scorecardresearch
Sunday, 8 February, 2026
होमदेशIED के तार और डेटोनेटर बरामद: मेघालय की अवैध रैट-होल खदान में घातक धमाके से कई सवाल खड़े हुए

IED के तार और डेटोनेटर बरामद: मेघालय की अवैध रैट-होल खदान में घातक धमाके से कई सवाल खड़े हुए

ईस्ट जयंतिया हिल्स के थांगस्को इलाके में ब्लास्ट हुए तीन दिन हो गए हैं. 27 खदान मज़दूरों की मौत हो गई है, नौ अस्पताल में हैं और माना जा रहा है कि अवैध खदानों में और भी शव दबे हुए हैं.

Text Size:

थांग्स्को: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में शनिवार को खदान विस्फोट स्थल पर बचावकर्मी और बम डिटेक्शन स्क्वाड की टीम पहुंची. वे उन तारों की जांच कर रहे थे, जो कथित तौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज़ यानी IED से जुड़े थे, जिनका इस्तेमाल “रैट होल” कोयला खदानों के अंदर विस्फोट करने के लिए किया गया माना जा रहा है.

मौके पर मौजूद अधिकारियों, जिनमें NDRF, SDRF, BSF, स्थानीय पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोज़ल स्क्वाड यानी BDDS शामिल थे, ने कहा कि गुरुवार को 27 मज़दूरों की मौत वाले खदान विस्फोट IED के ज़रिए किए गए थे.

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में एक खदान विस्फोट वाली जगह पर एक ब्लास्ट डिवाइस का तार | प्रवीण जैन | द प्रिंट
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में एक खदान विस्फोट वाली जगह पर एक ब्लास्ट डिवाइस का तार | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

एक BDDS अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “उन्होंने सुरंगों के अंदर विस्फोट करने के लिए IED डायनामाइट का इस्तेमाल किया. खदान के अंदर मौजूद गैस के संपर्क में आते ही भीषण आग लगी और यही इस हादसे की वजह बनी.”

खदानों के पास और मज़दूरों की झोपड़ियों के बाहर पूरे इलाके में IED के तार बिखरे हुए देखे गए.

मौके पर मौजूद अधिकारियों में NDRF, SDRF, BSF, पुलिस और बम स्क्वाड के लोग शामिल थे | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स के थांग्स्को इलाके में हुए विस्फोट को अब तीन दिन हो चुके हैं. 27 मज़दूरों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ लोग अस्पताल में भर्ती हैं.

मेघालय में रैट-होल कोयला खनन पर 12 साल पहले प्रतिबंध लगाया गया था. इस तरह के खनन में ज़मीन के नीचे संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिन्हें “रैट होल” कहा जाता है. मज़दूर इन्हीं सुरंगों में झुककर या रेंगते हुए कोयला निकालते हैं. ज़्यादातर खनन हाथ से किया जाता है, लेकिन सख़्त चट्टान और कोयले की परतें तोड़ने के लिए अक्सर डायनामाइट से नियंत्रित विस्फोट किए जाते हैं. इसके लिए खनिक चट्टान में छेद करते हैं, उनमें विस्फोटक छड़ें और डेटोनेटर के तार डालते हैं, और समयबद्ध विस्फोट करते हैं, जिससे सतह टूट जाती है और कोयला निकालना आसान हो जाता है.

The mining site | Praveen Jain | ThePrint
खनन स्थल | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

मेघालय पीपल्स ह्यूमन राइट्स काउंसिल की सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता एग्नेस खार्शींग ने दिप्रिंट से कहा, “इन पहाड़ियों में फैली अवैध खदानों में यही आम तरीका है. वे आसपास के इलाकों से डायनामाइट लाते हैं और ऐसे विस्फोट करने के लिए बिजली की ज़रूरत होती है. वहां एक संगठित ऑपरेशन चल रहा था. यह पुलिस और प्रशासन की जानकारी के बिना नहीं हो सकता.”

उन्होंने आगे कहा, “पहले भी लोगों की मौत हुई है, लेकिन ऐसे मामलों को पुलिस ने हमेशा दबा दिया. अब गरीब परिवारों ने अपने लोग खो दिए हैं. वे बेबस और निराश हैं.”

ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि जाँच के दौरान 11 डेटोनेटर और इस्तेमाल किए गए बिजली के तार बरामद किए गए हैं.

फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और बम निरोधक दस्ते की टीमों ने मौके पर जांच पूरी कर ली है.

घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

एसपी ने उम्पलेंग बाज़ार में विस्फोटक ले जा रहे बाहरी लोगों को हिरासत में लेने का ज़िक्र करते हुए बताया कि त्रिपुरा और असम के लोगों से 63 डेटोनेटर ज़ब्त किए गए हैं.

उन्होंने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें डायनामाइट कहाँ से मिल रहा था. हम लीक का पता लगा रहे हैं. प्रशासन शवों की पहचान कर रहा है और मुआवज़े की प्रक्रिया भी चल रही है.”

प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि अवैध खनन को समर्थन देने के लिए एक संगठित सप्लाई सिस्टम मौजूद था. आलोचकों का कहना है कि ऐसे सामान स्थानीय खदान मालिक सुरक्षा नियमों से बचने के लिए जुटाते हैं.

एग्नेस ने कहा, “यह सालों से चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा लगाए गए रैट-होल खनन प्रतिबंध को बरकरार रखा गया, यह नहीं रुका. खदान मालिक आसपास के इलाकों से सामान मंगाते हैं और सभी सुरक्षा नियमों को नज़रअंदाज़ करते हैं.”

‘ऐसी जगहों पर कोई काम नहीं करना चाहता’

गुरुवार के विस्फोट में मरने वाले खनिकों में करन बहादुर और टीकाराम बहादुर भी शामिल थे. उनके शव अब ख्लिह्रियात के सिविल अस्पताल में रखे हैं.

उनके भाई जोग बहादुर, 57, उनके शव लेने के लिए सात घंटे का सफ़र करके पहुंचे. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे अपने दोनों भाइयों को एक साथ खो देंगे. उन्होंने बताया कि शव जल चुके थे और उन्होंने उन्हें जूतों और चेहरे की बनावट से पहचाना. उनके पास नेपाल ले जाने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए वे पास के जंगल में ही अंतिम संस्कार करेंगे.

कोयला खदान मजदूर | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

उन्होंने कहा, “मेरे पास एंबुलेंस के पैसे नहीं हैं. मैंने नेपाल में परिवार को वीडियो कॉल पर चेहरे दिखाए और तस्वीरें भेजीं. वैसे भी चेहरे पहचानने लायक नहीं हैं. वे रोज़ 1,200 रुपये कमाते थे. दो महीने पहले ही यहां आए थे. कभी नहीं सोचा था कि मेरे भाई ऐसे मरेंगे.”

उनके पास ही रवींद्र विश्वकर्मा खड़े थे, जो एक और रैट-होल खदान मज़दूर हैं. वे अपने चाचा का शव लेने के लिए आठ घंटे पैदल चले. उन्हें वहां काम करने का अफ़सोस है, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है.

जोग बहादुर | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “ऐसी जगहों पर कोई काम नहीं करना चाहता. नेपाल में हमारे पास काम नहीं है, इसलिए हम यहां आते हैं. लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा और हमारी मदद करने वाला कोई नहीं होगा. मेरे पास खाने के पैसे भी नहीं हैं. मैं आठ घंटे पैदल चला और रास्ते में कुछ खा नहीं पाया. प्रशासन ने हमारे जैसे लोगों के लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया है. न खाना, न मुआवज़ा.”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मदद चाहता हूं, लेकिन कहीं से नहीं मिल रही.”

कई लोगों ने शवों पर दावा किया है. स्थानीय प्रशासन ने मृतकों की कोई सूची जारी नहीं की है, लेकिन यह पता है कि असम, बंगाल और नेपाल के लोग यहां काम करते थे. खदान में काम करने वाले लगभग 99 प्रतिशत मज़दूर भाग चुके हैं. बाकी लोग दोस्तों या रिश्तेदारों के शवों का इंतिज़ार कर रहे हैं.

रवींद्र विश्वकर्मा ने अपने चाचा के शव के लिए कागजी कार्रवाई पूरी की | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

NDRF, SDRF, BSF, स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमें मौके पर मौजूद हैं और अब भी खदानों के अंदर गहराई से शव निकाल रही हैं. मज़दूरों के मुताबिक, करीब 17 शव अब भी अंदर दबे हुए हैं, लेकिन NDRF ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

मौके पर मौजूद NDRF के कमांडिंग ऑफिसर एच.पी.एस. कंदारी ने कहा, “हम यह नहीं कह सकते कि कितने लोग दबे हैं. हमें दो लोग मिले हैं और ऑपरेशन जारी है. जब तक प्रशासन हमें रोकने को नहीं कहता, हम काम करते रहेंगे.”

share & View comments