फैसला रहा होगा. हम आपको अपनी टीम में एक बेहतर भूमिका दे सकते हैं, जहां आप धर्म और समाज के लिए काम करेंगे.”

अग्निहोत्री ने जवाब दिया कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे.

13 जनवरी को अधिसूचित यूजीसी के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने’ से जुड़े नियम, 2026, को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों में व्यापक नाराज़गी देखी जा रही है. उनका कहना है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है.

यूजीसी का कहना है कि नए नियम कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने में मदद करेंगे. इसके तहत संस्थानों से कहा गया है कि वे खास तौर पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी टीमें बनाएं.


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अब तक क्या हुआ

इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में “ब्राह्मण विरोधी अभियान” चल रहा है और समुदाय के लोगों को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शंकराचार्य के शिष्यों और बुजुर्ग साधुओं के साथ सुरक्षा कर्मियों ने मारपीट की, और सवाल उठाया कि ऐसे कदमों से जनता को क्या संदेश जा रहा है.

सोमवार को मीडिया को दिए अपने बयान में अग्निहोत्री ने कहा, “यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं. जो लोग खुद को ब्राह्मणों का नेता समझते हैं, वे भी कुछ नहीं बोल रहे, बिल्कुल कॉरपोरेट कर्मचारियों की तरह. मैं अपील करता हूं कि अगर ज़मीर ज़िंदा है तो जनता के साथ खड़े हों. जहां सामान्य वर्ग प्रदर्शन कर रहा है, क्या उनके साथ खड़े न होने में आपको शर्म नहीं आती?”

दिप्रिंट ने कॉल के जरिए अग्निहोत्री से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद मिला.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अग्निहोत्री का इस्तीफा राज्य की सिविल सेवा और सत्ता के गलियारों के लिए बड़ा झटका था. वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति संभालने को कहा गया, लेकिन अग्निहोत्री टस से मस नहीं हुए. इस बीच विपक्षी दलों और ब्राह्मण संगठनों ने उनके इस्तीफे को लेकर मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है.

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने दिप्रिंट से कहा, “अग्निहोत्री के इस्तीफे ने सरकार को लेकर ब्राह्मण समुदाय में गलत संदेश दिया है. हम सभी जानते हैं कि यह सरकार शुरू से ही ब्राह्मण विरोधी रही है. अब यह मामला और बढ़ेगा और आने वाले दिनों में सरकार को नुकसान पहुंचाएगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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