Wednesday, 25 May, 2022
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मंगल, चंद्रमा और आकाश पर नजर रखने वाले टेलीस्कोप- 2021 के लिए बड़े अंतरिक्ष मिशन की पूरी तैयारी है

अन्य बातों के अलावा यह साल तेजी से बढ़ रहे अंतरिक्ष उद्योग की प्रगति की एक झलक भी दिखाएगा जिसमें कई नए रॉकेट अपनी पहली उड़ान भरने वाले हैं.

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बेंगलुरु: 2020 में कोविड महामारी के पूरी तरह हावी होने के बावजूद तमाम खगोलीय और अंतरिक्ष मिशन कुछ झटकों और थोड़ी-बहुत देरी के साथ लगातार चलते ही रहे. यह साल शुक्र ग्रह से लेकर चंद्रमा तक, रहस्यमय रेडियो सिग्नलों से लेकर आकाशगंगा में आतिशबाजी तक और एक डूबते तारे के साथ तमाम खगोलीय घटनाओं का गवाह बना.

नया साल निश्चित तौर पर इसी तरह रोमांचक होने के वादे के साथ सामने खड़ा है जिसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा पर उतरने के दूसरे प्रयास की उम्मीदें लगाए है और वहीं नासा का लक्ष्य ब्रह्मांड को उन गहराइयों तक समझने के लिए भविष्य के मानव मिशन की नींव रखना है जहां तक पृथ्वी से अभी कोई नहीं पहुंच पाया है.

नए साल में निजी अंतरिक्ष उद्योग की प्रगति की भी एक झलक मिलेगी, जिसमें कई नए रॉकेट अपनी पहली उड़ान भरने वाले हैं.

मंगल ग्रह

नया वर्ष शुरू होने के साथ सबसे पहले और जल्द ही सुर्खियों में आने की बारी मंगल ग्रह की है, क्योंकि लाल ग्रह के लिए एक-दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग मिशन शुरू हो चुके हैं.

जुलाई में नासा ने अपने मार्स 2020 मिशन, जिसमें पर्सीवेरेंस रोवर और इनजेन्यूटी हेलीकॉप्टर शामिल है, के तहत अपना उपग्रह रवाना किया था. ग्रह पर जीवन की संभावनाएं तलाशने और यह पता लगाने के लिए क्या वहां पहले जीवन था, भेजा गया उपग्रह 18 फरवरी को मंगल की सतह पर उतरेगा.

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इसी महीने चीन का तियानवेन-1 (जिसका मतलब होता है अंतरिक्ष के सच की खोज) रोवर मंगल ग्रह की सतह पर 23 अप्रैल (संभावित) को उतरने का प्रयास करने से पहले मंगल की कक्षा में प्रवेश करेगा. यह मंगल ग्रह पर चीन का पहला मिशन है और इसका उद्देश्य ग्रह की भूगर्भीय संरचना, मिट्टी और पानी के बारे में अध्ययन करना है.

2020 में मंगल के लिए शुरू हुआ तीसरा मिशन संयुक्त अरब अमीरात का होप मिशन था. यह भी जुलाई में ही लॉन्च किया गया था. इसके 9 फरवरी को मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने और कुछ समय वहीं रहने की उम्मीद है. मंगल पर यूएई का यह पहला मिशन है और इसके उद्देश्यों में वहां के वातावरण और जलवायु का अध्ययन करना शामिल है.


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चंद्रमा

जुलाई 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के दौरान विक्रम लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भारत एक बार फिर चांद पर कदम रखने की कोशिश में चंद्रयान-3 मिशन शुरू कर सकता है.

वर्ष की पहली तिमाही में नासा अपना कैप्सटन (सिसलूनर ऑटोनॉमस पोजीशनिंग सिस्टम टेक्नोलॉजी ऑपरेशन एंड नेवीगेशन एक्सपेरिमेंट) मिशन को लॉन्च करेगा. कैप्सटन एक ऑर्बिटर है जो लूनर गेटवे कही जाने वाली चंद्रमा की कक्षा में प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन के लिए कक्षीय स्थिरता का परीक्षण और पुष्टि करेगा.

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मॉस चंद्रमा पर प्राकृतिक संसाधनों का पता लगाने के लिए अपना लूना 25 लैंडर मिशन अक्टूबर में लॉन्च करेगी.

चंद्रमा के लिए 2021 में निजी खिलाड़ियों की तरफ से कुछ बड़े प्रक्षेपण करने की उम्मीद है.

जर्मनी की पीटीसाइंटिस्ट एरियन 6 रॉकेट (जिसे यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने एयरबस-सफरान के संयुक्त उपक्रम एरियन ग्रुप समेत करीब 600 कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया है) के जरिये रोबोटिक लैंडर एलिना को लॉन्च करने की तैयारी में है, जबकि अमेरिका की इंट्यूटिव मशीन्स एलन मस्क की स्पेस एक्स के एक फाल्कन 9 रॉकेट से नोवा-सी लूनर लैंडर को लॉंन्च करेगी. एक अन्य अमेरिकी कंपनी रॉकेट लैब भी ऑर्बिटल टेक्नोलॉजी के प्रदर्शन के लिए अपना फोटॉन मिशन शुरू करेगी.

अमेरिका की ही एक अन्य निजी खिलाड़ी एस्ट्रोबायोटिक टेक्नोलॉजी अपना मिशन वन जुलाई में लॉन्च करेगी, जिसमें पेरेग्रिन लैंडर और सात रोवर एंडी (अमेरिका), आइरिस (अमेरिका), स्पेसबिट मिशन वन (ब्रिटेन), यूनिटी (चिली), याओकी (जापान), कोलमेनला (मैक्सिको), और टीम पुली (हंगरी) होंगे.

नई दूरबीन

दशकों लंबी योजना के बाद तैयार दुनिया की सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को साल के अंत में फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किए जाने के आसार हैं. यह इन्फ्रेरेड दूरबीन अंततः पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रही हब्बल स्पेस टेलीस्कोप की जगह लेगी जिसके 2030 या 2040 के दशक में नष्ट होकर धरती के वातावरण में गिरने की संभावना है.

6.5 मीटर की यह दूरबीन हमारे सौर मंडल के ग्रहों के साथ-साथ दूर स्थित आकाशगंगाओं का भी अध्ययन करेगी और ब्रह्मांड के विकास के बारे में मानवीय समझ को और बढ़ाने में मददगार होगी. हालांकि, हब्बल के विपरीत यह पृथ्वी की कक्षा में नहीं होगी. इसके बजाये यह सूर्य-पृथ्वी की कक्षा के एल2 लैग्रेंगियन प्वाइंट पर एक ‘हालो ऑर्बिट’ में होगी जो एक ऐसा स्थान है जहां पृथ्वी और सूर्य दोनों का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र एक तरह के संतुलन की स्थिति में होता है. यह टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में एक खाली बिंदु के चारों ओर चक्कर काटने की अनुमति देता है.

इस साल चिली की धरती पर वेरा सी. रुबिन ऑब्जर्वेटरी का उद्घाटन भी होना है. यह टेलीस्कोप लगातार आकाश का सर्वे या फोटोग्राफ लेना जारी रखेगा जिससे गैलेक्टिक प्लेन (आकाशगंगा को एकदम सटीक तरह विभाजित करने वाली भूमध्य रेखा), डीप स्काई ऑब्जेक्ट, आकाशगंगा के नक्शे के साथ-साथ डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के बारे में भी अध्ययन किया जा सके. यह गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर नजर रखने वाली लीगो वेधशालाओं के प्रतिरूप के तौर पर भी कार्य करेगी.

क्षुद्र ग्रह

नासा को जुलाई में डबल एस्टेरॉयड रिडायरेक्शन टेस्ट (डार्ट) मिशन नामक ‘प्लेनेटरी डिफेंस टेस्ट’ लॉन्च करने की भी उम्मीद है. यह अंतरिक्ष में ही किसी क्षुद्र ग्रह की दिशा को बदलने वाली काइनेटिक इंपैक्टर टेकनीक का पहला प्रदर्शन होगा. इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी से टकराने वाले किसी क्षुद्र ग्रह के खतरे और नुकसान को कम करने के लिए समय रहते उसकी दिशा बदलना है.

इसका लक्ष्य 65803 डिडीमोस नामक एक क्षुद्रग्रह का चंद्रमा है, जो पृथ्वी से लगभग 11 मिलियन किलोमीटर दूर है. 160 मीटर चौड़ा यह चंद्रमा क्षुद्रग्रह के चारों ओर कक्षा की गति को बदलने के उद्देश्य से 6.6 किमी/सेकंड की गति से इंपैक्टर से टकराएगा जो इसकी कक्षीय अवधि को भी बदल देगा.

अक्टूबर में नासा बृहस्पति के ट्रोजन्स की ओर अपना लूसी मिशन लॉन्च करेगा, जो ग्रह की समान कक्षा साझा करने वाले क्षुद्रग्रहों का समूह है. इसमें एक समूह बृहस्पति के सामने और एक अन्य उसके पीछे चक्कर काटता है. आठ विभिन्न क्षुद्रग्रहों का अध्ययन करने के लिए लूसी मिशन 12 साल तक चलता रहेगा.

नासा ने इन क्षुद्रग्रहों को ‘हमारे सौर मंडल के जन्म से 4 अरब साल पहले वाले टाइम कैप्सूल’ बताया है क्योंकि उन्हें ‘बाहरी ग्रहों को बनाने वाली सामग्री का अवशेष माना जाता है.’

नए रॉकेट और मानव अंतरिक्ष यान

इसरो 2021 में पहली बार अपना नया स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) लॉन्च करेगा. स्मॉल लॉन्चर 500 किलोग्राम से कम के पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के लिए बनाया गया है, और यह छोटे सूक्ष्म और नैनो उपग्रहों के प्रक्षेपण के काम आएगा.

नासा अब तक के अपने सबसे जटिल अभियानों में से एक को अंजाम देने में जुटा है, जो इंसानों द्वारा बेहद गहराई से अंतरिक्ष का अध्यन करने की राह खोलेगा. नासा के अनुसार, आर्टेमिस 1 ‘अंतरिक्ष को गहराई से खंगालने की नासा की तमाम प्रणालियों का पहला एकीकृत परीक्षण होगा जिसमें ओरियन अंतरिक्ष यान, स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और केप कैनेवरल, फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर में मौजूद ग्राउंड सिस्टम शामिल है.

चंद्रमा की ओर चालक रहित टेस्ट फ्लाइट के तीन हफ्ते के मिशन को नवंबर में लॉन्च करना तय किया गया है जो ‘अब तक मनुष्यों के लिए किसी भी अंतरिक्ष यान की तुलना में सबसे लंबी उड़ान भरने’ का गवाह बनेगा.

एक सुपर हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल एसएलएस के 2024 में मानव को फिर चंद्रमा पर ले जाने की उम्मीद है. एजेंसी के लिए यह अंतरिक्ष के गहन अध्ययन और ग्रहों के मिशन के साथ-साथ भविष्य के मंगल पर मानव मिशन भेजने के लिए भी प्राथमिक वाहन होगा.

अमेरिका की निजी कंपनी यूनाइटेड लॉन्च अलायंस (यूएलए) इस साल अपने एक हैवी लिफ्ट लॉन्च व्हीकल वल्कन सेंटोर को पहली बार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. जापान की मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज इसी साल देश की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा के साथ विकसित अपने एच3 हैवी लॉन्च व्हीकल को लॉन्च करेगी.


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जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन अपने नए ग्लेन हैवी लिफ्ट लॉन्च वाहन का परीक्षण करने वाली है जो कि पहले चरण में रियूजेबल है, जबकि स्पेसएक्स के स्टारशिप सुपर हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल के और टेस्ट होंगे जिसका ट्रॉयल रन 2020 में हुआ था और जो पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने योग्य है.

स्पेन (रिकवरेबल मिउरा-1), दक्षिण कोरिया (नूरी) और यूक्रेन (साइक्लोन-4 एम) में भी नए रॉकेटों की पहली उड़ान होगी जो इन देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की तरफ से संचालित होगी.

निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बोइंग सीएसटी-100 स्टारलाइनर कैप्सूल की चालक दल के साथ और चालक दल के बिना परीक्षण उड़ान का अंजाम देगी, जो इंसानों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक ले जाने में सक्षम है.

चीन अपने तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम के तहत चीनी अंतरिक्ष स्टेशन (सीएसएस) का निर्माण शुरू करेगा. 2021 में तियानहे कोर मॉड्यूल या मुख्य केबिन और संभावता वेंटियन लैब मॉड्यूल भी लॉन्च करने की योजना भी बनाई गई है.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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