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Wednesday, 7 January, 2026
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जींद–सोनीपत रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन तैयार, पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन

रेलवे अधिकारी ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन के ‘ऑस्सिलेशन कोच’ ज़ींद पहुंच चुके हैं और उनमें कुछ ज़रूरी इंस्टॉलेशन लगाए जा रहे हैं.

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गुरुग्राम: ग्रीन रेलवे तकनीक की दिशा में भारत की बड़ी पहल अब जल्द हकीकत बनने वाली है. हरियाणा के जींद रेलवे जंक्शन पर ट्रायल रन के लिए देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के कोच पहुंच गए हैं. यह स्वदेशी ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में कर सकते हैं. यह जानकारी हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर और जिंद विधानसभा सीट से विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने सोमवार को द प्रिंट को दी.

इस परियोजना का केंद्र जींद रेलवे जंक्शन पर बना 120 करोड़ रुपये का हाइड्रोजन गैस प्लांट है, जो 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है. यहां फिलहाल परीक्षण चल रहा है. यह प्लांट इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन बनाएगा, जिससे यह ट्रेन चलेगी. भारतीय रेलवे इसे ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन बता रहा है.

10 कोच की इस ट्रेन में दो ड्राइविंग पावर कार हैं, जिनकी क्षमता 1,200-1,200 किलोवाट है. यानी कुल 2,400 किलोवाट. इसके अलावा आठ यात्री कोच हैं.

इस ट्रेन के इंजन से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप और स्टीम निकलेगी. इससे CO2 का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होगा.

जींद जंक्शन पर नॉर्दर्न रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन पर दिप्रिंट को बताया कि फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के “ऑस्सिलेशन कोच” जिंद पहुंच चुके हैं और उनमें कुछ जरूरी इंस्टॉलेशन लगाए जा रहे हैं.

इंस्टॉलेशन का काम पूरा होने के बाद ट्रायल रन किया जाएगा.

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल 10 दिसंबर को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि इस ट्रेन को “भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दिखाता है.”

यह ट्रेन जींद-सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर का सफर 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तय करेगी.

एक किलोग्राम हाइड्रोजन से लगभग 4.5 लीटर डीजल जितनी माइलेज मिलेगी, जिससे रखरखाव की लागत कम होगी. पूरे 180 किलोमीटर की यात्रा के लिए 360 किलोग्राम हाइड्रोजन की ज़रूरत होगी.

रेलवे अधिकारी ने बताया कि प्लांट में लगभग 3,000 किलोग्राम गैस रखने की क्षमता वाला एक अंडरग्राउंड स्टोरेज बनाया गया है. इस प्रक्रिया के लिए हर घंटे 40,000 लीटर पानी की ज़रूरत होगी, जिसके लिए स्टेशन की छतों से बारिश का पानी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा.

इस ट्रेन में हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शामिल हैं, जैसे लिथियम-आयन बैटरी या सुपरकैपेसिटर.

एक नियंत्रित प्रक्रिया में हाइड्रोजन, ऑक्सीजन की मदद से फ्यूल सेल के अंदर जलता है और बिजली बनाता है. यह बिजली बैटरियों को चार्ज करती है, जिससे ट्रेन चलती है. इसके उप-उत्पाद सिर्फ भाप और पानी होते हैं. कम शोर की वजह से यात्रियों को ज्यादा आरामदायक सफर मिलेगा, वहीं फ्यूल सेल का रखरखाव पारंपरिक सिस्टम की तुलना में सस्ता रहने की उम्मीद है.

डॉ. मिड्ढा ने दिप्रिंट को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी हाइड्रोजन ट्रेन के साथ-साथ जींद रेलवे जंक्शन का भी उद्घाटन करेंगे, हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है. शुरुआत में यह सेवा जींद और सोनीपत के बीच चलेगी, जिसे बाद में आगे बढ़ाया जाएगा.

यह परियोजना रिसर्च, डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार पायलट आधार पर विकसित की गई है. इसमें पहले चरण का डिजाइन, प्रोटोटाइप निर्माण और भारतीय रेलवे द्वारा हाइड्रोजन ट्रैक्शन तकनीक का पहला विकास शामिल है.

लोकसभा में अपने जवाब में वैष्णव ने कहा कि इस पायलट चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम से सीधे लागत की तुलना करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेन-सेट और इसका ढांचा पायलट आधार पर विकसित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह परियोजना “वैकल्पिक ऊर्जा से चलने वाली ट्रेन यात्रा में प्रगति के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दिखाती है और देश के परिवहन क्षेत्र के लिए एक साफ और हरित भविष्य सुनिश्चित करती है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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