Tuesday, 18 January, 2022
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केरल के सफल कोविड नियंत्रण के पीछे- ट्रेसिंग, आइसोलेशन और त्वरित रिस्पांस, तीसरे चरण में फिर केस बढ़ने का खतरा : केके शैलजा

धारावी से जुड़े एक सवाल के जवाब में केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 1957 में केरल ने 'लैंड रिफॉर्म' किया जिससे ग़रीबों को ज़मीन मिली और अब उनके पास अपने घर हैं. राज्य में धारावी जैसी झुग्गियां नहीं हैं.

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नई दिल्ली: पहले दो फेज में कोविड-19 के ख़िलाफ सफल रहे केरल ने तीसरे फ़ेज के लिए कमर कस ली है. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने दिप्रिंट के लाइव कार्यक्रम ऑफ़ द कफ़ में कहा कि राज्य ने कर्व को फ़्लैट कर लिया था. लेकिन, कोरोनावायरस से होने वाली इस बीमारी से जुड़े मामले फ़िर से बढ़ रहे हैं.

दिप्रिंट के प्रधान संपादक और सीईओ शेखर गुप्ता के साथ ऑफ द कफ कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘हमने पहला और दूसरा फ़ेज सफ़लतापूर्वक पार कर लिया. लॉकडाउन में ढील के बाद अब तीसरा फ़ेज आ रहा है. लोग बाहर से केरल आने लगे हैं और मामले फ़िर से बढ़ने लगे हैं. हम तीसरे फ़ेज के लिए तैयार हैं.’

उन्होंने जानकारी दी कि केरल ने तभी तैयारी करनी शुरू कर दी, जब राज्य को 18 जनवरी को चीन में कोरोना फ़ैलने का पता चला. वुहान में काफ़ी मलयाली छात्र हैं, ऐसे में वायरस के राज्य में आने का ख़तरा था. ऐसे में 24 जनवरी से ही यहां कोरोना कंट्रोल सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया.

पहले स्टेज में जब केरल के छात्र वुहान से आए, तो इनमें से तीन पॉज़िटिव पाए गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और लोकल ट्रांसमिशन रोकने में सफ़लता मिली. राज्य में दूसरा स्टेज इटली से लौटे एक परिवार की वजह से शुरू हुआ.

भारत सरकार ने तब तक एयरपोर्ट पर ‘यूनिवर्सल सर्वेलांस’ की घोषणा कर दी थी. केरल ने भी बाहर से आने वालों को एयरपोर्ट प्रशासन को जानकारी देने को कहा. इटली से लौटे एक परिवार ने सफ़र की जानकारी नहीं दी और उनकी वजह से राज्य में वायरस फ़ैल गया.

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तीसरे फ़ेज को लेकर सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद लोग हवा, पानी और सड़क के रास्ते आना शुरू हुए हैं. हॉट-स्पॉट वाले इलाकों से भी लोग वापस आ रहे हैं. ऐसे में तीसरा फ़ेज चुनौतीपूर्ण होगा. उन्होंने कहा, ‘हमने कर्व को फ़्लैट कर दिया था, लेकिन ये फ़िर से ऊपर जा रहा है. हम इसके लिए तैयार है.’

राज्य में वापस लौट रहे लोगों को क्वारेंटीन सेंटर भेजना शुरू किया है. हर एयरपोर्ट, सीपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सफ़र से जुड़ी अन्य जगहों पर निगरानी केंद्र बनाए गए हैं. सड़क के रास्ते आ रहे लोगों का ज़िम्मा पंचायत वाले संभालेंगे. राज्य प्रशासन का ज़ोर एक बार फ़िर से चेन ब्रेक करने पर है.

निपाह वायरस के अनुभव से मिली मदद

कोविड-19 के मामले में केरल द्वारा भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर किए जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केरल को निपाह जैसे वायरस से लड़ने का अनुभव रहा है. हालांकि, ये इकलौता अनुभव नहीं रहा जो काम आया.

उन्होंने कहा, ‘हमारी तैयारी सिर्फ़ निपाह के अनुभव की वजह से बेहतर नहीं थी. मैं इस वायरस से जुड़ी जानकारी पाने को तत्पर थी. मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि ये कोरोना फ़ैमिली का वायरस है, लोगों से लोगों में फ़ैलता है और सार्स-मर्स के जैसा है. दोनों की काफ़ी ख़तरनाक थे. केरल को वायरसों की वजह से काफ़ी जानें गंवानी पड़ी हैं. हम तैयार थे.’

महाराष्ट्र की मदद और धारावी को लेकर केरल का सुझाव

केरल की सफ़लता को देखते हुए कोरोना से देश में सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र ने इनसे मदद मांगते हुए एक चिट्ठी लिखी है. इस पर शैलजा का कहना है कि उनके ख़ुद के लोग यहां वापस आ रहे हैं, जिससे मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में राज्य ने महाराष्ट्र की मदद करने का उनके यहां अपने डॉक्टरों को भेजने को लेकर अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चेन ब्रेक करने का जो तरीका केरल में इस्तेमाल किया गया है, वो हॉट-स्पॉट बने धारावी की झुग्गियों में सफ़ल नहीं होगा. उन्होंने कहा, ‘1957 में हमने ‘लैंड रिफॉर्म’ किया जिससे ग़रीबों को ज़मीन मिली और सरकारी मदद से आज उनके पास अपने घर हैं और केरल में झुग्गियां नहीं हैं.’

महाराष्ट्र के सीएम को शैलजा की सलाह है कि धारावी में किसी को अंदर-बाहर मत करने दिया जाए. हालांकि, इसके लिए वहां के लोगों की मदद करनी होगी. केरल ने भी जिन इलाकों को बंद किया वहां सभी ज़रूरी चीज़ें मुहैया कराईं.

केरल में कोरोना के लिए दवा और इलाज

राज्य ने प्लाज़मा थेरेपी के सही नतीजे नहीं मिलने पर इसे रोक दिया. वहीं हाइड्रोऑक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) का भी सीमित इस्तेमाल हो रहा है. शैलजा का कहना है कि अगर स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर पीपीई दिया जाए तो उन्हें एचसीक्यू की दरकार नहीं होगी.

इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि राज्य में सीमित स्तर पर आयुष की दवाओं का भी इस्तेमाल हो रहा है. इम्युनिटी के लिए उम्रदराज़ लोगों को आयुर्वेद की दवाएं दी जा रही हैं. सीएम ने आयुष के डॉक्टरों से एक मीटिंग की थी जिसमें दवाओं की एक लिस्ट तैयार की गई. इसके अलावा यूनानी और सिद्ध दवाओं का भी बेहद सीमित इस्तेमाल हो रहा है.

यहां गंभीर मरीज़ों को रेमेडिसविर दिया जा रहा है. एक एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ पर उसकी अनुमति से एंटी रेट्रोवायरल का भी इस्तेमाल किया गया जो सफ़ल रहा. इसी के साथ हर मरीज़ के इलाज के लिए दवा तय करने के लिए हर कोरोना हॉस्पिटल में एक कोरोना बोर्ड का भी गठन किया गया है.

लॉकडाउन और टेस्ट से जुड़ी रणनीति

कोरोना से लड़ने के लिए लॉकडाउन के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा, ‘हमें मध्यम मार्ग अपनाना पड़ेगा. वायरस का ऐसा कहर पहली बार नहीं बरपा. 1918 में स्पैनिश फ्लू आया था. उसने भी काफ़ी तबाही मचाई थी.’ उनके मुताबिक लॉकडाउन का पहला चरण ज़रूरी था. लेकिन ये लंबे समय तक नहीं रह सकता.

शैलजा का मानना है कि वायरस के साथ रहना सीखना होगा. लेकिन साथ ही इसे कंट्रोल करना भी सीखना होगा. कॉन्टेनमेंट ज़ोन में ठीक से पाबंदियां लागू करनी होंगी और वैज्ञानिक तरीके से टेस्टिंग करनी होगी. कम टेस्ट करने को लेकर हो रही राज्य की आलोचना पर उन्होंने कहा कि टेस्ट को बढ़ाने एक अच्छा रास्ता है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं.

उन्होंने कहा, ‘कई देशों ने शुरू में ही अपने सारे टेस्ट किट ख़त्म कर लिया और जब असली मौक़ा आया, तो उनके पास किट ही नहीं थे. हमने समझदारी से टेस्ट किट इस्तेमाल किया. अगर हमारे पास टेस्ट किट ख़त्म हो जाएंगे तो हम क्या करेंगे.’

उनके मुताबिक टेस्टिंग एक चीज़ है. चेन तोड़ना ज़्यादा ज़रूरी है, जिसके लिए ट्रेस और आइसोलेट करना होता है. उनका दावा है इस मामले में केरल बेहतर कर रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि फेटेलिटी रेट यानी मृत्यु दर और आर-नॉट सफ़लता और असफ़लता के असली पैमाने हैं और केरल के मामले में आर-नॉट 1 से नीचे है.

उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में स्वास्थयकर्मियों की पूल टेस्टिंग की जा रही है. 10-20 लोगों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता है. स्वास्थ्य मंत्री का दावा है कि ज़्यादातर पूल टेस्ट निगेेटिव आ रहे हैं. वहीं राज्य में सरकारी क्वारेंटीन की जगह होम क्वारेंटीन पर ज़ोर दिया जा रहा हैै.

आरोग्य सेतू, मानसून का डर और आगे की उम्मीद

उन्होंने जानकारी दी कि केरल में भी आरोग्य सेतू का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, राज्य ने इसे अपने सॉफ़्टवेयर से जोड़ा है. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में जीपीएस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि मरीज़ की निजता का ध्यान रखते हुए फ्लो चार्ट में उसके नाम की वजह एक नंबर का इस्तेमाल किया जाता है.

राज्य को मानसून में अन्य बीमारियों के ख़तरे का डर है. हालांकि, शैलजा का दावा है कि पिछले दो साल से राज्य मानसून में बेहतर कर रहा है. इसके लिए सिर्फ़ मानसून के दौरान नहीं बल्कि पूरे साल इससे जुड़े कैंपने चलते हैं. इससे निपटने किए हर ज़िले में कोरोना और अन्य बीमारियों की निगरानी दो लोगों को तैनात किया गया है.

नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने काफ़ी चीज़ें की हैं. पीएम मोदी ने दो वीडियो कॉन्फ्रेंस कीं. इंंडियन कॉउसिंल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी रास्ता दिखाया. हालांकि, केंद्र और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उनका अनुरोध है कि राज्य को और ज़्यादा वित्तिय सहायता दी जाए.

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