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जयपुर स्थित निम्स युनिवर्सिटी | फोटो / निम्स यूनिवर्सिटी की वेबसाइट
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पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर पिछले हफ्ते हुए हमले के बारे में आपत्तिजनक संदेश पोस्ट करने के मामले में देश के कुछ शिक्षण संस्थानों ने अपने यहां पढ़ने वालों छात्रों को फटकार लगाई है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक छात्र को उसके द्वारा की गई टिप्पणी के लिए निलंबित कर दिए जाने के एक दिन बाद, जयपुर के निम्स विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली चार कश्मीरी छात्राओं को अपने व्हाट्सऐप पर ‘राष्ट्र-विरोधी’ संदेश पोस्ट करने के लिए शनिवार को निलंबित कर दिया गया था.

विश्वविद्यालय के सर्कुलर के अनुसार, छात्राओं ने ‘हमले का जश्न मनाया’.

रजिस्ट्रार द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है,

‘14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर गंभीर आतंकवादी हमले के संबंध मे आपने पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों की मौत का जश्न मनाने के लिए अपने व्हाट्सऐप पर एंटीनेशनल संदेश पोस्ट किया है. निम्स विश्वविद्यालय इस तरह की गतिविधियों (एसआईसी) को बर्दाश्त नहीं करेगा और कड़ाई से निंदा करेगा.’

उसमें आगे कहा गया, ‘चूंकि उनका उपरोक्त कृत्य गंभीर और गंभीर प्रकृति का है, इसलिए इन छात्रों को कॉलेज और छात्रावास से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है.’

निम्स जयपुर में स्थित एक स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय है. जिन छात्रों से पूछताछ हो रही है वे सभी विज्ञान पाठ्यक्रमों में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर रही हैं.

देहरादून में भी छात्रों के मन में डर

इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में, दो छात्रों को निलंबित कर दिया गया और कई अन्य को कथित तौर पर छोड़ने की धमकी दी गई.

देहरादून में दो निजी कॉलेजों ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट करने के लिए अपने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की.

मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र, जिसने सोशल मीडिया पर ‘आज तो रियल पबजी हो गया’ लिखा, पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में कॉलेज द्वारा निलंबित कर दिया गया. जिस इंजीनियरिंग कॉलेज में वह पढ़ रहा था, वहां के दूसरे छात्र को निष्कासित कर दिया गया.

डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज के पास से एक और घटना की सूचना मिली, जहां स्थानीय लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर धार्मिक घृणास्पद नारे लगाए.

कम से कम 17 कश्मीरी लड़कियां जो अपने विज्ञान विषय में मास्टर डिग्री प्राप्त कर रही हैं, संस्थान के छात्रावास में रहती हैं. वे देहरादून के कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग 3,000 कश्मीरी छात्रों का एक हिस्सा हैं.

डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के एक छात्र ने फोन द्वारा दिप्रिंट को बताया,

‘हम इतने भयभीत हो गए कि अपने कमरों को बंद कर हमें शौचालयों में छिपना पड़ा और वे कहते रहे कि उन्हें बाहर करो या हम उन्हें मार देंगे ’,

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे हॉस्टल में रहने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों को बाहर निकाल दिया गया और उनके सामान में आग लगा दी गई. हालांकि, दिप्रिंट इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

एक विडियो सामने आया है जहां स्थानीय लोगों के समूह कश्मीरी छात्रों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि अगर कॉलेज प्रशासन ने उनका प्रवेश रद्द नहीं किया तो वे कॉलेज को जला देंगे. वीडियो में कॉलेज की पहचान स्पष्ट नहीं है.

वहीं उत्तराखंड पुलिस ने कहा कि विडियो में किए गए दावे ‘अफवाह’ थे और इस घटना से इनकार किया.
देहरादून में प्रेम नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ, नागेंद्र गहलोत ने फोन पर दिप्रिंट को बताया,

‘ये सिर्फ अफवाहें हैं. सब कुछ सामान्य है. कश्मीरी छात्र सुरक्षित हैं.’

 

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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