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Wednesday, 24 April, 2024
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अयोध्यावासियों को भरोसा, 370 हटने की तरह राम मंदिर भी अब बनकर रहेगा

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद- 370 के खात्मे के बाद अधिकतर स्थानीय लोगों को अब भरोसा हो गया है कि अयोध्या में भी कानून के जरिए राम मंदिर बन सकता है.

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अयोध्या : हनुमानगढ़ी की सुरक्षा ड्यूटी पर लगे 50 साल के रामजस (नाम बदला हुआ) कहते हैं ’14-14 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, घर का खाना तक नसीब नहीं होता.’ लंबी ड़्यूटी और लंबे समय से लंबित इस मामले को किसी भी हाल में सुलझाने- मंदिर या मस्जिद बनाए जाने – के सुझाव पर बिदकते हुए वे कहते हैं… ‘राम का मंदिर उनके जन्म स्थान पर नहीं बनेगा तो कहां बनेगा. बाबर तो आक्रांता था, उसने राम जी का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया.’ यह कहते हुए वह राम लला के बॉडीगार्ड की भूमिका में तन चुके थे.

रामजस को भरोसा है कि भाजपा की सरकार में जम्मू-कश्मीर में 370 हटने की तरह आयोध्या अब मंदिर कानून से बन जाएगा.

राम जन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई चल रही है. बुधवार को अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस बहस को 18 अक्टूबर तक खत्म होने का अनुमान लगाया है. लेकिन जैसे-जैसे बहस फैसले की तरफ बढ़ रही है अयोध्या में माहौल बन रहा है कि मंदिर बन कर रहेगा.

मंदिर बनाए जाने को लेकर लोगों में बढ़ा विश्वास

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है. और ये उनके हाव-भाव में भी दिखता है. मुमकिन है कुछ असर शायद फैज़ाबाद का नाम बदलकर अयोध्या करने का भी हो.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के पक्षकारों से 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने को कहा है. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, ’18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने का एक संयुक्त प्रयास करते हैं. अगर जरूरत पड़ी तो, अदालत शनिवार को सुनवाई के लिए एक घंटे अतिरिक्त समय दे सकती है.’ उम्मीद है कि 17 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने से पहले अयोध्या पर फैसला आ सकता है.

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सुलतानपुर रोड बाईपास नाका पर पान और कोल्डड्रिंक की दुकान लगाने वाले जग प्रसाद चौरसिया | आशीष यादव

‘सभी चाहते हैं मंदिर, कानून से बनेगा’

अयोध्या सुलतानपुर-अयोध्या बाईपास नाके पर पान और कोल्ड ड्रिंक की दुकान चलाने वाले जग प्रसाद चौरसिया (65) कहते हैं, ‘मंदिर तो बनना ही चाहिए, ‘सब लोग चाहत हैं कि मंदिर बनि जाय.’ (अवधी भाषा में). दुकान पर खड़े कुछ लोगों ने उनकी हां में हां भी मिलाई.

फैसला मंदिर के पक्ष में न आया तो? चौरसिया को विश्वास है, ‘भाजपा की सरकार है मंदिर कानून से बनेगा जम्मू-कश्मीर में 370 हटाने की तरह.’

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी मंदिर के पक्ष में

मुलायम सिंह यादव और कांशीराम की ‘ मिले मुलायम कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम’ वाले नारे के साथ खड़ी होकर धर्म की राजनीति को हराने वाली जातियां और उनके कार्यकर्ता भी मंदिर मुद्दे पर एकमत हैं. पर ज्यादातर दलित इस मुद्दे से कोई खास इत्तेफाक नहीं रखते दिखे.

दिप्रिंट ने जातीय वर्ग के उस खेमे से बात की जो राम मंदिर मुद्दे के खिलाफ सेक्युलर और समाजवादी राजनीति के साथ रहा है.

अयोध्या बाईपास के पास रेस्त्रां चलाने वाले सपा के कार्यकर्ता आशीष यादव ने बताया, ‘मंदिर बनना चाहिए इसलिए नहीं कि यह भाजपा, आरएसएस या हिंदू संगठनों का मुद्दा है, यह आस्था का मामला है.’ साथ में बैठे मनीष यादव जो कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी में समाजवादी छात्रसभा और सपा की राजनीति में सक्रिय हैं ने कहा- ‘मंदिर बनना चाहिए. मंदिर निर्माण मामले पर हम सब एक हैं लेकिन यहां दंगा-फसाद नहीं होना चाहिए.’ उनका मानना है कि जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद भाजपा यहां मंदिर बनाने का कदम भी ज़रूर उठाएगी. वहीं बैठे निशांत मिश्रा भी मंदिर बनने को जरूरी मानते हैं.

भाजपा से जुड़े लोगों को भरोसा- अब मंदिर बनकर रहेगा

भाजपा के नये सदस्य बने अंकित तिवारी और आलोक पाण्डेय (25-30) मंदिर बनने को लेकर आश्वस्त दिखे. उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आएगा. मंदिर इस बार बनकर रहेगा.

जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद यह तय हो गया है कि कानून के जरिए मंदिर भी बन सकता है.’

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आचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य.

माननीय न्यायाधीश की कलम रुक जाएगी

हनुमान गढ़ी से बाएं ‘दशरथ के राजमहल’ में महंत आचार्य दवेंद्र प्रसादाचार्य ने कहा, ‘माननीय कोर्ट का रोजाना सुनवाई के लिए धन्यवाद, लोगों में न्याय पर भरोसा बढ़ा है. मुस्लिम पक्षकार इसे लटकाना चाहते थे.’

वह आगे कहते हैं ‘अयोध्या राम की जन्मभूमि है. यहां राम मंदिर चाहिए न कि बाबरी मस्जिद. सारा झगड़ा मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने वाले बाबर ने लगवाया है.’ मंदिर के खिलाफ फैसला आने के सवाल पर वह कहते हैं, ‘हमें पूरा भरोसा है न्यायालय राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला देगा.’

वह हंसते हुए कहते हैं, ‘जज की कलम रुक जाएगी, राम उनका भी दिमाग बदल देंगे. आखिर उनके अंदर भी तो राम हैं.’ ‘और अगर फैसला हमारी मांग के खिलाफ आया तो हम सरकार से संसद में कानून बनवाकर मंदिर की मांग करेंगे.’

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आयोध्या में दर्शन करने के लिए आने वाले लोग और दुकानदार.

ज्यादातर व्यापारी मंदिर के पक्ष में

मंदिर क्षेत्र में लगभग हर जाति-धर्म के दुकानदार हैं और सभी चाहते हैं, मंदिर का निर्माण हो. यहां तक कि परिसर में मौजूद मुस्लिम व्यापारी भी मंदिर बनाए जाने के पक्ष में दिखे.

फैसले से पहले ही मंदिर निर्माण की तैयारी पर हिंदू पक्षकार बोले-

सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्षकार महंत रामदास ने सर्वोच्च अदालत में रोजाना सुनवाई को सही ठहराते हुए फैसला मंदिर के पक्ष में आने का भरोसा जताया. फैसला मंदिर के पक्ष में न आने पर कहते हैं, ‘हम कानून के जरिए मंदिर की मांग करेंगे.’

पहले से ही मंदिर की तैयारी पर रामदास ने कहा, ‘इसकी वजह 2010 में आया इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला है जो खुदाई के साक्ष्यों के आधार पर मंदिर के पक्ष में आया था. लेकिन कुछ हिस्से पर विवाद के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.’

मंदिर को लेकर मुस्लिम पक्षकारों की मंशा पर उनका कहना था, ‘वे भी इसके पक्ष में हैं लेकिन कश्मीर की तरह यहां भी कुछ अलगाववादी हैं जो इसके खिलाफ हैं.’

वहीं बाबरी मस्जिद तोड़े जाने और संविधान के खिलाफ होने की बात पर वह कहते हैं, ‘संविधान के खिलाफ तो किसी सरकारी इमारत को गिराना, स्वतंत्र भूमि पर निर्मित कुछ गिराना है लेकिन किसी शासक का हिंदुओं को मार कर उनके पवित्र स्थान पर कोई निर्माण तोड़ना कैसे गलत है.’

मुस्लिम पक्षकार बोले- सुप्रीम कोर्ट सबूतों के आधार पर दे फैसला

मंदिर मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल हाशिम (54) सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने को तैयार हैं. उनका कहना है, ‘कोर्ट सबूतों के आधार पर फैसला दे. दस्तावेजों में मस्जिद के बगल में चौहड्डी में भगवान राम के जन्म स्थान और राजाओं के मंदिर का जिक्र है.’

जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा रहा

2014 और 2019 में भाजपा से चुनाव हारने वाले मुख्य प्रतिद्वंदी फैजाबाद (अब अयोध्या) के दिग्गज समाजवादी नेता रहे मित्रसेन के बेटे आनंद सेन ने मंदिर को जनता को गुमराह करने वाला मुद्दा बताते हैं, ‘जनता को पूरी तरह भ्रमित किया गया है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को हमारे नेता और हम पूरी तरह मानेंगे. सर्व-धर्म समभाव के तहत मंदिर-मस्जिद दोनों बने. किसी को ठेस न पहुंचाया जाय.’

सेन ने कहा, ‘आज सवाल मंदिर-मस्जिद का नहीं, देश बचाने का है.

बीजेपी नेता खुदाई के साक्ष्यों को अपने पक्ष में देख रहे

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर अयोध्या से बीजेपी विधायक वेद प्रकाश ने कहा, ‘खुदाई से मिले साक्ष्य सबसे अहम सबूत हैं. इसी आधार पर हमें भरोसा है कि फैसला हमारे पक्ष में आएगा.’

जिले से बीजेपी सांसद लल्लू सिंह से कई बार बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका जवाब नहीं मिल सका है. उनका बयान मिलते ही अपडेट किया जाएगा.

एक नजर में इतिहास के पन्नों से झांकती अयोध्या

फैजाबाद जिसका नाम योगी सरकार ने पिछले दिनों बदलकर अयोध्या कर दिया है. माना जाता है कि अयोध्या में कभी युद्ध नहीं होता और न हुआ है. हालांकि यहां पिछले 70 से सालों से रामजन्म भूमि के नाम पर लगातार झगड़ा चल रहा है. पर हां अभी तक राम के नाम पर फैलाए जाने वाले दंगे लोगों की समझदारी से नाकाम हुए हैं. लाखों कारसेवकों के जरिये लालकृष्ण आडवाणी के भड़काऊ भाषण के बाद बाबरी मस्जिद का ढहाया जाना और उससे पैदा उन्माद बस उस भीड़ तक ही सीमित रहा. आस पास कोई असर नहीं पहुंचा. लिहाजा अयोध्या ने साबित किया है कि उसे लड़ाई-झगड़ा पसंद नहीं, सहिष्णुता और भाईचारा उसके डीएनए में है.

अयोध्या जहां माना जाता है कि राम का जन्म हुआ. लेकिन राम कहां पैदा हुए थे इस पर विवाद है. रामायण और कुछ ग्रंथ के सिवा इसका कोई लिखित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता है.

राम काल्पनिक चरित्र हैं या वह वाकई पैदा हुए थे इसको लेकर अलग-अलग मान्यताएं है. देश में राम के बारे में वाल्मीकि की रामायण सहित अलग-अलग कहानियों वाली लगभग 500 रामायण लिखी गई हैं. लेकिन तुलसीदास की रामचरित मानस से राम दुनियाभर में पहुंचे . तुलसीदास ने मुगल बादशाह अकबर के काल में इसे लिखा था.

कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने और सरकार के संसद में तमाम कड़े कानूनी कदमों ने अयोध्या में मंदिर की आस जगा दी है. लोगों को अब भरोसा हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट मंदिर के पक्ष में फैसला न भी दे तो भी कानून के जरिए मंदिर बन सकता है.

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