Tuesday, 18 January, 2022
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राजस्थान के व्यक्ति ने कैसे चलाया ‘सेक्सटॉर्शन’ रैकेट, 300 से अधिक पीड़ितों से खसोटे 30 लाख रुपये

भरतपुर के हकमुद्दीन को दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है. उसने 3 चचेरे भाइयों के साथ मिलकर फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए पीड़ितों को निशाना बनाया.

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नई दिल्ली: राजस्थान के एक 24 वर्षीय व्यक्ति ने डेढ़ साल तक एक ‘सेक्सटॉर्शन’ रैकेट चलाया और 300 से अधिक पुरुष और महिला पीड़ितों से 30 लाख रुपए से अधिक ऐंठ लिए, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते थे.

हकमुद्दीन नाम के इस शख़्स को दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने शनिवार को भरतपुर में उसके मूल गांव से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कहा कि वो फेसबुक और व्हाट्सएप के ज़रिए अपने शिकार को निशाना बनाता था.

डीसीपी साइबर सेल केपीएस मल्होत्रा के एनुसार, हकमुद्दीन जो 10वीं तक पढ़ा है, तीन रिश्तेदारों की मदद से ये रैकेट चलाता था और उसे अपना पारिवारिक कारोबार बताता था.

मल्होत्रा ने दिप्रिंट को बताया, ‘रैकेट में शामिल तीन और लोग फरार चल रहे हैं; वो तीनों उसी गांव से हैं और उसके चचेरे भाई हैं. उनका पारिवारिक धंधा था कि वो लोगों से पैसे ऐंठते थे, जिसके लिए वो बदले हुए फोटो और कामुक वीडियोज़ के ज़रिए लोगों को ब्लैकमेल करते थे, जिन पर शिकायतकर्ता का चेहरा लगा होता था’.

फरार चल रहे कज़िन्स की पहचान सैकुल (22), साकिर (27) और वसीम (26) के रूप में हुई है.

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व्हाट्सएप DP के तौर पर दिल्ली पुलिस चीफ की तस्वीर

जुलाई में पुलिस को दिल्ली के एक व्यक्ति से शिकायत मिली थी कि उसे एक महिला की ओर से फेसबुक अनुरोध मिला था, जिसने उसका कॉन्टेक्ट नंबर पूछा जिसके बाद उसे एक वीडियो कॉल आई, जिसके साथ अश्लील सामग्री थी. बाद में उसे बदली हुई अश्लील सामग्री भी मिली, जिस पर उसका चेहरा लगा हुआ था.

पीड़ित को एक कॉलर ने ब्लैकमेल किया, जिसने दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की फोटो को डिसप्ले पिक्चर के तौर पर लगाया हुआ था और उसने 1.96 लाख रुपए की मांग की. पीड़ित दबाव में आ गया और उसने पेटीएम के ज़रिए वो रक़म अदा कर दी.

डीसीपी मल्होत्रा ने कहा, ‘हमें 9 जुलाई को एक शिकायत मिली कि पीड़ित को एक व्हाट्सएप कॉल आई, जिस पर दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की डिसप्ले पिक्चर लगी थी, जिसमें उससे पैसे की मांग की गई. उसे बदली हुई अश्लील सामग्री के सहारे ब्लैकमेल किया गया. हमने पैसे के रास्ते और उस फोन नंबर का पता लगाया, जिससे पीड़ित से संपर्क किया गया था’.

उसके बाद से उसी रैकेट के खिलाफ नौ और शिकायतें, दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में दर्ज कराई जा चुकी हैं, जिसके अंतर्गत साइबर सेल काम करता है.

मल्होत्रा ने आगे कहा, ‘हकमुद्दीन ने दूसरे मामलों में भी शामिल होने की बात क़बूल कर ली है. कार्यशैली वही है’.


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कैसे काम करते थे

डीसीपी ने बताया कि हकमुद्दीन और उसके कज़िन्स, फेसबुक और वॉयस मॉडुलेशंस एप्लिकेशंस पर बहुत सारे उपनाम इस्तेमाल करते थे और कुछ पीड़ितों को फुसला कर वीडियो कॉल पर यौन क्रियाएं भी कराते थे.

उन्होंने आगे कहा, ‘पहले वो बेतरतीब ढंग से पीड़ितों को चुनकर, टोह लेने के बाद लड़की बनकर उसे रीक्वेस्ट भेजते हैं. फिर अभियुक्त हल्की-फुल्की बातचीत शुरू करते हैं और उनका व्हाट्सएप नंबर मांगते हैं. इसके बाद व्हाट्सएप के ज़रिए पीड़ित को एक ऑडियो कॉल की जाती है, जिसमें वॉयस मॉड्युलेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी आवाज़ से लगता है कि दूसरी ओर कोई लड़की बात कर रही है’.

मल्होत्रा ने कहा, ‘एक बार दूसरा व्यक्ति खुल जाए, तो फिर व्हाट्सएप वीडियो कॉल की जाती है. वो दिखाते हैं कि कंप्यूटर स्क्रीन पर कोई लड़की है, जबकि वास्तव में वो अभियुक्त होता है. फिर उस व्यक्ति को फुसलाकर दो मिनट के लिए उससे यौन क्रिया कराई जाती है’.

मल्होत्रा ने कहा, ‘इस बीच रूपांतरित वीडियो बना लिया जाता है, और उसे तुरंत ही पीड़ित को भेजकर और उसे पैसे के लिए ब्लैकमेल किया जाता है. अभियुक्त उस व्यक्ति के दोस्तों और ग्रुप्स की सूचियां देखते हैं, और फिर उसे ब्लैकमेल करते हैं कि अश्लील सामग्री उन ग्रुप्स पर पोस्ट कर दी जाएगी’. मल्होत्रा ने आगे कहा कि अभियुक्त एक ही दिन में कई कई प्रयास करते थे.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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