Saturday, 2 July, 2022
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‘आगे जो होगा देखा जाएगा’: टेरर-फंडिंग के आरोप स्वीकार करने वाले यासीन मलिक ने क्या कहा

‘न्याय मित्र’ अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने मलिक को बता दिया था कि आरोप स्वीकारने के नतीजे क्या हो सकते हैं लेकिन उन्होंने अपने मामले में पैरवी न करने का मन बना लिया.

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नई दिल्ली: जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) मोहम्मद यासीन मलिक ने एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) एडवोकेट अखंड प्रताप सिंह से कहा, ‘उन्होंने अपने मामले में पैरवी न करने का मन बना लिया और कहा कि आगे जो कुछ होगा वह उसका भी सामना करने के लिए तैयार है’.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच किए गए 2017 के टेरर-फंडिंग मामले में आरोपी यासीन मलिक ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत के समक्ष अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया. उन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने, आतंकी गिरोह का सदस्य होने, आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने और राजद्रोह के आरोप लगाए गए हैं.

‘न्याय मित्र’ वह व्यक्ति होता है जो किसी विशेष मामले में पक्षकार नहीं होता है लेकिन कानून के कुछ मामलों के संबंध में निष्पक्ष सलाह देने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त किया जाता है. सिंह ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मलिक से दो बार मुलाकात की थी. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने जेकेएलएफ नेता से अपने खिलाफ लगे आरोपों को चुनौती देने के लिए मनाने की कोशिश की थी लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया.

सिंह ने कहा, ‘अदालत ने मुझे न्याय मित्र नियुक्त किया था ताकि मलिक को बताया जा सके कि अपने आरोप स्वीकारने के नतीजे क्या हो सकते हैं और उसे गाइड किया जा सके. मैं उससे जेल के अंदर दो बार मिला और उसे विस्तार से समझाया भी, लेकिन उसने अपना मन बना लिया था.’

उन्होंने कहा, ‘वह आरोपों को चुनौती नहीं देना चाहता. उसने साफ कहा कि वह अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार करना चाहता है और मुकदमा नहीं लड़ना चाहता.

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यह पूछे जाने पर कि मलिक ने अपना दोष स्वीकार करने का फैसला क्यों किया, सिंह ने बताया, ‘उसने कहा कि भविष्य में उसके साथ जो कुछ भी होने वाला है, वह उसका सामना करने के लिए तैयार है. उसने और भी बहुत सी बातें कही थीं, जिनका मैं खुलासा नहीं कर सकता. लेकिन वह मुकदमे का सामना नहीं करना चाहते हैं.’

मंगलवार को अदालत की सुनवाई के दौरान, यासीन मलिक मामले में एकमात्र आरोपी था जिसने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वीकार किया था. जबकि अन्य ने दोषी नहीं ठहराए जाने का अनुरोध किया. मलिक ने अपने मामले में वकील चुनने की बजाय खुद ही पैरवी करने का फैसला किया.

विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह 19 मई को मलिक के मामले में फैसला सुनाएंगे और उन अपराधों के लिए तय की जाने वाली सजा के बारे में तर्क भी सुनेंगे, जिनके लिए मलिक ने खुद को दोषी माना है.


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‘आतंक की फंडिंग के लिए पैसा’

यासीन मलिक जमात-उद-दावा, दुख्तारन-ए-मिल्लत, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और अन्य अलगाववादी समूह के सदस्यों के खिलाफ मई 2017 में दर्ज एक टेरर-फंडिंग मामले में एनआईए द्वारा अप्रैल 2019 में गिरफ्तार किए गए एक दर्जन लोगों में से एक था. उन पर अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए धन जुटाने, प्राप्त करने और इकट्ठा करने, कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने की साजिश का हिस्सा होने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया था.

एनआईए के अनुसार, मलिक जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को फंडिंग करने के लिए हवाला लेनदेन सहित विभिन्न अवैध माध्यमों से धन जुटाने, प्राप्त करने और एकत्र करने में शामिल था.

एनआईए ने अपने दो आरोपपत्रों में अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ अल्ताफ फंटूश, मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी दल के प्रवक्ता शाहिद-उल-इस्लाम, हुर्रियत के गिलानी के नेतृत्व वाले गुट के प्रवक्ता अयाज अकबर और अलगाववादी नईम खान, बशीर भट उर्फ पीर सैफुल्ला और राजा मेहराजुद्दीन कलवाल का भी नाम लिया है.

दिल्ली की एक अदालत ने इस साल मार्च में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि मलिक सहित आरोपी सीधे तौर पर आतंकी फंड प्राप्त करने वालों में से थे और विरोध प्रदर्शनों को अंजाम देने के लिए एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थे जिसके कारण बड़े पैमाने पर घाटी में हिंसा और आगजनी हुई.

अदालत ने पाया कि मलिक ने ‘स्वतंत्रता संग्राम’ के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने के लिए दुनिया भर में एक बड़ा तंत्र स्थापित किया था.

अदालत ने औपचारिक रूप से अन्य कश्मीरी अलगाववादी नेताओं फारूक अहमद डार, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, मोहम्मद यूसुफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख और नवल किशोर कपूर के खिलाफ आरोप तय किए है.

 (इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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