Saturday, 28 May, 2022
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पुरानी दवाओं का नया परीक्षण- कोविड-19 के इलाज में मलेरिया, एचआईवी, टीबी और ईबोला की वैक्सीन से हैं उम्मीदें

कोरोनोवायरस महामारी तेजी से और व्यापक रूप से फैल रही है, सबसे अच्छी दवाओं पर चल रहे परीक्षणों और प्रयोगों पर एक नज़र.

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नई दिल्ली: कोरोनोवायरस ने अबतक पूरी दुनिया में 4.3 लाख लोगों को संक्रमित किया है और पूरे ग्रह पर एक ठहराव  ला दिया है. वैज्ञानिक, दवाओं और टीकों की सहयोगी दवाएं जो पहले से ही अन्य बीमारियों जैसे टीबी, मलेरिया और एचआईवी के लिए उपयोग की जा रहीं थी उसका सहारा ले रहे हैं.

लाखों लोगों का जीवन दांव पर है. एक नई दवा को विकसित करने के लिए महीनों खर्च करना संभव नहीं है. एसएआरएस-सीओवी-2 का प्रभाव हमारे शरीर को कैसे दिन प्रतिदिन प्रभावित करता है. चिकित्सा समुदाय कोविड-19 के रोगियों के इलाज के लिए अनुमोदित एंटीवायरल के मौजूदा आर्सेनल का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं.

महामारी तेजी से और व्यापक रूप से फैली है. भारत में भी पीड़ितों की संख्या है.  दिप्रिंट की  सबसे अच्छी दवाओं पर चल रहे परीक्षणों और प्रयोगों पर एक नजर.

बीसीजी वैक्सीन जो टीबी का इलाज करती है

बीसीजी वैक्सीन, जिसका उपयोग टीबी के इलाज के लिए किया जाता है. इसका नाम फ्रांसीसी माइक्रोबायोलॉजिस्ट अल्बर्ट कैलमेट और कैमिल गुएरिन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने लगभग सौ साल पहले 1919 में अत्यधिक संक्रामक सांस की बीमारी से लड़ने के लिए इसे विकसित किया था.

वैक्सीन का उपयोग पहली बार 1921 में मनुष्यों पर किया गया था और आमतौर पर एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दिया जाता है. अध्ययनों से पता चला है कि यह 15 वर्षों तक प्रतिरक्षा कर सकता है.

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टीके मध्यम रूप से प्रभावी होते थे, जो टीकाकरण किए गए लगभग 60 प्रतिशत बच्चों को प्रतिरक्षा प्रदान करते थे. हालांकि, हाल ही में यह फेफड़े के टीबी के खिलाफ अप्रभावी साबित हो रहा है, जो भारत में बीमारी का सबसे आम रूप है. नतीजतन, इसके विकल्प को खोजने पर भी काम चल रहा है.

ऐसा एक विकल्प, जिसे VPM1002 कहा जाता है, जिसे मूल बीसीजी वैक्सीन से विकसित किया गया था. कोविड-19 के खिलाफ संभावित प्रतिरक्षा बूस्टर के रूप में क्लीनिकल ​​परीक्षणों से गुजरना पड़ता है.

अध्ययन इसी सप्ताह से शुरू होने हैं. नीदरलैंड में शुरू हो रहे हैं और इसके बाद जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन, भारत और अन्य देशों में शुरू होंगे.

इस टीके का उपयोग करने का कारण यह है कि बीसीजी ने मृत्यु दर को कम करना, संभावित रूप से अन्य फेफड़ों के संक्रमणों से बचाने और ‘प्रशिक्षित प्रतिरक्षा’ प्रदान करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है. शरीर के लिए न केवल टीबी और इसी तरह के फेफड़ों के संक्रमणों के खिलाफ प्रतिरक्षा बल्कि अन्य वायरस और रोग को सुधार करने का एक तरीका है.

रीमेडिसविर, इबोला वैक्सीन

गिलियड साइंसेज की रीमेडिसविर, एक प्रायोगिक दवा है जो एक सामान्य एंटी-वायरल दवा थी, जिसे पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न बीमारियों पर परीक्षण किया गया था, यह देखने के लिए कि यह कहां काम करती है. 2014 के इबोला प्रकोप के दौरान इसका ब्रेकआउट मोमेंट था, लेकिन अन्य उपचारों से तुरंत हटा दिया गया था.

वैज्ञानिकों ने इसके साथ प्रयोग करना जारी रखा है और दो अन्य कोरोनावायरस- सार्स और मर्स के साथ कुछ सफलता देखी है. इसलिए, अब इसे पांच कोविड -19 परीक्षणों में परीक्षण किया जा रहा है, जो संभावित उपचार की पेशकश करने का मदद करता है. अध्ययन चीजों को मापेंगे जैसे कि दवा किसी रोगी में ऑक्सीजन के स्तर को कैसे प्रभावित करती है.

इसका इस्तेमाल अमेरिका में पहले पीड़ित का इलाज करने के लिए किया गया था और तब से इसका इस्तेमाल जारी है. कई लोगों ने कथित तौर पर कोविड-19 को रेमेडिसविर के माध्यम से ठीक किया है. पहला परीक्षण अगले महीने शुरू होने वाला है लेकिन निर्माता कंपनी गिलिड ने आपूर्ति के मुद्दों पर काम किया है और आपातकालीन अपवादों के साथ नए आदेशों को प्रतिबंधित कर रही है.

हालांकि, अभी भी यह कहना जल्द ही होगा कि क्या रीमेडिसवीर नावेल कोरोनवायरस के खिलाफ काम करता है.

एचआईवी ड्रग कॉम्बो लोपीनेवीर और रीटोनेवीर

एक और दवा जिसने आशा दिखाया है वह लोपीनेवीर और रीटोनेवीर का संयोजन है. चीन में परीक्षण के एक दौर में विफल होने के बावजूद, इस संयोजन को दुनिया भर में जांच के लायक माना जा रहा है.

लोपीनेवीर और रीटोनेवीर भारत में एचआईवी दवाओं ज्यादा उपयोग नहीं होता है, लेकिन अमेरिका में इसका उपयोग किया जाता है. भारत ने इस संयोजन का इस्तेमाल इस महीने की शुरुआत में कोविड -19 के साथ दो इतालवी पर्यटकों के इलाज के लिए किया था. जबकि दोनों कथित तौर पर संक्रमण से उबर चुके थे, रोगियों में से एक 79 वर्षीय व्यक्ति की बाद में कार्डिक अरेस्ट के कारण मृत्यु हो गई.

लेकिन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने गंभीर मामलों के इलाज के लिए इस दवा के उपयोग को मंजूरी दे दी है. रूस ने हल्के मामलों के लिए दवा को मंजूरी दे दी है और चीनी परीक्षणों के परिणामों के बावजूद वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह कामगार होगा.

ऐसा इसलिए है क्योंकि अध्ययन में लोपीनेवीर और रीटोनेवीर पर रोगियों के लिए बेहतर परिणाम नहीं मिले हैं, कॉम्बो दवा ने गहन देखभाल में खर्च किए गए समग्र समय को कम कर दिया है. महामारी के दौरान यह एक महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता है कि आईसीयू बेड सीमित हैं. ऐसे समय में मरीजों को आईसीयू से बाहर ले जाने और उन्हें दूसरों के लिए उपलब्ध कराने से अधिक जिंदगियां बच सकती हैं.

ट्रायल्स में एक सीमा भी थी क्योंकि इसमें ऐसे मरीज भर्ती थे जो गंभीर रूप से बीमार थे और उनकी मृत्यु का खतरा अधिक था. ट्रायल रोगियों की समग्र मृत्यु दर, चाहे जो भी उपचार दिया गया हो, दुनिया भर में जो देखा गया था उससे कहीं अधिक था.

इसका मतलब है कि उपचार को उन रोगियों के बीच आगे की जांच करने की आवश्यकता है जो पहले से ही बहुत बीमार नहीं हैं.

मलेरिया रोधी वैक्सीन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा ने कई सरकारों को उत्साहित किया है. हाल ही पब्लिश फ्रांसीसी अध्ययन में अपनी सफलता का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि एज़िथ्रोमाइसिन दवा के पास इतिहास में सबसे बड़े गेम-चेंजर में से एक होने का मौका है.

मंगलवार को भारत ने इस दवा के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि इस मलेरिया रोधी दवा की मांग बढ़ गई है.

आईसीएमआर ने इस दवा के उपयोग को उन लोगों के लिए एक निवारक उपाय के रूप में भी मंजूरी दी है जो कोविड-19 के रोगियों के संपर्क में आए हैं. इसका मतलब है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ-साथ कोरोनोवायरस रोगियों के परिवार के सदस्यों को इस बीमारी के किसी भी लक्षण के विकसित होने से पहले ही इस दवा को निर्धारित किया जा सकता है. हालांकि, आईसीएमआर ने दवा के उपयोग को ‘प्रयोगात्मक’ कहा है और कहा कि इसे डॉक्टर की देखरेख के बिना नहीं लिया जाना चाहिए.

विशेषज्ञों को दवा के जल्द से जल्द अनुमोदन के बारे में सूचित किया जाता है जो प्रतिकूल दुष्प्रभावों का कारण बनता है. फ्रांसीसी अध्ययन जिसने ट्रंप को उत्साहित किया था वह क्लीनिकल ​​परीक्षण नहीं है.

इसके अलावा, अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं में से एक पत्रिका का प्रधान संपादक है. जिसमें शोध प्रकाशित किया गया था. इस तरह के अध्ययनों की एक सहकर्मी समीक्षा में आमतौर पर चार-पांच सप्ताह लगते हैं, लेकिन इस पेपर की एक दिन से भी कम समय में समीक्षा की गई, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं.

एक अलग लेख में, चीनी शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन प्रभावी रूप से सार्स-सीओवी-2 या कोविड -19, संक्रमण को रोक सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी पाया कि कि लंबे समय तक और दवा के उपयोग से  विषाक्तता  (ज़हरीली) हो सकती है और संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए अभी और परीक्षणों की जरूरत है.

एंटी वायरल प्रभावों के अलावा हाइड्रो क्लोक्वीन में एक एंटी इफ्लेमेट्री एजेंट होता है. यह साइटोकीन्स नामक शक्तिशाली प्रोटीन की ताकत को कम करना है. कोविड 19 के रोगियों के प्लाज़्मा में पड़ी मात्रा में पाया जाता है.

यदि यह दवा कोरोनोवायरस के खिलाफ प्रभावी साबित होती है, तो महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई इसकी सस्ती लागत और आसान उपलब्धता के कारण बहुत आसान हो जाएगी.

हालांकि, सरकार को इससे इलाज शुरू करने से पहले इस विषय पर वैज्ञानिक आम सहमति की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है. बड़े परीक्षण अधिक स्पष्टता ला सकते हैं कि क्या दवा काम करेगी या नहीं.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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