नई दिल्ली: उनके पास सिर्फ एक नाम था—‘Krrish’, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) लगातार कोशिश करता रहा और म्यांमार से चल रहे साइबर अपराध के ऑपरेशन का पर्दाफाश करने में जुटा रहा. ‘Krrish’ एक नकली नाम था, जिसे उस व्यक्ति ने इस्तेमाल किया, जिस पर शक था कि वह एक ऐसे गिरोह को चला रहा था जो नौकरी की ज़रूरत वाले लोगों को निशाना बनाता था. पहले वह नौकरी ढूंढ रहे लोगों को पहचानता था और फिर उन्हें थाईलैंड में डाटा एंट्री की नौकरी का लालच देता था, जिसमें 1,200 डॉलर महीने की सैलरी और पूरा खर्च देकर बाहर भेजने का वादा किया जाता था.
लालच बड़ा था, इसलिए कई लोग फंस गए. जिस नौकरी का सपना दिखाया गया था, उसकी जगह इन लोगों को म्यांमार के ठगी वाले ठिकानों पर भेज दिया गया, जहां उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले साइबर अपराध में जबरन लगाया गया. उन्हें अमानवीय हालात में रखा गया और हर समय नज़र रखी जाती थी.
मार्च और नवंबर 2025 में बड़ी संख्या में बचाए गए और भारत वापस लाए गए ‘साइबर गुलामों’ की गवाही में ‘Krrish’ का नाम बार-बार सामने आया, लेकिन इस नकली नाम के अलावा जांच के पास ज्यादा जानकारी नहीं थी—न साफ पहचान, न कोई ठोस सुराग. ‘Krrish’ एक भूत की तरह बना रहा.
बड़ी सफलता तब मिली जब एजेंसी ने अपने भरोसेमंद स्रोतों के जरिए जानकारी जुटाई. पहले उन्हें उसका चेहरा पता चला. फिर सीबीआई को केरल में उसका पता मिला और उसका पूरा नाम सामने आया—नेल्लाथु रामकृष्णन सुनील. लंबे समय से बिछाया गया जाल अब काम कर गया. जांचकर्ताओं ने जल्दी ही उसका पासपोर्ट भी ट्रैक कर लिया; अब वह एजेंसी की नज़र में था.
‘Krrish’ को आखिरकार पिछले हफ्ते पकड़ लिया गया, जब वह कुछ दिन भारत में रहने के बाद श्रीलंका जाने के लिए निकल रहा था.
यह पहली बार नहीं है जब विदेशों में चल रहे ठगी नेटवर्क में भारतीयों को भेजने वाले एजेंटों पर कार्रवाई हुई हो, लेकिन पहले के मामलों में अलग-अलग एजेंट पकड़े गए थे, जबकि इस जांच में एक ही मुख्य व्यक्ति—‘Krrish’—पर ध्यान दिया गया, जिसका नाम कई गवाहियों में सामने आया और जो बड़ी संख्या में लोगों को म्यांमार भेज रहा था.
एक सूत्र ने कहा, “जिन पीड़ितों से हमने बात की, उनकी गवाही में दो नाम बार-बार सामने आए—Krrish और नील. दूसरे आरोपी को पहले गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सिर्फ अपराधियों की पहचान ही नहीं होगी, बल्कि बड़े स्तर पर भर्ती करने वाले लोगों तक भी पहुंच बनेगी. अब तक हमारे पास सिर्फ पीड़ितों की जानकारी थी, नेटवर्क चलाने वालों की नहीं. वह इस गिरोह का सरगना है और उसकी गिरफ्तारी से कई और खुलासे होने की संभावना है. वह इस पूरी कड़ी का अहम हिस्सा है.”
जांच अब आगे बढ़ रही है. गिरफ्तारी के बाद सीबीआई को Krrish के पास से काफी महत्वपूर्ण सामग्री मिली, जिसमें संभावित निशानों का डेटा, उन लोगों की जानकारी जिन्हें इन ठगी ठिकानों पर भेजा जाना था और देशभर में काम कर रहे अन्य एजेंटों की जानकारी शामिल है.
पीड़ितों से मिली जानकारी के आधार पर भारतीय दूतावास ने भी उन संदिग्ध एजेंटों, एजेंसियों और कंपनियों की सूची तैयार की है जो भारतीय नागरिकों को म्यांमार के ठगी केंद्रों में भेजने में शामिल हैं. स्रोत के मुताबिक, सीबीआई अब इस सूची में शामिल लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.
‘अमेरिकी महिलाओं को बनाया निशाना’
एक पीड़ित, जिसकी शिकायत पर सीबीआई ने नेल्लाथु रामकृष्णन सुनील उर्फ Krrish के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, उन्होंने बताया कि उसी ने उन्हें नौकरी का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया क्योंकि यह बहुत फायदेमंद लग रहा था.
पीड़ित ने फेसबुक पर अपनी आर्थिक परेशानी और तुरंत नौकरी की ज़रूरत के बारे में पोस्ट किया था.
सूत्र ने कहा, “Krrish ने उस पोस्ट को देखा और व्हाट्सऐप पर संपर्क किया, थाईलैंड में डाटा एंट्री की नौकरी का ऑफर दिया. उसने टूरिस्ट वीजा बनवाया, बैंकॉक की फ्लाइट बुक की और सब कुछ सही लग रहा था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पीड़ित को म्यांमार के म्यावाडी इलाके में स्थित KK Park 4 नाम के ठगी ठिकाने पर भेज दिया गया.”
एफआईआर के मुताबिक, पीड़ित को कंपनी की तरफ से दिए गए स्क्रिप्ट के अनुसार ठगी वाले चैट करने के लिए मजबूर किया गया, जिनमें आम तौर पर 45 साल से ज्यादा उम्र की अमेरिकी महिलाओं को निशाना बनाया जाता था.
सूत्र ने कहा, “उन्हें मजबूर किया जाता था कि वे अमेरिकी महिलाओं को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए मनाएं, जहां 900 से 1,200 डॉलर महीने की सैलरी का वादा किया गया था, वहीं उन्हें सिर्फ 25,000 थाई बहत देने की बात कही गई.”
पीड़ित ने सीबीआई को बताया कि छोटी-छोटी गलतियों पर भी कर्मचारियों की सैलरी काट ली जाती थी और कटौती के बाद हर महीने सिर्फ लगभग 16,000 से 17,000 थाई बहत नकद मिलते थे, “कंपाउंड के अंदर कड़ी निगरानी और सख्त नियम थे. दिन में सिर्फ दो घंटे मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की इज़ाज़त थी और परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी.”
बचाए गए पीड़ित ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उन्हें डेटिंग ऐप के प्रोफाइल दिए जाते थे, जिनमें महिलाओं का रूप बनाकर पुरुषों को निशाना बनाने वाले रोमांस स्कैम किए जाते थे. सूत्र ने कहा, “उसे अमानवीय हालात में रखा गया, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई, और वह लगातार डर और अभाव में जी रहा था.”
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कई पीड़ित अभी भी इन ठिकानों में फंसे हुए हैं.
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