Friday, 27 May, 2022
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ऑक्सीजन की कमी से हुईं चामराजनगर अस्पताल में 36 मौतें, DC व अस्पताल लापरवाह: रिपोर्ट

कर्नाटक HC द्वारा नियुक्त पैनल का कहना है, कि 2 मई तक अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई, ‘पूरी तरह ख़त्म हो गई थी’- जिस दिन 36 में से 24 मौतें हुईं. रिपोर्ट पिछले हफ्ते HC में पेश की गई.

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बेंगलुरू: कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त एक कमेटी, इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि चामराजनगर के एक कोविड अस्पताल में 36 मौतें- जिनमें 24 मौतें 2 मई को हुईं- डॉक्टरों और ज़िले के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) एमआर रवि की लापरवाही की वजह से हुईं.

24 मरीज़ों की मौत ने, जिनमें 12 कोविड-19 पॉज़िटिव थे, कर्नाटक में एक कोलाहल मच गया था, चूंकि परिजनों ने आरोप लगाया था, कि मौतें ऑक्सीजन न होने की वजह से हुईं थीं. राज्य की बीजेपी सरकार ने उस समय आरोपों का खंडन किया था.

लेकिन जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने कहा है, कि चामराजनगर कोविड-19 अस्पताल में सिर्फ 24 ही नहीं, बल्कि 12 अन्य मरीज़ों की मौत भी, ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई थी.

कमेटी ने 13 मई को 39 पन्नों की अपनी रिपोर्ट, कर्नाटक हाईकोर्ट को सौंप दी थी, जिसकी एक कॉपी दिप्रिंट के हाथ लगी है.

कोर्ट में 20 मई को मामले की सुनवाई होनी है, जब वो इस बात का जायज़ा लेगा, कि मौतों के बाद राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की है.

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‘चामराजनगर DC अपने कर्त्तव्यों में विफल रहे’

अपनी रिपोर्ट में, चार सदस्यीय पैनल ने कहा है कि बेंगलुरू से 180 किलोमीटर, और मैसूरू से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, चामराजनगर के अस्पताल में, 30 अप्रैल की शाम तक तरल ऑक्सीजन की सप्लाई, पूरी तरह ख़त्म हो गई थी.

अस्पताल अधिकारियों ने एक निजी कंपनी प्रेक्सेयर से, टैंक को भरने का अनुरोध किया, जिसे 1 मई को भरा गया.

रिपोर्ट के अनुसार, 1 मई को 117 कोविड-19 मरीज़, और 46 ग़ैर-कोविड मरीज़ ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. उस दिन ऑक्सीजन का कुल इस्तेमाल 28,84,000 लीटर था.

2 मई तक, अस्पताल ने 31,00,000 लीटर ऑक्सीजन का उपयोग कर लिया, लेकिन उसकी सप्लाई ‘पूरी तरह ख़त्म हो गई थी’.

रिपोर्ट के अनुसार, चामराजनगर डीसी एमआर रवि ने 2 मई के दिन, निजी ऑक्सीजन सप्लायर्स के साथ एक मीटिंग बुलाई थी, लेकिन ‘मैसूरू की जिन एजेंसियों के साथ एमओयू पर दस्तख़त किए गए थे, उनमें से किसी को अस्पताल में ऑक्सीजन स्टॉक में कमी की, भनक तक नहीं थी’.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी के नतीजे में, 36 मरीज़ों की मौत हो गई.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अस्पताल अधिकारियों ने 4 मई 2021 को सुबह 6.15 बजे तक, और 10 मई 2021 को, 62 मरीज़ों की मौतों का ऐलान किया था’. रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘उनमें से कम से कम 36 मरीज़ ऐसे थे, जो 2 मई 2021 को भर्ती थे. इन 36 भर्ती मरीज़ों की मौत का कारण, 2 मई की रात और 3 मई की सुबह सवेरे, ऑक्सीजन की अनुपलब्धता को ठहराया जा सकता है’.


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चामराजनगर डीसी को त्रासदि के लिए ज़िम्मेवार ठहराते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने ‘उस गतिशीलता और नेतृत्व का मुज़ाहिरा नहीं किया, जिसकी एक गंभीर संकट की स्थिति में, ज़िले के प्रमुख से अपेक्षा की जाती है’.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘आपदा प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष होने के नाते, वो ऑक्सीजन सप्लाई की कमी से उत्पन्न आपात स्थिति में, मार्गदर्शन और निगरानी का मुज़ाहिरा करने में, बुरी तरह विफल रहे’.

दिप्रिंट ने चामराजनगर डीसी एमआर रवि से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया.

लेकिन रिपोर्ट ने, मैसूरू डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिंधूरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ख़ारिज कर दिया, और कहा कि उन्होंने अस्पताल के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर्स भरवाने में, कोई बाधा खड़ी नहीं की.

‘CCTV में दिखा कि नाज़ुक समय में ग़ायब थे नर्सें और डॉक्टर्स’

रिपोर्ट में ये भी आरोप लगाया गया, कि त्रासदि से पहले के नाज़ुक समय में, डॉक्टरों तथा नर्सों का रवैया लापरवाही भरा था.

कमेटी ने दावा किया है, कि अस्पताल की ओर से मुहैया कराई गई, सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा था, कि जब मरीज़ अपने बिस्तरों पर लेटे थे, तब वॉर्ड्स में किसी नर्स या ड्यूटी डॉक्टर की कोई गतिविधि नहीं दिख रही थी, और ‘2 मई तथा 3 मई के बीच की रात जब ये विपत्ति आई, तो कोई संकेत नहीं था कि उनका पल्स, बीपी, या कोई दूसरा कोई न्यूनतम यूनिट सामयिक चेक अप हो रहा था’.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया, ‘फुटेज में सिर्फ पीपीई सूट पहने कुछ वॉर्ड अटेंडेंट्स को, हरकत करते देखा जा सकता है, और शायद कुछ शवों को वॉर्ड्स से स्ट्रेचर पर रखते देखा जा सकता है’. रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘इससे हमें ये आभास होता है कि चिकित्सा कर्मियों ने भर्ती मरीज़ों को, कमोबेश वॉर्ड ब्वॉयज़ और अटेंडेंट्स के रहमो करम पर छोड़ दिया था’.

कमेटी ने ये भी कहा है कि 2 मई को ज़िला सर्जन इंचार्ज, रात 8.30 बजे घर चले गए थे. इससे साबित होता है कि डॉक्टर्स मरीज़ों के पास नहीं गए, और उनका व्यवहार बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं था’.

पैनल ने ज़िला अस्पताल के अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया, जिनपर उन्होंने मरीज़ों का नाममात्र का ब्योरा दर्ज करने का आरोप लगाया, जिसके नतीजे में ‘क्लीनिकल केयर के रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं हैं’.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लगता है सारी प्रविष्टियां एक ही बार में की गई हैं. कुछ केस शीट्स में तो मौत के समय और तिथि को लेकर भी, ख़ाली जगह छोड़ी हुई है. कई सारे छपे हुए फॉर्म्स ख़ाली थे, यहां तक कि मरीज़ों का विवरण तक नहीं था, और सिर्फ चिकित्सा अधिकारी के दस्तख़त किए हुए थे. डॉक्टरों और नर्सों दोनों की ओर से, मरीज़ों की केस शीट्स का रख-रखाव, अधूरा और असंतोषजनक है’.

कमेटी ने ये भी पाया कि ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर, रजिस्टरों में हेराफेरी और छेड़छाड़ की गई है.

अपनी रिपोर्ट में, पैनल ने 12 सिफारिशें भी की हैं, जिनमें ऑक्सीजन के आवंटन और उपभोग की निगरानी के लिए, डीसी के अलावा किसी और अधिकारी की नियुक्ति, सभी अस्पतालों में कम से कम 24 घंटे का बफर स्टॉक, सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन उपभोग, स्टॉक, और प्राप्तियों के बाक़ायदा रिकॉर्ड्स, और ऑक्सीजन बैलेंस का डिजिटल डिसप्ले शामिल हैं.

कमेटी ने ज़ोर देकर कहा कि ऑक्सीजन ढो रहे सभी ट्रकों में जीपीएस फिट किए जाएं, और मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा दिया जाए.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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