scorecardresearch
Saturday, 11 April, 2026
होमदेशमाओवादी संगठन के सबसे पुराने नेताओं में से एक प्रशांत बोस का निधन, गिरफ्तारी के 5 साल बाद रांची में मौत

माओवादी संगठन के सबसे पुराने नेताओं में से एक प्रशांत बोस का निधन, गिरफ्तारी के 5 साल बाद रांची में मौत

बोस नवंबर 2021 में झारखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अपनी पत्नी शीला मरांडी और अन्य साथियों के साथ रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद थे.

Text Size:

नागपुर: वरिष्ठ माओवादी नेता और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के पोलितब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIIMS) में निधन हो गया. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.

बोस नवंबर 2021 में झारखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अपनी पत्नी शीला मरांडी और अन्य साथियों के साथ रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद थे. करीब 70 साल के बोस पोलितब्यूरो और सेंट्रल कमेटी दोनों के सदस्य थे और गिरफ्तारी के समय उन पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था.

झारखंड पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को दिप्रिंट को बताया, “उम्र से जुड़ी बीमारी के कारण उन्हें RIIMS में भर्ती कराया गया था और आज पहले उनका निधन हो गया.”

पश्चिम बंगाल के रहने वाले बोस 1970 के दशक में माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCCI) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. 2004 में MCCI का आंध्र प्रदेश समेत कई दक्षिणी राज्यों में सक्रिय पीपुल्स वॉर ग्रुप के साथ विलय हुआ, जिसके बाद प्रतिबंधित CPI (माओवादी) का गठन हुआ. नवंबर 2021 में गिरफ्तारी के समय बोस इस प्रतिबंधित संगठन के सेंट्रल रीजनल ब्यूरो के सचिव थे, जिसमें झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं.

लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म सेक्टर के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “2021 में किशनजी के एनकाउंटर के बाद वह संगठन के सबसे पुराने और लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले नेताओं में से एक थे और आत्मसमर्पण के समय बसवराजू के बाद दूसरे स्थान पर थे.”

प्रशांत बोस और उनकी पत्नी शीला मरांडी की फाइल फोटो | एएनआई
प्रशांत बोस और उनकी पत्नी शीला मरांडी की फाइल फोटो | एएनआई

बोस का निधन ऐसे समय में हुआ है जब सेंट्रल कमेटी और पोलितब्यूरो से कई नेताओं के आत्मसमर्पण के कारण माओवादी नेतृत्व काफी कमजोर हो गया है. हालांकि उनके उत्तराधिकारी मिसिर बेसरा, जो ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो देख रहे हैं, अब भी पुलिस और सुरक्षा बलों से बचते हुए जंगल क्षेत्रों में सक्रिय आखिरी माओवादी नेता बने हुए हैं.

बोस को उनकी पत्नी और सहयोगियों—गिरिडीह के बिरेंद्र हांसदा और राजू टुडू, तथा पश्चिम सिंहभूम के कृष्णा बहादा और गुरूचरण बोदरा के साथ 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस को सूचना मिली थी कि वरिष्ठ माओवादी नेता गिरिडीह से पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल की ओर जा रहे हैं.

गिरफ्तारी के समय जिस SUV में वे यात्रा कर रहे थे, उसमें से झारखंड पुलिस ने 1,51,000 रुपये नकद बरामद किए थे. वाहन से एक पेन ड्राइव और दो सैमसंग SSD डेटा कार्ड भी मिले थे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें रांची की सेंट्रल जेल भेज दिया गया, जहां अन्य आरोपी अभी भी बंद हैं.

बाद में 2023 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बोस के खिलाफ मामला दर्ज किया था और उनकी मौत के समय इन दोनों मामलों की सुनवाई चल रही थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments