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नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया. समारोह में पॉकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी हिस्सा लिया. समारोह में केंद्रीय मंत्री हरसिमरन कौर ने जल अर्पित किया और पूजा की.

समारोह के पहले भारत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह साफ़ कर दिया है कि इस कॉरिडोर के बावजूद भारत पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू नहीं हो पाएगी, उन्होंने आतंकवाद को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया.

भारत के सार्क सम्मलेन में भाग लेने पर बुधवार को स्वराज ने कहा कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते. भारत पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में भाग नहीं लेगा.

‘भारत सरकार कई सालों से करतारपुर कॉरिडोर के लिए पाकिस्तान से कह रहा था, लेकिन उन्होंने अब जाकर इस पर सकारात्मक जवाब दिया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इससे द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो जाए. आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते.’

जनरल बाजवा का वहां मौजूद होना भारत में शंका की नज़र से देखा जा रहा है. भारत में कुछ विश्लेषक इसे खालिस्तान कॉरिडोर कहकर अपनी चिंता का इज़हार भी कर रहे हैं.

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और हरसिमरत कौर बादल वहां अतिथि के तौर पर मौजूद थे. पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, मंगलवार को ही वाघा बॉर्डर के ज़रिये, पाकिस्तान पहुंच गए थे. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी इस समारोह में आने का न्यौता मिला था लेकिन उन्होंने भी पाकिस्तान की तरफ से आने वाली आतंकवादी गतिविधियों के न रुकने का कारण देते हुए न्यौता नकार दिया.

अट्टारी वाघा सीमा पर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि ‘मैं बहुत ही सौभाग्यशाली और आभारी महसूस कर रहा हूं कि मैं ये तीर्थयात्रा कर पाया. ये लंबे समय से सिख समुदाय की मांग रही है और मैं पाकिस्तान सरकार के इस कदम के लिए अपना आभार प्रकट करता हूं.’

आपको बता दें कि पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जो कि भारतीय सीमा से मात्र तीन-चार किलोमीटर दूर है, में सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव ने अपने जीवन के आखिरी पल वहीं बिताये थे. भारत पाकिस्तान के बीच इस कॉरिडोर की काफी लम्बे अरसे से मांग थी.

केंद्रीय मंत्री हरसिमरन कौर ने भावुक होते हुए कहा कि ये गुरुनानक की कृपा है कि ये रास्ता खुला है और सिख समुदाय की 70 साल की मांग रही है.

इससे पहले लाहौर पहुंचे सिद्धू ने कहा ‘जब भी करतारपुर कॉरिडोर का इतिहास लिखा जाएगा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को याद किया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सराहा जाएगा. यह जिंदगियों को जोड़ने वाला फैसला है यह दोनों पंजाब प्रांत के लोगों के सोचने का अंदाज़ बदल देगा और दोनों देशों के रिश्तों में भी बदलाव ला सकता है.’

आपको बता दें कि सिद्धू इसी साल जब अगस्त में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में गए थे, तब वहां के आर्मी चीफ कंवर बाजवा के साथ उनके गले मिलने की फोटो की खूब आलोचना हुई थी.

इससे पहले, सोमवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के डेरा बाबा नानक शहर से सड़क की नींव रखी थी, जो करतारपुर गलियारे को जोड़ती है.

अमृतसर के सांसद गुरुजीत सिंह औजला समारोह के लिए मंगलवार को अटारी से पाकिस्तान गए. वह अपने साथ स्वर्ण मंदिर के सरोवर का पवित्र जल भी ले गए.

समारोह का हिस्सा बनने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल भी पाकिस्तान में हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरदिर सिंह ने समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान सरकार की ओर से मिले निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना भारतीय सैनिकों को मार रही है और आतंकवादी तत्वों की मदद से जम्मू एवं कश्मीर और पंजाब में अशांति फैला रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिद्धू से भी अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए कहा था.

अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तानी क्षेत्र में पड़ने वाले गुरुद्वारे का सिख धर्म और इतिहास में काफी महत्वपूर्ण स्थान है.


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