Monday, 27 June, 2022
होमदेशकेरल की नन अभया के भाई ने 28 साल लंबी लड़ाई को याद करते हुए कहा—‘उन्होंने चेतावनी के बजाय उसे खामोश करा दिया’

केरल की नन अभया के भाई ने 28 साल लंबी लड़ाई को याद करते हुए कहा—‘उन्होंने चेतावनी के बजाय उसे खामोश करा दिया’

दुबई, जहां वह रहते हैं से दिप्रिंट के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं केवल यही सोचता हूं कि उन्होंने मेरी बहन को छोड़ दिया होता.’

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बेंगलुरु: सिस्टर अभया के बड़े भाई बीजू थॉमस को इस बात की कसक रह गई है कि उनकी बहन की हत्या के 28 साल बाद भी दोषियों को सिर्फ आजीवन कारावास की सजा का सामना करना पड़ रहा है.

दुबई, जहां वह रहते हैं से दिप्रिंट के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं केवल यही सोचता हूं कि उन्होंने मेरी बहन को छोड़ दिया होता.’

21 वर्षीय सिस्टर अभया 27 मार्च 1992 को मृत पाई गई थी—उनका शव कोट्टायम स्थित सेंट पायस एक्स कॉन्वेंट के एक कुएं से बरामद किया गया था, जहां वह रहा करती थीं. केरल पुलिस ने शुरू में उनकी मौत को आत्महत्या करार दिया था, लेकिन बाद में सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि मामला हत्या का था. कुछ नन की तरफ से मामले की ठीक से जांच न होने का आरोप लगाए जाने के बाद इसे सीबीआई को सौंपा गया था.

इस सप्ताह के शुरू में एक अदालत ने फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी को हत्या करने और सबूत मिटाने का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

सीबीआई जांच के मुताबिक इस मामले में दोनों दोषियों ने 27 मार्च की तड़के उस समय युवा नन की हत्या कर दी जब उसने उन्हें आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया था. ईसाई धर्म में पादरियों के लिए बाध्यकारी कुछ नियमों के मुताबिक ब्रह्मचर्य के व्रत का पालन करना अनिवार्य है और दोषियों को अपना भेद खुलने का डर था.

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हालांकि, अभया को एक बेहद शांत और सौम्य इंसान के रूप में याद करने वाले बीजू का कहना है कि उसने तो शायद किसी को एक शब्द भी नहीं कहा होगा.

उन्होंने कहा, ‘अगर हत्यारों ने उसे मुंह बंद रखने की चेतावनी दी होती, तो वह वैसा ही करती. इसके बजाये उन लोगों ने उसे हमेशा के लिए चुप करा दिया.’

उन्होंने कहा, ‘वह ज्यादा बातें नहीं करती थी. उन लोगों ने उसकी मासूमियत को नहीं समझा और उसे चेतावनी देने के बजाय… उसे मार डाला. शुक्र है कि भगवान ने रास्ता दिखाया और और उन्हें उनके किए का दंड मिल पाया.’

‘एक खाली जगह जिसे भरा नहीं जा सकता’

अब 51 साल के हो चुके थॉमस ने कहा कि वह अभया के कॉन्वेंट में शामिल होने के पक्षधर नहीं थे. लेकिन वह दूसरों की मदद करने के लिए अपना जीवन समर्पित करने को उत्सुक थी और अपने चुने मार्ग पर ही चलना चाहती थी.

उन्होंने कहा, ‘जब मैंने उससे नन बनने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा…तो उसने कहा कि वह लोगों की मदद करना चाहती है और इसका एकमात्र तरीका खुद को ईसा मसीह के लिए समर्पित करना और धर्मशास्त्र के बारे में सीखना है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं तब काफी नादान था. मैंने उसे अपनी धार्मिक पढ़ाई पूरी करके घर लौटने और फिर शादी करने के लिए कहा. इस पर उसने हंसते हुए मुझसे कहा कि एक बार वह नन बन जाएगी, तो फिर पीछे हटने का कोई मतलब नहीं रहेगा.’

अपने बचपन के बारे में बात करते हुए थॉमस ने कहा कि अभया बचपन से ही अंतर्मुखी थी और वह कभी किसी को परेशान नहीं करती थी.

थॉमस के अनुसार, वह गुजरात में होटल प्रबंधन का कोर्स कर रहे थे जब अभया की मृत्यु हुई. उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें अपनी बहन की एक दोस्त का पत्र मिला था जिसमें सिर्फ यह उल्लेख किया गया था कि उसके साथ कुछ ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ हुआ था.

उन्होंने पहले सोचा कि शायद कोई दुर्घटना हुई थी, क्योंकि दो हफ्ते पहले भेजे एक पत्र में अभया ने लिखा था कि उसे दौरे पर जाना है.

उन्होंने बताया, ‘मुझे जो पत्र मिला उसमें मुझे तुरंत केरल लौटने के लिए कहा गया था. उन दिनों हमारे पास पैसे नहीं थे. मेरी जेब में सिर्फ 120 रुपये थे.’

उन्होंने बताया कि जब वह शवगृह पहुंचे तो एक व्यक्ति ‘मेरे पास आया और उसने मुझे बताया कि किसी ने उसे मार डाला है.’

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में पूरी घटना का ब्यौरा कुछ इस तरह दिया है—अभया 27 मार्च की सुबह करीब 4 बजे उठी और पानी पीने के लिए कॉन्वेंट किचन की ओर जाने के लिए सीढ़ियों से उतर रही थी, जब उसने दोनों आरोपियों को आपत्तिजनक अवस्था में देखा.

इसके बाद दोनों ने उस पर हमला किया—जिसमें कुल्हाड़ी का इस्तेमाल भी शामिल था—और उसे पास ही स्थित एक कुएं में धकेल दिया.

कोट्टूर और सेफी की भूमिका 2008 में तब सामने आई, जब तत्कालीन सीबीआई डीएसपी नंदकुमारन नायर ने फादर जोस पुथ्रुकायिल के साथ इस दोनों को गिरफ्तार किया. फादर जोस को बाद में सबूतों के अभाव में केरल उच्च न्यायालय ने आरोप मुक्त कर दिया.

जांच शुरू होने के बाद से ही एक्टिविस्ट जोमन पुथेनपुरकल मृत नन के लिए न्याय की मांग करने में सबसे आगे रहे हैं. जोमन ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा कि ‘यह बात तो हर स्तर पर एकदम साफ समझ में आ रही थी कि अभया की हत्या की गई थी.’

उन्होंने कहा, ‘जांच अधिकारियों ने (शुरू में) आंखें मूंद रखी थी और इसे आत्महत्या करार देकर मामले को बंद करना चाहते थे लेकिन मैंने अंत तक लड़ने का फैसला किया.’

थॉमस चूंकि दुबई में रहते हैं, उन्हें अक्सर ही इस बात के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है कि उन्होंने न्याय की पूरी लड़ाई अपने पिता के कंधों पर डाल दी, जिन्होंने मीडिया के सामने इन ‘अपराधियों’ के कृत्यों को उजागर करने के लिए जगह-जगह ठोकरें खाईं. हालांकि, थॉमस ने कहा कि उन्हें अपने काम के लिए दुबई जाना पड़ा लेकिन वह पहले दिन से ही अपनी बहन के मामले में सक्रियता से जुड़े थे.

उन्होंने कहा, ‘मैं ही वह व्यक्ति था जिसने उसके शव की अटॉप्सी रिपोर्ट प्राप्त की थी. इससे पता चला कि उसके शरीर में 375 मिली लीटर पानी था.’ साथ ही जोड़ा, ‘जो इंसान डूबकर मरा हो, उसके शरीर में आपको इतनी कम मात्रा में पानी नहीं मिलेगा. मैं उसी दिन समझ गया था कि उसकी हत्या हुई थी. लोग चाहे जो कहते रहें लेकिन मैंने तो अपनी बहन को खो दिया है और वह खाली जगह कभी नहीं भरी जा सकती.’

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