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जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते जेट एयरवेज के कर्मचारी | शुभम सिंह
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नई दिल्ली: ‘हमें पिछले पांच महीने से अपनी तनख्वाह नहीं मिली है. घर का खर्चा चलाना अब मुश्किल हो गया है. हमारी ईएमआई इतनी ज्यादा है कि उसे चुकाने के लिए हम अपने रिश्तेदारों से लगभग 20 लाख का उधार ले चुके हैं.’

एक उदासी भरे स्वर में अपनी बात कहते कहते जेट एयरवेज के कैप्टन रमन शर्मा रुक जाते हैं. गला साफ करते हैं. फिर कहते हैं, ‘अप्रैल का महीना चल रहा है. बच्चों का एडमिशन कराना है. हमारे परिवार में शादी भी है. लेकिन अब लगता है जैसे सब रुक जाएगा.’

लेकिन यह समस्या केवल रमन की नहीं है. बुधवार को जेट एयरवेज के बंद होने के फैसले से करीब 22 हजार कर्मचारियों के सामने अचानक से वित्तीय संकट खड़ा हो गया है.


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मामला क्या है

देश में 26 साल से अपनी सेवाएं दे रही जेट एयरवेज ने बुधवार रात को अपनी आखिरी फ्लाइट का संचालन करने के बाद गुरुवार से सभी उड़ानें अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है. दरअसल कंपनी पर प्राइवेट और सरकारी बैंक मिलाकर कुल 26 बैंकों का 8500 करोड़ रुपये का कर्ज है. ऐसे में बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह ने जेट को 400 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देने से इंकार कर दिया. जिसके कारण जेट एयरवेज के लगभग 22 हजार कर्मचारियों पर नौकरी का संकट गहरा गया है. इस मुद्दे को लेकर जेट के हजारों कर्मचारियों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया. जिसमें पायलट, एयरहोस्टेस, कैप्टन और इंजीनियर्स ने हिस्सा लिया.

अंतरिम फंड जारी करने की मांग

लगभग पांच सालों से वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरवेज ने बैंकों से 400 करोड़ रुपये की अंतरिम फंड की मांग की थी, लेकिन एसबीआई ने इसको पूरा करने से मना कर दिया. अब कंपनी के पास विमान सेवा को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.

प्रदर्शन में आए एक कर्मचारी राकेश कहते हैं, ‘हमारा जीवन रुक गया है. हमारे पास पैसे नहीं है. मकान का किराया तक देना मुश्किल हो गया है.’

तो अब इसमें क्या किया जाना चाहिए

‘हम चाहते हैं इसमें सरकार जल्द से जल्द हस्तक्षेप करे. सरकार से हमारी तात्कालिक डिमांड यही है कि इस मामले में वो दखल दे और हमें 400 करोड़ का अंतरिम फंड देकर कंपनी को बंद होने से बचा ले.’

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जेट एयरवेज के कर्मचारी जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करते हुए | शुभम सिंह

लेकिन कर्मचारियों का भरोसा अभी भी जेट एयरवेज पर है

जेट एयरवेज पर आए वित्तीय संकट के बाद बाकी विमान कंपनियों ने जेट के पायलटों को ऑफर देना शुरू कर दिया है. लेकिन महीनों तक वेतन नहीं मिलने के बाद भी जेट के हजारों कर्मचारी इसे छोड़ने के मूड में नहीं है. कंपनी के संस्थापक सदस्यों में से एक और पिछले 25 साल से जेट से जुड़े सुरेंद्र शर्मा कहते हैं, ‘मेरा तो यही कहना है कि इस कंपनी को बचा दो. हमने एक छोटी से कंपनी को विश्व में झंडा गाड़ते हुए देखा है. अगर ये बंद होती है तो पूरे विश्व में भारत का नाम खराब होगा.’

वहीं पिछले 19 सालों से काम कर रही कैबिन मैनेजर श्रुति कहती हैं, हमने कई वर्षों से लगकर काम किया है. होली, दिवाली बच्चों के जन्मदिन जैसे समारोह में भी नहीं गए. जेट ने हमें बहुत कुछ सिखाया है और हमें पूरी उम्मीद है कि अभी भी चीजें सही हो जाएंगी.’

मोदी जी, चुनाव से थोड़ा समय निकाल कर हमारी भी फिक्र कर लो

प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए लोग आगे के भविष्य को लेकर थोड़े आशंकित हैं. उनका मानना है कि चुनाव तक उन्हें कोई राहत प्रदान नहीं की जाने वाली है.

कंपनी में पिछले 9 साल से काम कर रही आफरीन ने कहा कि ‘मैं और मेरे पति दोनों इस संस्थान से सालों से जुड़ें हैं. हम केवल यही चाहते हैं कि मोदी जी अपने चुनाव प्रचार से थोड़ा समय निकाल कर इस मामले में दखल दे. हमें तुरंत सैलरी नहीं चाहिए लेकिन हम चाहते हैं कि कोई आगे आकर जिम्मेदारी तो ले.’

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जेट एयरवेज के कर्मचारी जंतर मंतर पर धरना देते हुए | शुभम सिंह

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तो हम भाजपा को दिल्ली की सारी सीटों पर हराएंगे

अचानक से आए जीवकोपार्जन के संकट के बाद जेट एयरवेज के कई कर्मचारियों में सरकार को लेकर काफी गुस्सा दिखा. यह मुद्दा केवल 23 हजार लोगों का नहीं बल्कि उनके परिवार को मिला लें तो करीब एक लाख लोग इससे जुड़े हैं. ऐसे में पिछले कई सालों से काम कर रहे अजय से जब हमने पूछा कि इस बार के चुनाव में जेट एयरवेज के कर्मचारी सरकार के इस रवैये के बाद क्या सोच रहे हैं तो उन्होंने कहा, कि अगर हमारे लिए सरकार ने जल्द से जल्द कोई योजना नहीं बनाई तो हम इस चुनाव में भाजपा को हराने की पूरी कोशिश करेंगे. दिल्ली में होने वाले चुनाव में भाजपा को कड़ा सबक सिखाएंगे. उनके पीछे खड़े करीब दर्जन भर कर्मचारियों ने उनके सुर में सुर मिलाया.

वही जंतर मंतर, एक बार फिर वही नजारा, मांग भी वही. बदली है तो केवल कंपनी. कल तक जो कंपनियां हवाओं से बात किया करती थीं. हर तिमाही पर प्रोग्रेस रिपोर्ट दिखाया करती थीं, उनके 22 हजार कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है. सरकार के लाख दावों के बाद भी जेट ने बुधवार रात आखिरी उड़ान भरी लेकिन हजारों कर्मचारियों का भविष्य जमींदोज हो गया. यह हालात वैसा ही है जैसा आज से 7 साल पहले किंगफिशर एयरलाइन्स का हुआ था. उनके हजारों कर्मचारी आज भी न्याय की आस में बैठे हैं और अब जेट. अब देखने वाली बात होगी क्या इन्हें न्याय मिल सकेगा.


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