Wednesday, 5 October, 2022
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2024 के लोकसभा चुनावों पर नजर, UP सरकार ने 36,000 करोड़ रुपये लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर काम तेज किया

एक्सप्रेस-वे के लिए जमीनी स्तर पर काम 30 सितंबर तक शुरू के आसार हैं, जिसकी आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिसंबर में रखी थी.

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार अपनी तरफ से हर तरह की मंजूरी के साथ 30 सितंबर तक भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक बीओटी (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) परियोजनाओं में से एक 595 किलोमीटर गंगा एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए तैयार है. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) के अध्यक्ष अवनीश अवस्थी ने दिप्रिंट से बातचीत में यह जानकारी दी.

योगी सरकार 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए 36,000 करोड़ की लागत वाले एक्सप्रेस-वे के काम में तेजी लाने की कोशिश में जुटी है, जो यूपी के मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज आदि जिलों को जोड़ेगा.

अवस्थी, जो राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी हैं, ने दिप्रिंट को बताया कि एक बार काम शुरू होने पर परियोजना पूरी होने में 36 महीने का समय लगेगा.

अवस्थी ने बताया, ‘परियोजना पर करीब 60 प्रतिशत क्लियरिंग और ग्रबिंग वर्क पूरा हो चुका है. पर्यावरण और वन मंजूरी मिल चुकी है. निर्माण कंपनी ने अपना कार्यालय स्थापित कर लिया है. जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य 30 सितंबर से शुरू हो जाएगा.’

अवस्थी ने कहा कि यूपीईआईडीए ने आवश्यक जमीन में से 94 प्रतिशत से अधिक का अधिग्रहण पहले ही कर लिया है. परियोजना के लिए कुल 7,974 हेक्टेयर के करीब भूमि की जरूरत है.

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गंगा एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा लेकिन आठ लेन तक इसका विस्तार किया जा सकेगा.

यूपी में चार एक्सप्रेस-वे यानी यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पहले से ही चालू हैं. अवस्थी ने कहा कि एक बार पूरा हो जाने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे 91 किलोमीटर के प्रस्तावित गोरखपुर लिंक के साथ ग्रिड को पूरा कर देगा.


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सभी एक्सप्रेसवे आपस में जुड़े हैं और राज्य के दूरवर्ती और पिछड़े क्षेत्रों को न केवल राज्य की राजधानी लखनऊ के करीब लाएंगे, बल्कि दिल्ली और उससे आगे का रास्ता भी खोलेंगे और इससे क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

आपातकालीन लैंडिंग के लिए हवाई पट्टी

अवस्थी ने बताया कि आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की तरह गंगा एक्सप्रेसवे के एक छोटे से हिस्से में भी भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए हवाई पट्टी होगी. एक्सप्रेस-वे पर शाहजहांपुर में 3.5 किमी का रनवे विकसित किया जाएगा.

परियोजना की रियायत अवधि 30 वर्ष की होगी, और इसे 12 पैकेज में बांटा जाएगा, जिस पर दो निजी रियायतग्राही अमल करेंगे. तीन पैकेज का निष्पादन आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स करेगा, वहीं नौ पैकेज अडानी एंटरप्राइजेज के होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल दिसंबर में शाहजहांपुर में परियोजना की आधारशिला रखी थी.

एक बार गंगा एक्सप्रेसवे तैयार हो जाने पर यूपी में 1,697 किलोमीटर एक्सप्रेसवे का नेटवर्क होगा—जो देश में सबसे बड़ा होगा. अभी भारत में कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क लगभग 1,822 किलोमीटर है.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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