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Monday, 26 January, 2026
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गणतंत्र दिवस परेड में मध्यप्रदेश की झांकी में अहिल्याबाई होल्कर की विरासत और महेश्वर घाट की झलक

झांकी के सबसे पिछले हिस्से में प्रसिद्ध महेश्वर घाट, उसके मंदिर और किले को प्रदर्शित किया गया, जो अहिल्याबाई की राजधानी और उनके प्रशासनिक व धार्मिक उत्तराधिकार का प्रतीक है. प्रवाहित होती नर्मदा नदी और धीरे-धीरे चलती नाव शांति और निरंतरता का संदेश देती नजर आई.

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नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस परेड के दौरान मध्यप्रदेश की झांकी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत और ऐतिहासिक महेश्वर घाट की स्थापत्य धरोहर को भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया.

आधिकारिक परेड पुस्तिका में झांकी के विवरण में कहा गया कि ‘पुण्यश्लोक’ के रूप में प्रतिष्ठित अहिल्याबाई होल्कर देशभक्ति, सद्गुणों और ‘भारतीय मातृ शक्ति’ की चिरस्थायी प्रतीक हैं. राज्य की यह झांकी “लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर — आत्मनिर्भरता, प्रबुद्ध शासन और सांस्कृतिक संरक्षण की कालातीत प्रतीक” को समर्पित थी.

झांकी के अग्रभाग में कमल आसन पर स्थापित अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा दिखाई गई, जिसमें वह शिवलिंग लिए हुए थीं. यह उनकी आध्यात्मिक शक्ति, देशभक्ति और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था. प्रतिमा में गरिमा, दृढ़ संकल्प और उनके शासन को दिशा देने वाली सशक्त नारी शक्ति को दर्शाया गया.

मध्य भाग में अहिल्याबाई को घोड़े पर सवार, सैनिकों और मंत्रियों के साथ दिखाया गया, जो न्यायपूर्ण, सतर्क और उत्तरदायी शासन का प्रतीक था. झांकी के पिछले हिस्से में उनके शासनकाल के दौरान कराए गए व्यापक मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों को दर्शाया गया, जिससे भारत की पवित्र परंपराओं के संरक्षक के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया. एक मराठा प्रहरी की आकृति सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती रही.

झांकी के सबसे पिछले हिस्से में प्रसिद्ध महेश्वर घाट, उसके मंदिर और किले को प्रदर्शित किया गया, जो अहिल्याबाई की राजधानी और उनके प्रशासनिक व धार्मिक उत्तराधिकार का प्रतीक है. प्रवाहित होती नर्मदा नदी और धीरे-धीरे चलती नाव शांति और निरंतरता का संदेश देती नजर आई.

नीचे बने भित्तिचित्रों में अहिल्याबाई के संरक्षण में महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियां बुनती दिखाई गईं, जो महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी शिल्प और विरासत के सम्मान को दर्शाती हैं.

लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ झांकी लय और रंगों से सजी रही.

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