इंफाल: मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के साथ दो बैठकों के बाद, पिछले हफ्ते कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों द्वारा अगवा कर मारे गए एक मैतेई युवक के परिवार ने रविवार दोपहर उसके अंतिम संस्कार पर सहमति जताई.
संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के सदस्य संतोष सिंह ने कहा, “राज्यपाल ने हमारी 80 प्रतिशत मांगें मान ली हैं, इसलिए हम शव लेने आए हैं.” हत्या के तुरंत बाद जेएसी का गठन किया गया था. मारे गए युवक का नाम मयांगलाम्बम ऋषिकांत सिंह था.
मैतेई युवक पिछले एक महीने से चुराचांदपुर में अपनी साथी चिंगु हाकोइप के साथ रह रहा था. चिंगु हाकोइप एक कुकी महिला हैं. हत्या वाले दिन दोनों को कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था. कुछ समय बाद उसकी साथी को छोड़ दिया गया, जबकि ऋषिकांत का शव बाद में मिला.

पिछले पांच दिनों से प्रदर्शन कर रहे ऋषिकांत के परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और पड़ोसी रविवार दोपहर इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल के शवगृह पहुंचे और शव को लिया.

ऋषिकांत का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से नहीं किया जाएगा. उसे “शहीदों” के लिए अपनाई जाने वाली मैतेई परंपरा के अनुसार दफनाया जाएगा. संतोष सिंह ने कहा, “हम मृतकों को शहीद का दर्जा देने के लिए दफनाते हैं. वह मैतेई समुदाय के लिए शहीद है.”
18वीं सदी में हिंदू धर्म अपनाने से पहले मैतेई अपने मृतकों को दफनाते थे. हिंदू धर्म स्वीकार करने से पहले मैतेई अपने पूर्वजों के देवताओं की पूजा करते थे.

‘सच्चा प्यार हिंसा से अलग नहीं किया जा सकता’
ऋषिकांत के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे ट्रक के आगे लगे पोस्टर पर लिखा था. “शांति से विश्राम करो, मयांगलाम्बम ऋषिकांत सिंह. आपने दिखाया कि सच्चे प्यार को जाति, मजहब या हिंसा के डर से अलग नहीं किया जा सकता. सच और प्यार हमेशा जीतते हैं. आपका सर्वोच्च बलिदान हमें जगाए और एकजुट करे.”
शोकाकुल परिवार और रिश्तेदारों की प्रमुख मांगों में मामले को केंद्र की आतंकवाद-रोधी एजेंसी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपना, ऋषिकांत की साथी की गिरफ्तारी और उसके भाई एम. प्रेम सिंह को सरकारी नौकरी देना शामिल है.

संतोष सिंह ने कहा, “मामले को एनआईए को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है और हमें बताया गया है कि उसकी साथी से पूछताछ की जा रही है.”
इस मैतेई युवक की हत्या के बाद व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह गोली मारे जाने से पहले अपनी जान की भीख मांगता दिख रहा था.

परिवार के सदस्यों ने कहा कि ऋषिकांत नेपाल में काम कर रहा था और सीधे मणिपुर अपनी साथी से मिलने लौटा था.
उसकी हत्या से मैतेई समुदाय में गहरा आघात पहुंचा है. इसे मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष का एक नया तनाव बिंदु माना जा रहा है. यह संघर्ष 2023 में शुरू हुआ था और अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.
ताजा हत्या के बाद संयुक्त कार्रवाई समिति का गठन किया गया. समिति ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपने के लिए राज्यपाल से मुलाकात की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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