scorecardresearch
Sunday, 12 April, 2026
होमदेश‘मेरे पिता 10 साल की उम्र से मारते रहे हैं’: अशोका यूनिवर्सिटी के ‘लापता लड़की’ मामले का दूसरा पहलू

‘मेरे पिता 10 साल की उम्र से मारते रहे हैं’: अशोका यूनिवर्सिटी के ‘लापता लड़की’ मामले का दूसरा पहलू

पूर्व छात्रा का कहना है कि वह घर में सालों के ‘उत्पीड़न’ से भागी हैं. उनके माता-पिता का कहना है कि एक फैकल्टी सदस्य ने उनका ‘ब्रेनवॉश’ किया है. हरियाणा महिला आयोग ने सीबीआई जांच की मांग की है.

Text Size:

गुरुग्राम: क्या यह एक लापता व्यक्ति का मामला है या एक युवा महिला का खुद अपनी मर्ज़ी से घर छोड़ना? अशोका यूनिवर्सिटी की एक पूर्व छात्रा की कहानी के दो अलग-अलग पहलू सामने आते हैं: एक में “सेक्स-चेंज रैकेट” के जरिए ब्रेनवॉश और शोषण की बात है और दूसरे में भागकर अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने की.

उनके माता-पिता, जो खुद भी अकादमिक हैं, पिछले ढाई साल से उनसे नहीं मिले हैं. उनका कहना है कि वह लापता है. वे चाहते हैं कि आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी और एनआईए यूनिवर्सिटी और उसके कुछ स्टाफ की जांच करे.

अशोका यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह महिला मई 2023 में यूनिवर्सिटी की छात्रा नहीं रही और इस मामले में फैकल्टी और स्टाफ का कोई संबंध नहीं है.

इस बीच, माता-पिता अपनी शिकायत लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग के सामने पेश हुए. उन्होंने एक प्रोफेसर, एक शोधकर्ता, एक छात्र कार्यकर्ता और उनके शब्दों में, लोगों की एक “चेन” का नाम लिया, जिन्हें वे “सेक्स-चेंज रैकेट” में शामिल बताते हैं.

लेकिन इस मामले में कुछ दस्तावेज़ ऐसे भी हैं, जो बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं—खुद बेटी के शब्दों में.

जिस रात वह गई

24 अक्टूबर 2023 को, वह हरियाणा के रोहतक में अपने घर से चली गईं. वे 22 साल की थीं. अशोका यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट. लड़की के अनुसार, वह काफी समय से इसकी योजना बना रही थी.

सोनीपत के कुंडली थाने के एसएचओ को दिए गए लिखित बयान में, जो उन्होंने उसी दिन और उसके बाद के दिनों में पुलिस को कई पत्रों में लिखा—उन्होंने बताया कि उसने ऐसा क्यों किया.

महिला ने लिखा, “मैं 24 अक्टूबर 2023 को अपने जन्म वाले घर से चली गई क्योंकि मेरे माता-पिता द्वारा कई सालों से शारीरिक और भावनात्मक उत्पीड़न हो रहा था. मेरे पिता मुझे 10 साल की उम्र से शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते रहे हैं.”

महिला ने जाने से कुछ दिन पहले की एक घटना भी बताई: उनके पिता रात 3 बजे जब वह सो रही थी, जबरदस्ती कमरे में घुसे, उन पर चिल्लाने लगे, अपनी सेहत की समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराया और उन्हें मारने की धमकी दी. उन्होंने यह भी लिखा कि उनके पिता ने उनका फोन, लैपटॉप, दरवाजा और खिड़कियां तोड़ने की धमकी दी थी.

उन्होंने कहा, “मैं इस हिंसा से बचने के लिए गई.”

जिस दिन वह रोहतक से गईं, उसी दिन उन्होंने रोहतक पुलिस को ईमेल भेजा. उन्होंने कुंडली थाने को एक पत्र लिखकर वहां से स्टैंप कराया और रोहतक पुलिस को एक हस्तलिखित पत्र भी भेजा—इन सब में उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्जी से जा रही हैं और एक बालिग होने के नाते अपनी पसंद की जगह पर रहने का संवैधानिक अधिकार इस्तेमाल कर रही हैं.

उन्होंने अनुरोध किया कि उनका पता उनके माता-पिता से गोपनीय रखा जाए.

चार दिन बाद, 28 अक्टूबर 2023 को, उन्होंने रोहतक में मजिस्ट्रेट के सामने CrPC की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया.

दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) से बदल दिया गया है, के तहत धारा 164 का बयान मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया गया औपचारिक बयान या स्वीकारोक्ति होता है, न कि पुलिस अधिकारी द्वारा.

इसके बावजूद, उन्होंने अपनी शिकायतों में लिखा कि रोहतक पुलिस उनके दोस्तों को बार-बार कॉल कर रही थीं. उनके अनुसार, उनके पिता अभी भी उन्हें और उनके दोस्तों को परेशान करने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें अपनी जान और आज़ादी का खतरा महसूस हुआ और उन्होंने पुलिस सुरक्षा मांगी.

यह शिकायत 28 अक्टूबर 2023 को कुंडली पुलिस स्टेशन के SHO के पास दर्ज की गई. एक और शिकायत 6 नवंबर को एक अन्य थाने में दर्ज की गई, जिसका नाम दिप्रिंट को नहीं बताया गया, ताकि उनके रहने की जगह छिपी रहे.

माता-पिता ने क्या कहा

माता-पिता, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से सामने आने का फैसला किया है, एक बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि उनकी बेटी एक शार्प स्टूडेंट थीं, जिसने एक प्रतिष्ठित स्कूल से बाहरवीं क्लास में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. उसे 2019 में अशोका यूनिवर्सिटी में तीन साल के BA (लिबरल आर्ट्स) प्रोग्राम में दाखिला मिला था.

उनका कहना है कि 24 अक्टूबर 2023 को वह घर से गायब मिली और उन्होंने उसी दिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.

उनका दावा है कि कॉल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने उसकी लोकेशन एक यूनिवर्सिटी स्टाफ के घर तक ट्रेस की, लेकिन जब तक पुलिस वहां पहुंची, उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्टाफ को पहले ही सूचना दे दी थी और वह वहां से जा चुकी थी.

चार दिन बाद, जब बेटी कोर्ट में पेश हुई, तो माता-पिता के अनुसार, उसके साथ दो महिलाएं थीं जो अशोका यूनिवर्सिटी से “जुड़ी” थीं और जो अशोका यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ बिट्टू कावेरी राजारामन की लैब में काम करती हैं.

माता-पिता ने कहा कि उन्हें इस कोर्ट पेशी के बारे में बाद में पता चला.

उन्होंने यह भी कहा कि बाद में उन्हें घर में अशोका यूनिवर्सिटी द्वारा जारी एक सर्टिफिकेट मिला, जिसमें उनकी बेटी का नाम कुछ और था—जो उनके अनुसार हिंदू नाम नहीं था.

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि उनकी बेटी के खाते से एक अन्य छात्र के खाते में पैसे ट्रांसफर हुए, जो उनके आरोप के अनुसार जेंडर ट्रांजिशन प्रक्रियाओं के लिए फंड इकट्ठा करता है.

प्रेस नोट में कहा गया, “हमें डर है कि अशोका यूनिवर्सिटी में हमारी बेटी का शोषण फैकल्टी द्वारा, जिसका नेतृत्व डॉ बि्टटू कावेरी राजारमन कर रहे हैं, किया गया.”

माता-पिता ने एनआईए से अशोका यूनिवर्सिटी, डॉ बिट्टू कावेरी राजारमन और कई अन्य लोगों, जिनमें छात्र, शोधकर्ता, कार्यकर्ता और वकील शामिल हैं—की जांच की मांग की है. उनका दावा है कि ये लोग मिलकर “युवाओं के शारीरिक और मानसिक शोषण” के एक नेटवर्क का हिस्सा हैं.

कौन है डॉ. बिट्टू कावेरी राजारामन

माता-पिता के आरोपों के केंद्र में डॉ बिट्टू कावेरी राजारामन हैं, जो अशोका यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी और साइकोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर हैं. डॉ. राजारामन एक ट्रांसजेंडर अकादमिक और एक्टिविस्ट हैं, जो अकादमिक और LGBTQ+ समुदाय में काफी जानी जाती हैं.

प्रो. बिट्टू कावेरी के बारे में ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे एक जेंडरक्वियर ट्रांस मैन हैं और मानते हैं कि क्वीयर और ट्रांस लोगों की आज़ादी के लिए जाति, वर्ग, एबलिज़्म और जेंडर जैसी संरचनाओं का खत्म होना ज़रूरी है.

माता-पिता का आरोप है कि जिन दो लोगों ने उनकी बेटी को कोर्ट तक पहुंचाया, वे डॉ. राजारामन की लैब में काम करते थे. उनका यह भी कहना है कि एक यूनिवर्सिटी इवेंट में डॉ. राजारामन ने उनकी बेटी को उसी नाम से बुलाया था, जो उन्हें घर में मिले सर्टिफिकेट पर लिखा मिला और उनका दावा है कि इसका वीडियो यूट्यूब पर मौजूद है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. राजारामन ने कभी कहा था कि जब वे अशोका यूनिवर्सिटी में आईं, तब वहां केवल एक ही ट्रांसजेंडर व्यक्ति था, लेकिन अब ऐसे 80 से ज्यादा छात्र हैं. माता-पिता इसे “युवाओं को प्रभावित करने” का सबूत मानते हैं.

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक, न तो डॉ बिट्टू कावेरी राजारमन और न ही माता-पिता द्वारा नामित अन्य लोगों ने इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है.

दिप्रिंट ने डॉ. राजारामन से ईमेल और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या पाया

जब माता-पिता हरियाणा महिला आयोग में शिकायत कर रहे थे, उसी दौरान उनकी बेटी पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुकी थी.

27 मई 2024 के आदेश में, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता (बेटी) खुद कोर्ट में पेश हुई और अपने वकील की मौजूदगी में अदालत से बातचीत की.

उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह बालिग है, लगभग 22 साल की हैं और अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हैं. उन्होंने साफ कहा कि वह अपने परिवार, जिसमें माता-पिता और दादा शामिल हैं—से कोई संपर्क नहीं रखना चाहती.

महत्वपूर्ण बात यह रही कि कोर्ट ने अलग से माता-पिता और दादा से भी बात की, जिन्होंने अदालत में कहा कि वे उनकी इच्छा के खिलाफ उनसे संपर्क करने या उनकी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं रखते.

11 जुलाई 2024 के एक और आदेश में, जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने दर्ज किया कि बेटी को नवंबर 2023 से ही पुलिस सुरक्षा दी जा चुकी है और वह अब किराए के मकान में रह रही है.

याचिका को खत्म करते हुए उसे यह छूट दी गई कि अगर वह कहीं और शिफ्ट होती है और फिर से कोई खतरा महसूस करती है, तो वह दोबारा कोर्ट आ सकती है.

दूसरे शब्दों में, कोर्ट ने उसकी बात सुनी, उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और उसे कानूनी सुरक्षा दी—एक बार नहीं, बल्कि कई सुनवाई में.

महिला आयोग की सुनवाई

इस बीच मामला हरियाणा राज्य महिला आयोग तक पहुंचा, जहां इस हफ्ते की शुरुआत में यह अचानक नया मोड़ ले गया.

अशोका यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पैनल के सामने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया.

महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने पत्रकारों से कहा कि आयोग राज्य सरकार को इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करेगा.

उन्होंने कहा, “यह एक संवेदनशील मामला है. यह हमारी बेटियों के भविष्य से जुड़ा है.”

अशोका यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा, “आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, छात्रा ने अगस्त 2019 से मई 2023 तक यहां पढ़ाई की. वह अक्टूबर 2023 में घर छोड़कर स्वतंत्र रूप से रहने लगी. उसने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और कोर्ट ने उसे अपनी पसंद की जगह पर रहने की अनुमति दी.

प्रवक्ता ने कहा, “मई 2023 के बाद वह हमारी छात्रा नहीं रही और हमें उसके वर्तमान ठिकाने की जानकारी नहीं है. इस मामले में यूनिवर्सिटी, फैकल्टी और स्टाफ का कोई संबंध नहीं है.”

लेकिन आयोग की चेयरपर्सन को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि एक वकील अचानक सामने आया, जिसने खुद को बेटी का प्रतिनिधि बताया, जबकि आयोग ने उसे कोई समन जारी नहीं किया था.

भाटिया ने कहा, “हमें उसका पता तक नहीं पता. ढाई साल से जो लड़की ट्रेस नहीं हो रही, उसके लिए एक वकील अचानक सामने आ गया—यह वकील कहां से आया?”

रिपोर्ट के मुताबिक, वकील ने कहा कि उसकी क्लाइंट वीडियो कॉल के जरिए पेश होने को तैयार है. उसे मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं आई.

आयोग ने यह भी कहा है कि वह यह जांच करेगा कि कितने छात्रों ने विश्वविद्यालय छोड़ा और कितनों ने जेंडर ट्रांजिशन कराया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments